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लावारिश हैं महिलाएं, तो वार्ड के बाहर रख किया जा रहा इलाज
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अंबेडकरनगर। लगभग दस दिन पूर्व लावारिस दशा में जिला अस्पताल में भर्ती तीन महिलाओं की देखभाल पूरी तरह भगवान भरोसे है। गलियारे में लगे बेड पर तीनों को भर्ती किया गया है।
हाड़कंपाऊ ठंड से बचने के लिए उन्हें मात्र एक-एक पतला कंबल दिया गया है जबकि भोजन देने के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जा रही है। जिस बरामदे में उन्हें रखा गया है, वहां ठंडी हवा अंदर आती रहता है।
जिला अस्पताल के गलियारे में लगे तीन बेड पर दस दिनों से भर्ती तीन महिलाओं की हालत अत्यंत दयनीय है। दस दिन पूर्व पुलिस कर्मियों ने विभिन्न स्थानों से लाकर लावारिस दशा में इन्हें भर्ती कराया था। उस समय उनकी हालत अत्यंत गंभीर थी।
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अस्पताल प्रशासन ने उन्हें गलियारे में लगे बेड पर भर्ती तो कर दिया लेकिन सुचारु रूप से देखभाल करने वाला कोई नहीं है। हाड़कंपाऊ ठंड में जब हर कोई ठिठुरने को मजबूर है तो ऐसे में खुले गलियारे में पड़ी इन महिलाओं को ठंड से बचने के लिए मात्र एक-एक पतला कंबल ही दिया गया है।
महिलाओं के अनुसार दिन तो किसी प्रकार बीत जाता है लेकिन रात ठिठुरते हुए गुजारनी पड़ती है। मानसिक रूप से कमजोर महिलाएं न तो अपना नाम बता पा रही हैं और न ही घर का पता।
रविवार को जब अमर उजाला टीम उनके बेड के बगल से गुजरी तो वहां का दृश्य देखकर सन्न रह गई।
उनके बेड के निकट खाने की थाली रखी हुई थी। उसमें सिर्फ चावल था और दाल के नाम पर मात्र पीला पानी। एक थाली से खाना चारों तरफ गिरा हुआ था।
जब उनमें से एक महिला से पूछा गया तो उसने बताया कि जो मिला था उसे खाकर पेट भर लिया। क्या खाया या फिर उन्हें प्रतिदिन खाने में क्या मिलता है, इसकी जानकारी वे नहीं दे सकीं। जब ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों से बात की गई तो बताया गया कि महिलाओं का सुचारु इलाज चल रहा है।
सीएमएस डॉ. एसपी गौतम ने बताया कि लगभग दस दिन पूर्व तीनों महिलाओं को पुलिस कर्मियों ने लावारिस दशा में भर्ती कराया था। वार्ड में जगह न होने के चलते उन्हें गलियारे में भर्ती करना पड़ा। तीनों की सुचारु रूप से देखभाल की जा रही है।
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हाड़कंपाऊ ठंड से बचने के लिए उन्हें मात्र एक-एक पतला कंबल दिया गया है जबकि भोजन देने के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जा रही है। जिस बरामदे में उन्हें रखा गया है, वहां ठंडी हवा अंदर आती रहता है।
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जिला अस्पताल के गलियारे में लगे तीन बेड पर दस दिनों से भर्ती तीन महिलाओं की हालत अत्यंत दयनीय है। दस दिन पूर्व पुलिस कर्मियों ने विभिन्न स्थानों से लाकर लावारिस दशा में इन्हें भर्ती कराया था। उस समय उनकी हालत अत्यंत गंभीर थी।
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अस्पताल प्रशासन ने उन्हें गलियारे में लगे बेड पर भर्ती तो कर दिया लेकिन सुचारु रूप से देखभाल करने वाला कोई नहीं है। हाड़कंपाऊ ठंड में जब हर कोई ठिठुरने को मजबूर है तो ऐसे में खुले गलियारे में पड़ी इन महिलाओं को ठंड से बचने के लिए मात्र एक-एक पतला कंबल ही दिया गया है।
महिलाओं के अनुसार दिन तो किसी प्रकार बीत जाता है लेकिन रात ठिठुरते हुए गुजारनी पड़ती है। मानसिक रूप से कमजोर महिलाएं न तो अपना नाम बता पा रही हैं और न ही घर का पता।
रविवार को जब अमर उजाला टीम उनके बेड के बगल से गुजरी तो वहां का दृश्य देखकर सन्न रह गई।
उनके बेड के निकट खाने की थाली रखी हुई थी। उसमें सिर्फ चावल था और दाल के नाम पर मात्र पीला पानी। एक थाली से खाना चारों तरफ गिरा हुआ था।
जब उनमें से एक महिला से पूछा गया तो उसने बताया कि जो मिला था उसे खाकर पेट भर लिया। क्या खाया या फिर उन्हें प्रतिदिन खाने में क्या मिलता है, इसकी जानकारी वे नहीं दे सकीं। जब ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों से बात की गई तो बताया गया कि महिलाओं का सुचारु इलाज चल रहा है।
सीएमएस डॉ. एसपी गौतम ने बताया कि लगभग दस दिन पूर्व तीनों महिलाओं को पुलिस कर्मियों ने लावारिस दशा में भर्ती कराया था। वार्ड में जगह न होने के चलते उन्हें गलियारे में भर्ती करना पड़ा। तीनों की सुचारु रूप से देखभाल की जा रही है।