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हौसलों की तरह बुलंद हैं मेधावी छात्र-छात्राओं के सपने
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फोटो 15, अंबेडकरनगर कलेक्ट्रेट में डीएम राकेश कुमार मिश्र से सवाल जवाब करतीं मेधावी छात्राएं।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। अमर उजाला के मेधावी सम्मान समारोह में पुरस्कृत होने वाले मेधावियों के सपने भी उनके हौसले की तरह बड़े हैं। कठिन परिस्थितियों में भी घंटों की पढ़ाई करने वाले हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के यह मेधावी इंजीनियर से लेकर डाक्टर और सिविल सेवा के जरिए आईएएस बनने का सपना संजो रखा है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि डीएम राकेश कुमार मिश्र के हाथों सम्मानित होकर मेधावियों व उनके परिनारीजनों के चेहरे फिर से खिल उठे। कोविड 19 के मानक का पूरी तरह पालन करते हुए आयोजित कार्यक्रम में डीएम के हाथों सम्मानित होने का मौका मिलने को लेकर छात्र छात्राओं ने अपनी खुशी का इजहार भी किया। साथ आए परिवारीजनों ने इस पल को मोबाइल कैमरे में अलग अलग एंगल से कैद भी किया। अमर उजाला टीम ने मेधावियों से बात की तो उनके सपने कुछ इस रूप में ऊभर कर सामने आए।
इंटरमीडिएट परीक्षा में 89.2 प्रतिशत अंक हासिल कर जिला टॉप करने वाली इटरौरा निवासी अन्नू यादव इंजीनियर बनना चाहती हैं। अन्नू कहती हैं कि वह प्रतिदिन 6 से 7 घंटे तक पढ़ाई करती है। बगैर कोचिंग के टॉप करने वाली अन्नू जेईई मेंस क्वालीफाई कर चुकी हैं। हाईस्कूल में जिले में सातवें स्थान पर रहने वाली अन्नू कहती हैं कि यदि लक्ष्य लेकर पढ़ाई की जाए, तो सफलता जरूर हासिल होती है। छात्र-छात्राओं से अपील करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए।
इंटरमीडिएट परीक्षा में जिले की टॉप टेन की सूची में दूसरा स्थान पाने वाली शहजादपुर निवासी मारिया फात्मा नीट की ग्रेजुएशन के साथ ही नीट की तैयारी कर रही हैं। मारिया कहती हैं कि उन्होंने शुरू से ही तय कर लिया था कि इस बार परीक्षा में टॉप करना है। बगैर कहीं कोचिंग व ट्यूशन क्लास किए प्रतिदिन 6 से 7 घ्ज्ञंटे पढ़ाई करते थे। सिर्फ एक ही लक्ष्य था कि टॉप करना है। इसमें सफलता भी मिली। अब अगला लक्ष्य चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करने का है।
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88 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉप टेन की सूची में संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर कब्जा जमाने वाली चित्रांशी सिविल सेवा में जाना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी है। चित्रांशी का कहना है कि किसी भी प्रकार की सफलता हासिल करने के लिए संसाधन की जरूरत नहीं होती। सिर्फ दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए। साथ ही लक्ष्य के साथ आगे बढना होगा।
इंटरमीडिएट टॉप टेन में तीसरे स्थान पर कब्जा जमाने वाले निखिल कुमार सिंह इंजीनियर बनना चाहते हैं। कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे उनके पिता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि निखिल इसके लिए लगातार परिश्रम भी कर रहा है। यदि किसी कारण बस वह इस क्षेत्र में नहीं जा पाता है तो वह स्नातक की शिक्षा ग्रहण कर सिविल सेवा में करियर बनाएगा।
