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बसपा की सरकार में त्रिभुवनदत्त की बोलती थी तूती, मायावती ने दी थी अपनी सीट
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अंबेडकरनगर। बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए कद्दावर नेता त्रिभुवन दत्त बसपा प्रमुख मायावती के इतने करीबी थे कि वर्ष 2002 में जब मायावती मुख्यमंत्री बनी थीं तो जिस अकबरपुर लोकसभा सीट से उन्होंने त्याग पत्र दिया था, उस पर हुए उपचुनाव में ही बसपा के टिकट पर त्रिभुवनदत्त सांसद बने। गौरतलब है कि वर्ष 1999 में अकबरपुर सुरक्षित संसदीय सीट पर हुए चुनाव में मायावती सांसद चुनी गई थीं। वर्ष 2002 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने इस सीट से इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद उन्होंने अपने सबसे विश्वास पात्र बसपा नेता त्रिभुवनदत्त को उपचुनाव में टिकट दिया। वे सपा प्रत्याशी मन्नूलाल मांझी को पराजित कर सांसद बनने में सफल रहे। मायावती वर्ष 2002 में ही इसी जिले की जहांगीरगंज विधानसभा सीट से विधायक चुनी गईं। इसके बाद वर्ष 2007 में हुए चुनाव में एक बार फिर से बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी सीट पर त्रिभुवनदत्त को टिकट थमाया। वे विधायक बनने में कामयाब भी हुए। बसपा ने उन्हें कई प्रमुख जोन का कोऑर्डिनेटर भी बनाया था।
यूपी के बाहर भी उन्हें प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई। बसपा सरकारों के दौरान त्रिभुवनदत्त की तूती बोलती थी। मंत्री न होते हुए भी उनका कद जिले से बने मंत्रियों से बड़ा माना जाता था। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संगठन की होने वाली बैठकों में बसपा के मंत्री, सांसद या विधायक उनके आवास पर जाकर ही जरूरी मंत्रणा करते थे। संगठन में उनकी पकड़ काफी गहरे तक थी। जिले में बसपा के शुरुआती दौर से ही जुड़े रहे त्रिभुवन को संगठन का शिल्पकार माना जाता रहा।
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इसके बाद उन्होंने अपने सबसे विश्वास पात्र बसपा नेता त्रिभुवनदत्त को उपचुनाव में टिकट दिया। वे सपा प्रत्याशी मन्नूलाल मांझी को पराजित कर सांसद बनने में सफल रहे। मायावती वर्ष 2002 में ही इसी जिले की जहांगीरगंज विधानसभा सीट से विधायक चुनी गईं। इसके बाद वर्ष 2007 में हुए चुनाव में एक बार फिर से बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी सीट पर त्रिभुवनदत्त को टिकट थमाया। वे विधायक बनने में कामयाब भी हुए। बसपा ने उन्हें कई प्रमुख जोन का कोऑर्डिनेटर भी बनाया था।
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यूपी के बाहर भी उन्हें प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई। बसपा सरकारों के दौरान त्रिभुवनदत्त की तूती बोलती थी। मंत्री न होते हुए भी उनका कद जिले से बने मंत्रियों से बड़ा माना जाता था। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संगठन की होने वाली बैठकों में बसपा के मंत्री, सांसद या विधायक उनके आवास पर जाकर ही जरूरी मंत्रणा करते थे। संगठन में उनकी पकड़ काफी गहरे तक थी। जिले में बसपा के शुरुआती दौर से ही जुड़े रहे त्रिभुवन को संगठन का शिल्पकार माना जाता रहा।
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