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Ambedkar Nagar News: लर्निंग काॅर्नर की मदद से खेल-खेल में पढ़ेंगे बच्चे
Wed, 18 Sep 2024 10:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Wed, 18 Sep 2024 10:48 PM IST
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अंबेडकरनगर। जिले के 1046 आंगनबाड़ी स्कूलों में 84 लाख 83 हजार 60 रुपये की लागत से लर्निंग कार्नर की स्थापना की जाएगी। प्रत्येक कक्षा में यह काॅर्नर बनेंगे, जिसमें खेल व शिक्षण सामग्री रखी जाएंगी। बच्चों को खेल-खेल में रोचक ढंग से पढ़ाई कराई जाएगी। प्रत्येक विद्यालय को सामग्री खरीदने को 8,110 रुपये की धनराशि दी जाएगी। यह धनराशि विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में भेजी जाएगी।
समिति ही बच्चों के लिए विभिन्न तरह के खेल सामग्री खरीदेगी ताकि उन्हें अच्छी शिक्षा खेल-खेल में दी जा सके। सामग्रियों में फल-फूल व सब्जियों की प्लास्टिक की आकृतियां, खिलौने, किचन का सामान जिसमें प्लास्टिक का चूल्हा व बर्तन इत्यादि रखा जाएगा ताकि बच्चे उन्हें आसानी से पहचान सकें और अक्षर ज्ञान ले सकें। यह सबकुछ अलग-अलग चार कॉर्नर पर बेहतर ढंग से रखे जाएं। आकृतियों के माध्यम से छोटे बच्चे आसानी से चीजों को पहचान व सीख सकेंगे।
खास बात यह है कि हर कॉर्नर का अपना अलग महत्व होगा। पहला कॉर्नर सीखने-पढ़ने का होगा, जिसमें चित्रों पर आधारित पुस्तक, साधारण रंग-बिरंगे तकिए, स्लेट और पोस्टर इत्यादि लगाए जाएंगे। दूसरा आर्ट कॉर्नर होगा जिसमें आर्ट्स सीट्स, पेंसिल कलर, कैंची, टूथ ब्रश, तौलिया व पौधों का गमले में रखने की व्यवस्था होगी। तीसरा ब्लाॅक कॉर्नर होगा जहां लकड़ी व प्लास्टिक के रंग-बिरंगे ब्लाॅक होंगे। इस कॉर्नर में हिंदी व अंग्रेजी के अक्षर और अंक होंगे और चित्र पहेलियां होंगी। आखिरी व चौथा प्रदर्शन कॉर्नर फल, फूल व सब्जियों के प्लास्टिक के सेट का होगा। इसे गुड़िया, शीशा कंघा और छोटे पर्दे लगाकर सजाया जाएगा।
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जिले के 1046 आंगनबाड़ी स्कूलों में लर्निंग काॅर्नर बनाए जाएंगे। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृति के बाद स्कूलों के खातों में धनराशि भेजी जाएगी।
सुरेश तिवारी, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा
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समिति ही बच्चों के लिए विभिन्न तरह के खेल सामग्री खरीदेगी ताकि उन्हें अच्छी शिक्षा खेल-खेल में दी जा सके। सामग्रियों में फल-फूल व सब्जियों की प्लास्टिक की आकृतियां, खिलौने, किचन का सामान जिसमें प्लास्टिक का चूल्हा व बर्तन इत्यादि रखा जाएगा ताकि बच्चे उन्हें आसानी से पहचान सकें और अक्षर ज्ञान ले सकें। यह सबकुछ अलग-अलग चार कॉर्नर पर बेहतर ढंग से रखे जाएं। आकृतियों के माध्यम से छोटे बच्चे आसानी से चीजों को पहचान व सीख सकेंगे।
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खास बात यह है कि हर कॉर्नर का अपना अलग महत्व होगा। पहला कॉर्नर सीखने-पढ़ने का होगा, जिसमें चित्रों पर आधारित पुस्तक, साधारण रंग-बिरंगे तकिए, स्लेट और पोस्टर इत्यादि लगाए जाएंगे। दूसरा आर्ट कॉर्नर होगा जिसमें आर्ट्स सीट्स, पेंसिल कलर, कैंची, टूथ ब्रश, तौलिया व पौधों का गमले में रखने की व्यवस्था होगी। तीसरा ब्लाॅक कॉर्नर होगा जहां लकड़ी व प्लास्टिक के रंग-बिरंगे ब्लाॅक होंगे। इस कॉर्नर में हिंदी व अंग्रेजी के अक्षर और अंक होंगे और चित्र पहेलियां होंगी। आखिरी व चौथा प्रदर्शन कॉर्नर फल, फूल व सब्जियों के प्लास्टिक के सेट का होगा। इसे गुड़िया, शीशा कंघा और छोटे पर्दे लगाकर सजाया जाएगा।
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जिले के 1046 आंगनबाड़ी स्कूलों में लर्निंग काॅर्नर बनाए जाएंगे। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृति के बाद स्कूलों के खातों में धनराशि भेजी जाएगी।
सुरेश तिवारी, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा