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बदहाली से जूझ रहे आंगनबाड़ी केंद्र
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अंबेडकरनगर। छह वर्ष आयु वर्ग तक के बच्चे भी शुरुआती पढ़ाई कर सकें, इसके लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र विभिन्न प्रकार की अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। मात्र 451 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास ही अपना भवन है। शेष केंद्र या तो किराए के भवन में संचालित हैं या फिर परिषदीय विद्यालय व पंचायत भवन में जैसे-तैसे चल रहे हैं। 38 केंद्र ऐसे हैं, जो लंबे समय से किराए के भवन में संचालित हैं। इन केंद्रों पर पंजीकृत एक लाख 49 हजार 860 बच्चों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत नौनिहाल टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। उन्हें कुर्सी या बेंच नहीं उपलब्ध कराई जा सकी है।
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना तो कर दी गई, लेकिन इन केंद्रों पर पंजीकृत बच्चे व गर्भवती और धात्री को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बताते चलें कि जिले में कुल 2551 आंगनबाड़ी व मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर कुल एक लाख 49 हजार 860 बच्चे, जबकि 35139 गर्भवती व धात्री पंजीकृत हैं। पंजीकृत बच्चों व गर्भवती तथा धात्री को केंद्र का कितना लाभ मिल पा रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मात्र 421 आंगनबाड़ी केंद्रोें को ही अपना भवन उपलब्ध है। शेष केंद्र या तो परिषदीय विद्यालय में संचालित हैं या फिर किराए के भवन में चल रहे हैं। विभाग के अनुसार 37 केंद्र किराए के भवन में संचालित हैं, जबकि शेष परिषदीय विद्यालय के अलावा पंचायत भवन में संचालित हो रहे हैं। अव्यवस्था का आलम यह है कि लगभग 30 प्रतिशत बच्चों को बैठने के लिए कुर्सी या बेंच नहीं है। ऐसे में उन्हें टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। गुरुवार को अमर उजाला टीम ने विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लिया, तो कई केंद्रों पर बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ते मिले।
आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचे चंद बच्चे
प्राथमिक विद्यालय अफजलपुर में मौजूदा समय में विजयगांव बरवां का आंगनबाड़ी केंद्र व श्रीनाथपुर का मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। जगह के अभाव में विद्यालय के बरामदे में संचालन हो रहा है। दोनों केंद्र पर कुल 81 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन गुरुवार को 15 बच्चे ही उपस्थित रहे। इसी प्रकार 16 गर्भवती व 17 धात्री भी पंजीकृत हैं। विजयगांव की आंगनबाड़ी कर्मचारी साधना मिश्रा ने बताया कि उनके केंद्र पर सहायिका का पद रिक्त चल रहा है। अव्यवस्था का आलम यह है कि यहां बच्चों को टाट-पट्टी पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। मिनी आंगनबाड़ी की कर्मचारी मंजू यादव ने कहा कि अपना भवन न होने के चलते प्राथमिक विद्यालय में केंद्र चलाने को मजबूर होना पड़ रहा है। गुरुवार को विजयगांव केंद्र के 9, जबकि श्रीनाथपुर के 6 बच्चे ही उपस्थित मिले।
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टाट-पट्टी पर बैठकर करनी पढ़ती पढ़ाई
