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गैर इरादतन हत्या में तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा
Updated Fri, 04 Aug 2017 11:16 PM IST
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गैरइरादतन हत्या में तीन को आजीवन कारावास
अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। गैर इरादतन हत्या मामले में तीन अभियुक्तों को अपर जनपद न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्तों पर 20-20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अहिरौली क्षेत्र में दामोदरपुर गांव निवासी जितेन्द्र कुमार ने भीटी थाने में 31 दिसंबर 2011 केस दर्ज कराया था कि उसके पिता सहदेव को गांव के मस्तराम, विजय प्रताप व परिक्रमा आदि ने मारा पीटा। लाठी डंडे के हमले में गंभीर रूप से घायल सहदेव बेहोश हो गए। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया। आरोपी इन दिनों जमानत पर बाहर थे। इस बीच केस सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने अभियोजन कथानक का समर्थन करते हुए कहा कि सभी मुल्जिमान मोबाइल चोरी के विवाद के कारण सहदेव व उसके परिवार से रंजिश रखते थे। इसी के चलते पिटाई की जिससे सहदेव की मौत हो गई। केस की सुनवाई में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय अरविन्द कुमार सिंह ने अभियुक्त मस्तराम, विजय प्रताप व परिक्रमा को दोषी पाया। बचाव पक्ष ने अभियुक्तों की गरीबी का हवाला देते हुए कम सजा देने पर जोर दिया। अभियोजन पक्ष ने अधिकतम सजा की मांग की। एडीजे ने अपने आदेश में तीनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए उन पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। कहा गया कि अर्थदंड नहीं अदा करने पर 6-6 माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। गैर इरादतन हत्या मामले में तीन अभियुक्तों को अपर जनपद न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्तों पर 20-20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अहिरौली क्षेत्र में दामोदरपुर गांव निवासी जितेन्द्र कुमार ने भीटी थाने में 31 दिसंबर 2011 केस दर्ज कराया था कि उसके पिता सहदेव को गांव के मस्तराम, विजय प्रताप व परिक्रमा आदि ने मारा पीटा। लाठी डंडे के हमले में गंभीर रूप से घायल सहदेव बेहोश हो गए। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया। आरोपी इन दिनों जमानत पर बाहर थे। इस बीच केस सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने अभियोजन कथानक का समर्थन करते हुए कहा कि सभी मुल्जिमान मोबाइल चोरी के विवाद के कारण सहदेव व उसके परिवार से रंजिश रखते थे। इसी के चलते पिटाई की जिससे सहदेव की मौत हो गई। केस की सुनवाई में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय अरविन्द कुमार सिंह ने अभियुक्त मस्तराम, विजय प्रताप व परिक्रमा को दोषी पाया। बचाव पक्ष ने अभियुक्तों की गरीबी का हवाला देते हुए कम सजा देने पर जोर दिया। अभियोजन पक्ष ने अधिकतम सजा की मांग की। एडीजे ने अपने आदेश में तीनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए उन पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। कहा गया कि अर्थदंड नहीं अदा करने पर 6-6 माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
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