{"_id":"66e9b9592d5e3046780f4914","slug":"boat-had-to-be-launched-in-two-more-villages-350-bigha-fields-submerged-ambedkar-nagar-news-c-91-1-slko1002-121382-2024-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: दो और गांव में चलानी पड़ी नाव, 350 बीघा खेत जलमग्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: दो और गांव में चलानी पड़ी नाव, 350 बीघा खेत जलमग्न
Tue, 17 Sep 2024 10:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 17 Sep 2024 10:46 PM IST
विज्ञापन
राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। सरयू नदी के खतरे के निशान से ऊपर पहुंचते ही मंगलवार को हंसू का पूरा व करिया लोनिया का पूरा संपर्कमार्ग भी पूरी तरह जलमग्न हो गया। इससे यहां भी ग्रामीणों के आवागमन के लिए नाव का संचालन करना पड़ा। दो गांवों में पहले से ही नाव चलाई जा रही है। पटपरवा व बद्रीनाथ का पूरा में जहां छप्परनुमा घर व पशुशाला में बाढ़ का पानी पहुंच गया तो माझा कम्हरिया व अराजी देवारा के दो दर्जन मजरे बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर गए हैं। पानी से लगभग 350 बीघा खेत जलमग्न हो गया। इससे संबंधित किसानों के सामने धान की फसल को बचाने की चिंता खड़ी हो गई।
सरयू नदी का जलस्तर सोमवार देर शाम छह बजे ही खतरे के लाल निशान 85.56 मीटर से ऊपर पहुंच गया था। जलस्तर में वृद्धि का दौर मंगलवार को भी जारी रहा। नतीजा यह हुआ कि हंसू का पूरा व करिया लोनिया का पूरा संपर्क मार्ग भी जलमग्न हो गया। इससे संबंधित मजरे के लोगों के आवागमन के लिए नाव का संचालन शुरू कर दिया गया। एक दिन पहले सोमवार को प्रसाद कुर्मी का पूरा व पटपरवा संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूब गया था। ऐसे में यहां एक दिन पहले ही नाव का संचालन शुरू हो गया था।
तेजी से बढ़ते जलस्तर के बीच पटपरवा निवासी रामबचन के छप्परनुमा घर में बाढ़ का पानी पहुंच गया। इससे उन्हें परिवार के साथ गांव के अंदर स्थित दूसरे घर में जाना पड़ा। बद्रीनाथ का पूरा स्थित एक पशुशाला में भी बाढ़ का पानी घुस गया। माझा कम्हरिया व अराजी देवारा ग्राम पंचायत के पटपरवा, हंसू का पूरा, करिया लोनिया का पूरा, बद्रीनाथ का पूरा, सत्यनरायन का पूरा, रग्घू का पूरा, प्रसाद कुर्मी का पूरा, सिद्धनाथ, नौका का पूरा समेत 12 मजरे बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर गए। माना जा रहा है कि जलस्तर में बढ़ोतरी बनी रही तो जल्द ही इन मजरों के अंदर तक पानी पहुंच जाएगा।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
सक्रिय हुए स्वास्थ्य शिविर
बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड में आ गया है। मंगलवार को दर्शननगर बंधा के निकट व माझा कम्हरिया स्थित हेल्थ वेलनेस सेंटर में स्वास्थ्य शिविर को सक्रिय कर दिया गया। चिकित्सकों व कर्मचारियों की तैनाती के साथ ही पर्याप्त दवाएं भी उपलब्ध करा दी गईं। इसके साथ ही ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच शुरू कर दी गई। साथ ही संचारी रोगों से निपटने को लेकर भी जागरूक करना प्रारंभ कर दिया गया। इसके साथ ही माझा कम्हरिया में भी पशु चिकित्सा शिविर भी स्थापित कर दिया गया। पशुपालकों को पशुओं को इस बीच बीमारियों से बचाने के टिप्स भी मंगलवार को दिए गए।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
फसल को लेकर बढ़ी चिंता
तेजी से बढ़े जलस्तर के बीच लगभग 350 बीघा खेत पूरी तरह से जलमग्न हो गए। धान की फसल डूबने से संबंधित किसानों के सामने उपज को बचाने की चिंता बढ़ गई। पटपरवा के चिरैता, राजेश निषाद, कल्लू का पूरा के श्रीनाथ, राधेश्याम, बद्रीप्रसाद, ने कहा कि जिस प्रकार से धान की फसल पूरी तरह से डूब गई है उसे देखते हुए अब उसे बचा पाना मुश्किल लग रहा है। यदि फसल बर्बाद होती है तो इससे बड़ी आर्थिक चपत लग सकती है। करिया लोनिया का पूरा निवासी संतोष, राम सहाय ने कहा कि पहले कटान ने नुकसान पहुंचाया ओर अब खेत में भरा बाढ़ का पानी फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। खेतों में पानी भर जाने से पशुओं के लिए चारे का भी संकट खड़ा हो गया है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
बढ़ाई जाए नाव की संख्या