अपना भवन न होने के चलते इस परिषदीय विद्यालय में भी दो आंगनबाड़ी केंद्र एक साथ संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के बच्चे तो कक्षों में शिक्षा हासिल कर रहे थे, लेकिन उनके बैठने के लिए यहां भी टाट-पट्टी की ही व्यवस्था थी। इस विद्यालय में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र प्रथम की कर्मचारी शहाना परवीन ने कहा कि केंद्र पर कुल 37 बच्चे, गर्भवती व धात्री 11 पंजीकृत हैं। गुरुवार को 6 बच्चे उपस्थित थे। आंगनबाड़ी केंद्र दो की कर्मचारी लता मिश्रा ने कहा कि 38 बच्चे पंजीकृत हैं, जबकि गर्भवती व धात्री 12 पंजीकृत हैं। दोनों ही कर्मचारियों ने बताया कि शत-प्रतिशत उपस्थिति हो सके, इसके लिए अभिभावकों से मिलकर उन्हें प्रेरित किया जा रहा है।
केंद्र नहीं पहुंच रहे पर्याप्त नौनिहाल
स्थान-आंगनबाड़ी केंद्र दायमपुर
अपने भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र दायमपुर में कुल 50 बच्चे पंजीकृत हैं। गुरुवार को 20 बच्चे उपस्थित मिले। अमर उजाला टीम जब इस केंद्र पर पहुंची, तो आंगनबाड़ी कर्मचारी जयंती व सहायिका प्रेमलता बच्चों को पढ़ाती मिलीं। जयंती ने कहा कि शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करने के लिए अभिभावकों से मुलाकात की जा रही है। पंजीकृत बच्चों को किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
नहीं नसीब हो सका अपना भवन
स्थान-आंगनबाड़ी केंद्र वाजिदपुर
आंगनबाड़ी केंद्र वाजिदपुर को को अब तक अपना भवन नहीं नसीब हो सका है। इस केंद्र में पंजीकृत 117 बच्चों को प्राथमिक विद्यालय वाजिदपुर में शिक्षा हासिल करने को मजबूर होना पड़ रहा है। गुरुवार को जब अमर उजाला टीम इस केंद्र पर पहुंची, तो मात्र 22 बच्चे ही उपस्थित मिले। आंगनबाड़ी कर्मचारी अनीता वर्मा व सहायिका मनभावती ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से शिक्षा दी जा रही है। शत-प्रतिशत बच्चे उपस्थित हो सकें, इसके लिए उनके अभिभावकों से मुलाकात कर उन्हेें प्रेरित किया जा रहा है। कहा कि केंद्र पर 117 बच्चों के अलावा 18 गर्भवती व धात्री पंजीकृत हैं।
की जा रहीं जरूरी व्यवस्थाएं
आंगनबाड़ी केंद्रों पर फिलहाल सप्ताह में दो दिन बच्चों की उपस्थिति तय हो रही है। कोरोना प्रोटोकाल का पालन पूरी तरह सुनिश्चित कराया जा रहा है। बच्चों को बेहतर सुविधा दिलाने की सभी व्यवस्था सुनिश्चित हो रही है।
-दिनेश कुमार मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना तो कर दी गई, लेकिन इन केंद्रों पर पंजीकृत बच्चे व गर्भवती और धात्री को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बताते चलें कि जिले में कुल 2551 आंगनबाड़ी व मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर कुल एक लाख 49 हजार 860 बच्चे, जबकि 35139 गर्भवती व धात्री पंजीकृत हैं। पंजीकृत बच्चों व गर्भवती तथा धात्री को केंद्र का कितना लाभ मिल पा रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मात्र 421 आंगनबाड़ी केंद्रोें को ही अपना भवन उपलब्ध है। शेष केंद्र या तो परिषदीय विद्यालय में संचालित हैं या फिर किराए के भवन में चल रहे हैं। विभाग के अनुसार 37 केंद्र किराए के भवन में संचालित हैं, जबकि शेष परिषदीय विद्यालय के अलावा पंचायत भवन में संचालित हो रहे हैं। अव्यवस्था का आलम यह है कि लगभग 30 प्रतिशत बच्चों को बैठने के लिए कुर्सी या बेंच नहीं है। ऐसे में उन्हें टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। गुरुवार को अमर उजाला टीम ने विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लिया, तो कई केंद्रों पर बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ते मिले।
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आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचे चंद बच्चे
