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डेढ़ दशक तक जीत को तरसे फिर भी नहीं छोड़ी कांग्रेस

Tue, 01 Mar 2022 12:14 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 12:14 AM IST
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Congress did not give up on victory for one and a half decade
टांडा (अंबेडकरनगर)। विधानसभा चुनाव में हमेशा कांग्रेस की तरफ से ही चुनाव मैदान में उतरने वाले निसार अहमद को डेढ़ दशक तक जीत को तरसना पड़ा। इसके बावजूद न तो उन्होंने कांग्रेस छोड़ी और न ही पार्टी से उनका मोह छूटा। राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले निसार अहमद अंसारी अपने सरल व सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के स्वामी थे। वह टांडा से कांग्रेस के विधायक चुने जाने के साथ ही एमएलसी भी बनाए गए। वीर बहादुर सिंह की कांग्रेसी सरकार में तो उन्हें राज्य मंत्री भी बनाया गया।
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70 के दशक की राजनीति को जानने व समझने वाले लोग आज भी निसार अहमद के कार्य व्यवहार व सादगी की चर्चा करते हैं। 52 मतों के मामूली अंतर से हार के बावजूद वह न तो विचलित दिखे और न ही दूसरों पर आरोप प्रत्यारोप किया। बाद में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें एमएलसी बना कर वीर बहादुर सिंह की सरकार में उद्योग व हथकरघा विभाग का राज्य मंत्री भी बनाया। शेरवानी व पायजामा उनका प्रिय लिबास था। वह तमाम उम्र इसे ही धारण करते रहे।
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उन्होंने पहला चुनाव 1974 में कांग्रेस पार्टी के टिकट से लड़ा था। इसमें उन्होंने भारतीय क्रांति दल बीकेडी के प्रत्याशी राम चंद्र आजाद को 6 हजार से अधिक मतों से हराकर जीत हासिल की थी। उसके बाद वह 1980 से 1993 तक कई बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े लेकिन जीत उनसे दूर ही रही। इसके बाद भी न तो उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ी और न ही उनका मोह पार्टी से टूटा। नगर के एचटी इंटर कालेज से शिक्षा हासिल करने के बाद उच्च शिक्षा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जाकर स्नातक के साथ गोल्ड मेडल भी हासिल किया।
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निसार अहमद अंसारी ऐसे ईमानदार नेता थे जो चुनाव लड़ने के बाद पार्टी फंड के बचे रुपये की पाई पाई का हिसाब देकर उसे वापस कर देते थे। वह हमेशा साइकिल व रिक्शा से चलते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में न तो बाइक खरीदी न ही मोटर कार। 22 जनवरी 2009 को उनका इंतकाल हो गया। निसार अहमद भले ही हमारे बीच नही हैं, लेकिन उनकी सादगी ईमानदारी की चर्चा चुनाव आने पर जरूर लोगों के जुबान पर आ जाती है। टांडा नगर के लोग आज भी उनकी मिसाल देते हैं।
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