सामाजिक कार्यकर्ता मित्रसेन ने कहा कि माझा कम्हरिया व अराजी देवारा ग्राम पंचायत के एक दर्जन से अधिक मजरे बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इससे ग्रामीणों को दिक्कत बढ़ी है। इसे देखते हुए नाव की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। कम से कम एक दर्जन नाव का संचालन हो तब ग्रामीणों को ज्यादा सुविधा मिल सकेगी। मौजूदा समय में जो नाव संचालित हैं वह अपर्याप्त साबित हो रही हैं। इसके साथ ही पशुओं के चारे की भी व्यवस्था की जाए।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
उपलब्ध कराई जा रहीं सुविधाएं
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने पहुंचे एसडीएम आलापुर सुभाष सिंह ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पांडेय का पूरा स्थित प्राथमिक विद्यालय को बाढ़ चौकी के रूप में स्थापित कर दिया गया है। इसके साथ ही पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था भी की जा रही है।
विज्ञापन
सरयू नदी का जलस्तर सोमवार देर शाम छह बजे ही खतरे के लाल निशान 85.56 मीटर से ऊपर पहुंच गया था। जलस्तर में वृद्धि का दौर मंगलवार को भी जारी रहा। नतीजा यह हुआ कि हंसू का पूरा व करिया लोनिया का पूरा संपर्क मार्ग भी जलमग्न हो गया। इससे संबंधित मजरे के लोगों के आवागमन के लिए नाव का संचालन शुरू कर दिया गया। एक दिन पहले सोमवार को प्रसाद कुर्मी का पूरा व पटपरवा संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूब गया था। ऐसे में यहां एक दिन पहले ही नाव का संचालन शुरू हो गया था।
विज्ञापन
तेजी से बढ़ते जलस्तर के बीच पटपरवा निवासी रामबचन के छप्परनुमा घर में बाढ़ का पानी पहुंच गया। इससे उन्हें परिवार के साथ गांव के अंदर स्थित दूसरे घर में जाना पड़ा। बद्रीनाथ का पूरा स्थित एक पशुशाला में भी बाढ़ का पानी घुस गया। माझा कम्हरिया व अराजी देवारा ग्राम पंचायत के पटपरवा, हंसू का पूरा, करिया लोनिया का पूरा, बद्रीनाथ का पूरा, सत्यनरायन का पूरा, रग्घू का पूरा, प्रसाद कुर्मी का पूरा, सिद्धनाथ, नौका का पूरा समेत 12 मजरे बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर गए। माना जा रहा है कि जलस्तर में बढ़ोतरी बनी रही तो जल्द ही इन मजरों के अंदर तक पानी पहुंच जाएगा।
विज्ञापन
सक्रिय हुए स्वास्थ्य शिविर
बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड में आ गया है। मंगलवार को दर्शननगर बंधा के निकट व माझा कम्हरिया स्थित हेल्थ वेलनेस सेंटर में स्वास्थ्य शिविर को सक्रिय कर दिया गया। चिकित्सकों व कर्मचारियों की तैनाती के साथ ही पर्याप्त दवाएं भी उपलब्ध करा दी गईं। इसके साथ ही ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच शुरू कर दी गई। साथ ही संचारी रोगों से निपटने को लेकर भी जागरूक करना प्रारंभ कर दिया गया। इसके साथ ही माझा कम्हरिया में भी पशु चिकित्सा शिविर भी स्थापित कर दिया गया। पशुपालकों को पशुओं को इस बीच बीमारियों से बचाने के टिप्स भी मंगलवार को दिए गए।
फसल को लेकर बढ़ी चिंता
तेजी से बढ़े जलस्तर के बीच लगभग 350 बीघा खेत पूरी तरह से जलमग्न हो गए। धान की फसल डूबने से संबंधित किसानों के सामने उपज को बचाने की चिंता बढ़ गई। पटपरवा के चिरैता, राजेश निषाद, कल्लू का पूरा के श्रीनाथ, राधेश्याम, बद्रीप्रसाद, ने कहा कि जिस प्रकार से धान की फसल पूरी तरह से डूब गई है उसे देखते हुए अब उसे बचा पाना मुश्किल लग रहा है। यदि फसल बर्बाद होती है तो इससे बड़ी आर्थिक चपत लग सकती है। करिया लोनिया का पूरा निवासी संतोष, राम सहाय ने कहा कि पहले कटान ने नुकसान पहुंचाया ओर अब खेत में भरा बाढ़ का पानी फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। खेतों में पानी भर जाने से पशुओं के लिए चारे का भी संकट खड़ा हो गया है।
बढ़ाई जाए नाव की संख्या
सामाजिक कार्यकर्ता मित्रसेन ने कहा कि माझा कम्हरिया व अराजी देवारा ग्राम पंचायत के एक दर्जन से अधिक मजरे बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इससे ग्रामीणों को दिक्कत बढ़ी है। इसे देखते हुए नाव की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। कम से कम एक दर्जन नाव का संचालन हो तब ग्रामीणों को ज्यादा सुविधा मिल सकेगी। मौजूदा समय में जो नाव संचालित हैं वह अपर्याप्त साबित हो रही हैं। इसके साथ ही पशुओं के चारे की भी व्यवस्था की जाए।
उपलब्ध कराई जा रहीं सुविधाएं
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने पहुंचे एसडीएम आलापुर सुभाष सिंह ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पांडेय का पूरा स्थित प्राथमिक विद्यालय को बाढ़ चौकी के रूप में स्थापित कर दिया गया है। इसके साथ ही पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था भी की जा रही है।