प्राथमिक विद्यालय अफजलपुर में मौजूदा समय में विजयगांव बरवां का आंगनबाड़ी केंद्र व श्रीनाथपुर का मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। जगह के अभाव में विद्यालय के बरामदे में संचालन हो रहा है। दोनों केंद्र पर कुल 81 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन गुरुवार को 15 बच्चे ही उपस्थित रहे। इसी प्रकार 16 गर्भवती व 17 धात्री भी पंजीकृत हैं। विजयगांव की आंगनबाड़ी कर्मचारी साधना मिश्रा ने बताया कि उनके केंद्र पर सहायिका का पद रिक्त चल रहा है। अव्यवस्था का आलम यह है कि यहां बच्चों को टाट-पट्टी पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। मिनी आंगनबाड़ी की कर्मचारी मंजू यादव ने कहा कि अपना भवन न होने के चलते प्राथमिक विद्यालय में केंद्र चलाने को मजबूर होना पड़ रहा है। गुरुवार को विजयगांव केंद्र के 9, जबकि श्रीनाथपुर के 6 बच्चे ही उपस्थित मिले।
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टाट-पट्टी पर बैठकर करनी पढ़ती पढ़ाई
अपना भवन न होने के चलते इस परिषदीय विद्यालय में भी दो आंगनबाड़ी केंद्र एक साथ संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के बच्चे तो कक्षों में शिक्षा हासिल कर रहे थे, लेकिन उनके बैठने के लिए यहां भी टाट-पट्टी की ही व्यवस्था थी। इस विद्यालय में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र प्रथम की कर्मचारी शहाना परवीन ने कहा कि केंद्र पर कुल 37 बच्चे, गर्भवती व धात्री 11 पंजीकृत हैं। गुरुवार को 6 बच्चे उपस्थित थे। आंगनबाड़ी केंद्र दो की कर्मचारी लता मिश्रा ने कहा कि 38 बच्चे पंजीकृत हैं, जबकि गर्भवती व धात्री 12 पंजीकृत हैं। दोनों ही कर्मचारियों ने बताया कि शत-प्रतिशत उपस्थिति हो सके, इसके लिए अभिभावकों से मिलकर उन्हें प्रेरित किया जा रहा है।
केंद्र नहीं पहुंच रहे पर्याप्त नौनिहाल
स्थान-आंगनबाड़ी केंद्र दायमपुर
अपने भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र दायमपुर में कुल 50 बच्चे पंजीकृत हैं। गुरुवार को 20 बच्चे उपस्थित मिले। अमर उजाला टीम जब इस केंद्र पर पहुंची, तो आंगनबाड़ी कर्मचारी जयंती व सहायिका प्रेमलता बच्चों को पढ़ाती मिलीं। जयंती ने कहा कि शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करने के लिए अभिभावकों से मुलाकात की जा रही है। पंजीकृत बच्चों को किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
नहीं नसीब हो सका अपना भवन
स्थान-आंगनबाड़ी केंद्र वाजिदपुर
आंगनबाड़ी केंद्र वाजिदपुर को को अब तक अपना भवन नहीं नसीब हो सका है। इस केंद्र में पंजीकृत 117 बच्चों को प्राथमिक विद्यालय वाजिदपुर में शिक्षा हासिल करने को मजबूर होना पड़ रहा है। गुरुवार को जब अमर उजाला टीम इस केंद्र पर पहुंची, तो मात्र 22 बच्चे ही उपस्थित मिले। आंगनबाड़ी कर्मचारी अनीता वर्मा व सहायिका मनभावती ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से शिक्षा दी जा रही है। शत-प्रतिशत बच्चे उपस्थित हो सकें, इसके लिए उनके अभिभावकों से मुलाकात कर उन्हेें प्रेरित किया जा रहा है। कहा कि केंद्र पर 117 बच्चों के अलावा 18 गर्भवती व धात्री पंजीकृत हैं।
की जा रहीं जरूरी व्यवस्थाएं
आंगनबाड़ी केंद्रों पर फिलहाल सप्ताह में दो दिन बच्चों की उपस्थिति तय हो रही है। कोरोना प्रोटोकाल का पालन पूरी तरह सुनिश्चित कराया जा रहा है। बच्चों को बेहतर सुविधा दिलाने की सभी व्यवस्था सुनिश्चित हो रही है।
-दिनेश कुमार मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी