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स्कूल खुले तो खतरे में पड़ेगी बच्चों की जान

Sun, 03 Jan 2021 11:14 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jan 2021 11:14 PM IST
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Children's life will be in danger if school opens
अंबेडकरनगर के प्राथमिक विद्यालय कोतूपुर के ऐसे जर्जर कक्ष में होती है बच्चों की पढ़ाई। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। कॉन्वेंट स्कूलों से मुकाबले की कोशिशों व दावों के बीच कदम-कदम पर अव्यवस्थाएं ही जिले के परिषदीय विद्यालयों की मुख्यत: पहचान बन चुकी हैं। दरअसल परिषदीय विद्यालयों की हालत तमाम कोशिशों के बाद भी अत्यंत बदहाल है। कहीं जोखिम में बच्चों की जान है, तो कहीं आवारा पशुओं का संकट। पेयजल, साफ-सफाई की समस्या से जूझ रहे छात्र-छात्राओं के सामने जर्जर भवन का भी संकट बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में जब 1857 परिषदीय विद्यालयों में लगभग सवा दो लाख बच्चों की कक्षाएं शुरू होंगी, तो यकीनन उनके सामने पहले जैसी ही मुसीबतें फिर से सामने आएंगी। कोविड संक्रमण के चलते लॉकडाउन के दौरान विद्यालयों की दशा व दिशा बदलने का अच्छा अवसर मिला था, लेकिन इसका लाभ नहीं उठाया जा सका।
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मौजूदा समय में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। दिल्ली मॉडल बनाम यूपी मॉडल की चर्चाएं जोरों पर हैं। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की स्थिति में व्यापक सुधार के दावे किए जा रहे हैं। कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही है। नि:संदेह ऐसे कई विद्यालय हैं, जहां संबंधित शिक्षकों ने निजी स्तर पर प्रयास कर परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प किया है, लेकिन अभी भी अधिकतर ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं, जो कदम-कदम पर खस्ताहाली व अव्यवस्थाओं का जीता जागता उदाहरण बने हुए हैं। ऐसे कई परिषदीय स्कूलों का जायजा लिया गया, तो वहां व्याप्त समस्याएं कुछ इस तरह उभरकर सामने आईं।
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भूकंप से जर्जर हुए भवन को नहीं कराया दुरुस्त
जलालपुर शिक्षा क्षेत्र अंतर्गत परिषदीय विद्यालय हाजीपुर खास में बच्चों की जान का संकट बना हुआ है। दरअसल लगभग पांच वर्ष पहले आए भूकंप के दौरान यहां कई कक्ष व मुख्य भवन की छत व दीवार में दरार आ गई। नतीजा यह हुआ कि भवन जर्जर हो गया है। कभी भी इसके गिरने की आशंका बनी है। लॉकडाउन के पहले भी बच्चे इसी जर्जर भवन में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को विवश थे। अब जब आगामी दिनों में फिर से पढ़ाई शुरू किए जाने की तैयारी है, तो भी अभी तक जर्जर भवन को दुरुस्त कराने की सुध नहीं ली जा सकी है। यह हाल तब है, जबकि कई बार पत्राचार कर विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। विद्यालय में बना शौचालय अत्यंत बदहाल है, तो वहीं विद्यालय के दो कक्ष व बरामदे की फर्श हद दर्जे तक क्षतिग्रस्त हो गई है। एक कक्ष की आधी खिड़की जमीन पर टूटकर गिरी पड़ी है।
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पगडंडी से होकर स्कूल पहुंचते हैं बच्चे
परिषदीय विद्यालय जफरपुर का मुख्य भवन यूं तो बेहतर स्थिति में है। रंग रोगन की स्थिति भी ठीक है, लेकिन यहां विद्यालय तक पहुंचने के लिए छात्र-छात्राओं व शिक्षकों के समक्ष समुचित रास्ते का अभाव बना है। नतीजा यह है कि लॉकडाउन से पहले बच्चों को पगडंडियों, खेतों व एक बाग से होकर विद्यालय आने को विवश होना पड़ता रहा है। इसी तरह शिक्षकों को विद्यालय तक पहुंचने में असुविधा हो रही है। बताया जाता है कि विद्यालय के चारों तरफ कुछ ग्रामीणों की खतौनी है, जिसके चलते रास्ते का संकट बना हुआ है। विद्यालय में चहारदीवारी का भी अभाव है।
नहीं बनी चारदीवारी, सांडों से खतरा
अकबरपुर शिक्षा क्षेत्र के परिषदीय विद्यालय गदायां में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। सबसे ज्यादा समस्या यहां चारदीवारी को लेकर है। विद्यालय के ठीक सामने एक मुख्य मार्ग है, तो वहीं पिछले हिस्से में तमसा नदी का किनारा है। इसके बावजूद यहां अब तक चारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि शिक्षा अवधि के दौरान ही कई तरह के आवारा पशुओं का संकट यहां बना रहता है। सांड़ों से लेकर स्ट्रीट डॉग कई बार लड़ते झगड़ते परिसर तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में छात्र-छात्राओं को भागकर अपने को बचाना पड़ता है। उम्मीद थी कि लॉकडाउन के दौरान यहां यह दिक्कत दूर हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब आने वाले दिनों में बच्चों को फिर से वही सब पुरानी मुसीबत का सामना करना पड़ना होगा। विद्यालय परिसर में शुद्ध पेयजल के लिए लगा हैंडपंप धंस गया है। उससे अब पानी नहीं निकलता। इसे ठीक कराने की सुध नहीं ली जा रही है।
कभी भी जानलेवा हो सकती जर्जर अलमारी
बसखारी शिक्षा क्षेत्र का परिषदीय विद्यालय कोतूपुर भी अव्यवस्थाओं से घिरा है। यहां एक कक्ष की फर्श तीन चौथाई से अधिक उखड़ चुकी है। खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं, तो कक्ष की दीवारों में दरार हो गई है। नतीजा यह है कि जर्जर हो चुके भवन में बरसात के समय में रिसाव होता है। ईंट गारे व लकड़ी का प्रयोग कर बनाई गई एक अलमारी इस तरह जर्जर हो गई है कि वह कभी भी गिर सकती है। बीते वर्ष ही इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र के एक परिषदीय विद्यालय की अलमारी गिर जाने से छात्रा की मौत हो गई थी। इसके बाद भी इस तरह के हादसों से सबक नहीं लिया जा रहा है। यहां भी चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है। शौचालय की स्थिति यहां अत्यंत बदतर है।
हैंडपंप लगाकर चबूतरा बनाना गए भूल
कटेहरी शिक्षा क्षेत्र के परिषदीय विद्यालय हरिनाथपुर में बना भवन भी जर्जर हालत में है। बरसात के दिनों में कक्षों में सीलन की स्थिति रहती है। विद्यालय में चहारदीवारी नहीं बन सकी है। इससे अक्सर यहां छुट्टा पशु पहुंचते रहते हैं। उनके द्वारा की जाने वाली गंदगी से भी मुश्किल होती है। यहां पेयजल के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप तो लगाया गया, लेकिन उसके किनारे चबूतरे का निर्माण नहीं कराया गया। नतीजा यह है कि हैंडपंप चलने के दौरान आसपास कीचड़ उत्पन्न होता रहता है। साफ-सफाई का भी संकट यहां ज्यादातर समय बना रहता है।
जर्जर छत की नहीं ली गई सुध
भीटी शिक्षा क्षेत्र में स्थित है परिषदीय विद्यालय रानीपुर गोसाईं का पूरा। यूं तो इस परिषदीय विद्यालय का बाहरी लुक ठीकठाक नजर आता है, लेकिन अंदर पहुंचने पर स्थिति बदहाल दिखती है। यहां दो कक्षों की छत जर्जर हो चुकी है। बच्चों को बरामदे व अतिरिक्त कक्षों में बैठकर पढ़ने को विवश होना पड़ता है। लंबे समय से यहां जरूरी मरम्मत की आवश्यकता बनी हुई है, लेकिन उस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अभिभावक लंबे समय से मरम्मत कार्य को कराए जाने की मांग करते चले आ रहे हैं, लेकिन उस तरफ ध्यान देने की सुध जिम्मेदारों को नहीं है।

ऑपरेशन कायाकल्प में दूर होंगी दिक्कतें
ऑपरेशन कायाकल्प योजना शुरू की गई है। जिन भी विद्यालयों में जो भी दिक्कतें हैं, उन्हें क्रमवार दूर कराया जा रहा है। आगामी दिनों में जब तक बच्चों के स्कूल आने का समय होगा, तब तक स्थिति में काफी परिवर्तन हो चुका होगा।
- अतुल कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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