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कोटेदारों की मनमानी का खामियाजा भुगत रहे कार्डधारक

Sun, 20 Mar 2016 10:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर Updated Sun, 20 Mar 2016 10:50 PM IST
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Cardholders are suffering the brunt of arbitrary Kotedars
अनाज वितरण्‍ा में लापरवाही - फोटो : अमर उजाला
खाद्य सुरक्षा अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए शासन ने भले ही तैयारी  शुरू कर रखी हो, लेकिन कोटेदारों की मनमानी इस राह में बड़ी मुश्किल बनकर  उभरेगी।
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कारण यह कि शायद ही ऐसा कोई दिन बीतता हो, जब जिला मुख्यालय से लेकर तहसील मुख्यालयों तक पर कोटेदारों से नाराज ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन न दिखता हो। मनमानी की हद यह कि कई बार कोटा निलंबित कर दूसरे कोटे से संबद्ध कर दिया जाता है, लेकिन इसके बाद भी सुधार नहीं आ पाता।
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ऐसे में इसका खामियाजा कार्डधारकों को ही भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि जब कोटेदारों की मनमानी पर प्रभावी अंकुश नहीं लग सकेगा, तब तक यह योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकती।
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पात्रों को सुचारु रूप से  अनाज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की ओर से खाद्य सुरक्षा अधिनियम का संचालन किया जा रहा है। इसके लिए तमाम प्रकार के दिशा निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इन सबके बाद भी कोटेदारों की मनमानी का खामियाजा संबंधित लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

कहीं पात्रों को घटतौली का शिकार होना पड़ता है, तो कहीं उन्हें समुचित मात्रा में अनाज ही नहीं मिलता, तो कहीं सूची से नाम गायब होने की बात कही हाती है। अक्सर पात्र योजना के लाभ से वंचित रह जाते हैं।

शिकायतों के साथ ग्रामीण धरना  प्रदर्शन भी करते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में विभागीय अधिकारी कार्रवाई  नहीं करते। तमाम दबाव के बाद कार्रवाई के नाम पर कोटा निलंबित कर, उसे  दूसरे कोटे से संबद्ध कर दिया जाता है, लेकिन आमतौर पर समस्या जस की तस ही  रहती है।

योजना को लेकर मनमानी का आलम यह कि जिला मुख्यालय सहित  ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित लगभग 1200 कोटे की दुकान के सापेक्ष लगभग 700  कोटे ऐसे हैं, जहां नियमों के अनुसार रेट बोर्ड नहीं लगा है। नियमों के  अनुसार पात्रों को अनाज भी नहीं उपलब्ध कराया जाता। जलालपुर के  रामसजीवन व सीरतुलनिशा ने कहा कि उन्हें कभी भी समुचित मात्रा में अनाज नहीं उपलब्ध हो सका। वे कई बार इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों  से कर चुके हैं, लेकिन कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका।

भीटी के जगजीवन व  सुभाष ने कहा कि कोटेदार की मनमानी के चलते उन्हें पूरा अनाज नहीं मिलता। अब तो वे शिकायत करते करते थक चुके हैं। कोटेदार से शिकायत करते हैं, तो वह  जो अनाज मिल रहा है, उसे भी न दिए जाने की धमकी देता है। भीटी तहसील अंतर्गत काही गांव के ग्रामीणों की शिकायत पर जांच के बाद मामला सही पाए जाने पर काही कोटे को निलंबित कर उसे महापारा कोटे से जोड़ दिया गया। हालांकि स्थिति जस की तस ही रही। दो दिन पहले ही  संबंधित ग्रामीणों ने कोटेदार पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कलक्ट्रेट के  निकट प्रदर्शन किया था।

टांडा तहसील अंतर्गत हंसवर गांव के ग्रामीणों ने कोटेदार पर अनाज वितरण में मनमानी का आरोप लगाते हुए एक दिन पहले  कलेक्ट्रेट के निकट प्रदर्शन किया था। ग्रामीण रजब, जावेद, इखलाक, नाजरीन,  जीतेंद्र आदि ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए कहा था कि कोटेदार की मनमानी  के चलते योजना का समुचित लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है।


कोटेदारों की मनमानी रोकने के लिए विभाग  लगातार प्रयासरत है। निर्धारित तिथियों में राशन वितरण करने का निर्देश  है, जिससे कोटेदार मनमानी न कर सकें। इन तिथियों पर निरीक्षण भी किया जाता है। बीते दिनों कई कोटे गड़बड़ी के चलते निरस्त तक कर दिए गए हैं। आगे भी शिकायतें आईं, तो उसका संज्ञान लिया जाएगा। -उबैदुर्रहमान, जिलापूर्ति  अधिकारी
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