मंशापुर कुटी पर फिर गहराया महंत की गद्दी का विवाद

Lucknow Bureau Updated Wed, 06 Dec 2017 12:34 AM IST
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मंशापुर कुटी के महंत की गद्दी को लेकर विवाद
अंबेडकरनगर। महरुआ थाना क्षेत्र के मंशापुर स्थित प्रसिद्ध डम्मरदास कुटी के महंत रामदास का सोमवार रात निधन हो गया। इसी के साथ कुटी की महंती को लेकर विवाद फिर गहरा गया है। मंगलवार को अंतिम संस्कार के बाद दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों भीड़ भी जुट गई। विवाद की सूचना मिलते ही महरुआ एसओ पुलिस बल के साथ कुटी पहुंचे। स्थिति गंभीर देख उन्होंने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। थोड़ी ही देर में बेवाना व भीटी थाने की फोर्स लेकर सीओ भीटी पहुंच गए। अधिकारियों ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। फिलहाल अभी गद्दी को लेकर कुछ निर्णय नहीं हो सका है।
गौरतलब है कि, अकबरपुर तहसील क्षेत्र के मंशापुर गांव में डम्मरदास बाबा की बड़ी कुटी है। आस्था के इस केंद्र पर प्रतिदिन कई गांवों के श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा डम्मरदास बाबा के नाम से अंबेडकरनगर के अलावा सुल्तानपुर व बस्ती जिले में कु ल 26 मंदिर हैं। मुख्य मंदिर मंशापुर कुटी ही है। यहां के महंत ही सभी कुटियों का संचालन करते थे। मंशापुर कुटी के नाम पर करीब 300 बीघा भूमि के अलावा कई अन्य कीमती संपत्तियां हैं। बाबा के निधन के बाद महंत की गद्दी उनके शिष्य धर्मदास ने संभाली और फिर उनके निधन के बाद उनके शिष्य रामदास ने भी गद्दी संभाली। मगर बाबा रामदास की महंती का बाबा डम्मर दास के दूसरे शिष्य शोभादास जी महाराज ने विरोध शुरू कर दिया। शोभादास जी महाराज ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि, असली हकदार वे सब हैं। फिलहाल मामला हाईकोर्ट में लंबित है।
इस बीच गत दिनों बाबा रामदास की तबीयत खराब हो गई और उन्होंने मदद के लिए बस्ती स्थित कुटी के महंत सुखराम दास को बुला लिया। करीब दो माह तक सुखराम दास ने महंत रामदास का उपचार कराया। सोमवार रात महंत रामदास का निधन हो गया। मंगलवार सुबह जब लोगों को इसकी जानकारी हुई तो बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बाबा के निधन पर गहरी शोक संवेदना जाहिर की। हिंदू रीति रिवाज के अनुसार महंत का अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद बस्ती से आए महंत सुखराम दास ने गद्दी संभालनी चाही तो विवाद शुरू हो गया। शोभानंद महाराज के शिष्य प्रकाशानंद ने इसका विरोध किया। कुटी की गद्दी को लेकर इस बीच ग्रामीण भी दो फाड़ हो गए। कुछ लोग प्रकाशानंद महाराज का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ सुखराम दास का। इसी विवाद की सूचना पर महरुआ, बेवाना व भीटी थाने की पुलिस टीम को जुटना पड़ा। सीओ भीटी अमर बहादुर ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया। बाद में एसडीएम हरीराम व नायब तहसीलदार सत्यपाल प्रजापति भी मौके पर पहुंचे। सीओ अमरबहादुर ने बताया कि, विवाद की सूचना पर वे सब पहुंचे थे। तथ्यों के अनुरूप निर्णय कराया जाएगा।

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