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200 मीटर में बना दिए छह स्पीड ब्रेकर
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Dec 2015 10:45 PM IST
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लोक निर्माण विभाग भी इसमें पीछे नहीं हैं। कई जगहों पर मनमाने ढंग से ब्रेकर बना दिए गए हैं। कई बार ये मार्ग दुर्घटना का सबब भी बन जाते हैं। इसके बाद भी इस ओर ध्यान नहीं जा पा रहा है।
स्पीड ब्रेकर गति पर रोक लगाने के लिए बनाए जाने चाहिए। पर नियमानुसार यह रोक मनमाने ढंग से नहीं लगायी जा सकती। इसके लिए बकायदा शासनादेश निर्गत है लेकिन कई बार जनप्रतिनिधियों के दबाव में तो कई बार स्थानीय स्तर पर होने वाले हंगामे को देखते हुए स्पीड ब्रेकर बना दिए जाते हैं।
प्रभावशाली लोगों द्वारा अपनी अपनी सुविधा के अनुसार स्पीड ब्रेकर बनवाने का शौक भी इस समस्या को काफी हद तक बढ़ा रहा है। कई बार कई अन्य लोगों को उपकृत करने के लिए भी स्पीड ब्रेकर बना दिए जाते हैं। मनमानी का इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि जिला मुख्यालय के शहजादपुर से अकबरपुर रेलवे स्टेशन को जो मार्ग जाता है, उस पर लगभग 200 मीटर की दूरी में छह स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं।
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वह भी इतनी ज्यादा ऊंचाई वाले कि जरा सी भी असावधानी पर बाइक सवार अनियंत्रित होकर गिर जाता है। नगर के शास्त्रीनगर कालोनी में भी 200 मीटर की दूरी में नगर पालिका परिषद ने तीन बड़े ब्रेकर बनवा दिए हैं। यहां तिराहा होने के चलते एक जगह तो ब्रेकर की जरूरत है, लेकिन अन्य दो ब्रेकरों को मनमाने तरीके से बना दिया गया है।
अकबरपुर से आजमगढ़ मार्ग पर नगर सीमा के भीतर बिजली दफ्तर के सामने तथा पटेलनगर तिराहे के निकट लोक निर्माण विभाग द्वारा बनवाए गए स्पीड ब्रेकर भी अनावश्यक ढंग से बना दिए गए हैं।
इसके अलावा अकबरपुर गौहनिया मार्ग पर स्थित शारदा सहायक नहर के पास तीन स्थानों पर बड़े बड़े ब्रेकर बने हैं। इससे वाहनों की गति में तो अवरोध जरूर पैदा होता है, लेकिन निर्माण में इस कदर लापरवाही बरती गई है कि यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
शारदा सहायक नहर पर पुलिया होने के कारण यहां सड़क की अपेक्षा वाहनों को अधिक ऊंचाई पर चढना पड़ता है। पुलिया के निकट ब्रेकर होने के चलते वाहन की स्पीड अत्यंत धीमी करनी पड़ जाती है। ऐसी स्थिति में वाहनों को ऊंचाई पर चढ़ने में दिक्कत होती है।
क्षेत्र के राममूरत व मनीराम का कहना है कि यदि लोक निर्माण विभाग को यहां ब्रेकर बनवाना ही था तो पुलिया से कम से कम दोनों तरफ 100 मीटर की दूरी पर बनना चाहिए था। इससे जहां दुर्घटनाएं कम होती, वहीं बड़े वाहनों को पुल की चढ़ाई में दिक्कत भी नहीं होती। साथ ही ब्रेकर की ऊंचाई पर भी विशेष ध्यान रखना चाहिए था।
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स्पीड ब्रेकर गति पर रोक लगाने के लिए बनाए जाने चाहिए। पर नियमानुसार यह रोक मनमाने ढंग से नहीं लगायी जा सकती। इसके लिए बकायदा शासनादेश निर्गत है लेकिन कई बार जनप्रतिनिधियों के दबाव में तो कई बार स्थानीय स्तर पर होने वाले हंगामे को देखते हुए स्पीड ब्रेकर बना दिए जाते हैं।
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प्रभावशाली लोगों द्वारा अपनी अपनी सुविधा के अनुसार स्पीड ब्रेकर बनवाने का शौक भी इस समस्या को काफी हद तक बढ़ा रहा है। कई बार कई अन्य लोगों को उपकृत करने के लिए भी स्पीड ब्रेकर बना दिए जाते हैं। मनमानी का इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि जिला मुख्यालय के शहजादपुर से अकबरपुर रेलवे स्टेशन को जो मार्ग जाता है, उस पर लगभग 200 मीटर की दूरी में छह स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं।
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वह भी इतनी ज्यादा ऊंचाई वाले कि जरा सी भी असावधानी पर बाइक सवार अनियंत्रित होकर गिर जाता है। नगर के शास्त्रीनगर कालोनी में भी 200 मीटर की दूरी में नगर पालिका परिषद ने तीन बड़े ब्रेकर बनवा दिए हैं। यहां तिराहा होने के चलते एक जगह तो ब्रेकर की जरूरत है, लेकिन अन्य दो ब्रेकरों को मनमाने तरीके से बना दिया गया है।
अकबरपुर से आजमगढ़ मार्ग पर नगर सीमा के भीतर बिजली दफ्तर के सामने तथा पटेलनगर तिराहे के निकट लोक निर्माण विभाग द्वारा बनवाए गए स्पीड ब्रेकर भी अनावश्यक ढंग से बना दिए गए हैं।
इसके अलावा अकबरपुर गौहनिया मार्ग पर स्थित शारदा सहायक नहर के पास तीन स्थानों पर बड़े बड़े ब्रेकर बने हैं। इससे वाहनों की गति में तो अवरोध जरूर पैदा होता है, लेकिन निर्माण में इस कदर लापरवाही बरती गई है कि यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
शारदा सहायक नहर पर पुलिया होने के कारण यहां सड़क की अपेक्षा वाहनों को अधिक ऊंचाई पर चढना पड़ता है। पुलिया के निकट ब्रेकर होने के चलते वाहन की स्पीड अत्यंत धीमी करनी पड़ जाती है। ऐसी स्थिति में वाहनों को ऊंचाई पर चढ़ने में दिक्कत होती है।
क्षेत्र के राममूरत व मनीराम का कहना है कि यदि लोक निर्माण विभाग को यहां ब्रेकर बनवाना ही था तो पुलिया से कम से कम दोनों तरफ 100 मीटर की दूरी पर बनना चाहिए था। इससे जहां दुर्घटनाएं कम होती, वहीं बड़े वाहनों को पुल की चढ़ाई में दिक्कत भी नहीं होती। साथ ही ब्रेकर की ऊंचाई पर भी विशेष ध्यान रखना चाहिए था।