हाईस्कूल परीक्षा में टॉप टेन में पहला स्थान हासिल करने वाली आंचल यादव ने कभी कोई कोचिंग नहीं की। सेल्फ स्टडी ही करती थी। आंचल कहती हैं कि वह प्रतिदिन 6 घंटा पढ़ाई करती थी। आईएएस बन समाज की सेवा करने का सपना देखने वाली आंचल ने कहा कि वह शुरू से ही परीक्षा की पूरी गंभीरता से तैयारी कर रही थी। इसी का नतीजा रहा कि परीक्षा के दौरान अधिक दबाव नहीं था। इसका परिणाम यह निकला कि टॉप टेन सूची में स्थान मिला।
टॉप टेन सूची में दूसरा स्थान पाने वाली साक्षी मौर्या ने अमर उजाला फाउंडेशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अमर उजाला ने सदैव प्रतिभाओं को निखारने व उन्हें सम्मानित करने का कार्य किया। आईएएस बन समाज की सेवा करने वाली साक्षी ने कहा कि उन्होंने एक लक्ष्य का निार्धारण कर रखा था कि टॉप टेन सूची में स्थान लाना है। कोई कोचिंग व ट्यूशन क्लास मैंने नहीं लिया। सिर्फ खुद से ही पढ़ाई करते थे। यदि कहीं कोई समस्या होती थी, तो संबंधित विषय के शिक्षक से संपर्क करते थे। इसी का परिणाम रहा कि मुझे इतनी बड़ी सफलता मिली।
हाईस्कूल परीक्षा में तीसरा स्थान पाने वाले शिवम वर्मा चिकित्सक बनकर समाज व देश की सेवा करना चाहते हैं। बगैर किसी कोचिंग व ट्यूशन क्लास के सफलता हासिल करने वाले शिवम कहते हैं कि उन्होंने सदैव खुद से ही पढ़ाई की। इसमें उनके पिता भी सहयोग करते थे। प्रतिदिन 6 घंटा पढ़ाई करते थे। इसी का नतीजा रहा कि उन्हें इतनी बड़ी सफलता मिली। अमर उजाला का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें गर्व महसूस हो रहा है कि अमर उजाला फाउंडेशन के चलते ही उन्हें जिलाधिकारी के हाथों सम्मानित होने का मौका मिला।
अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में प्रतिभा सम्मान समारोह में सम्मानित होने के बाद मेधावी जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र के पास पहुंच गए। एक एक कर सवालों की बौछार कर दी। जेईई मेंस क्वालीफाई करने वाली अन्नू ने आईएएस बनने के लिए होने वाली तैयारियों के बारे में जानकारी चाही तो जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने अत्यंत व्यस्तता के बावजूद रुककर अन्नू को टिप्स दिए। कहा कि जितनी भी देर पढ़ाई करो, पूरी तरह मन लगाकर करो। आईएएस बनने के लिए जो विषय चुनो, उस पर पूरी तरह कमांड होना चाहिए। चित्रांशी ने जब डीएम से पूछा कि वह कितनी देर पढ़ाई करते थे, तो डीएम ने हंसते हुए जवाब दिया कि वह जब पढने बैठते थे, तो समय नहीं देखते थे। जब पढने का मन नहीं करता था, तो जबरदस्ती बैठते भी नहीं थे। जिलाधिकारी ने सभी मेधावियों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी बड़ी सफलता को हासिल करने के लिए अनुशासित होना जरूरी है।
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इंटरमीडिएट परीक्षा में 89.2 प्रतिशत अंक हासिल कर जिला टॉप करने वाली इटरौरा निवासी अन्नू यादव इंजीनियर बनना चाहती हैं। अन्नू कहती हैं कि वह प्रतिदिन 6 से 7 घंटे तक पढ़ाई करती है। बगैर कोचिंग के टॉप करने वाली अन्नू जेईई मेंस क्वालीफाई कर चुकी हैं। हाईस्कूल में जिले में सातवें स्थान पर रहने वाली अन्नू कहती हैं कि यदि लक्ष्य लेकर पढ़ाई की जाए, तो सफलता जरूर हासिल होती है। छात्र-छात्राओं से अपील करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए।
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इंटरमीडिएट परीक्षा में जिले की टॉप टेन की सूची में दूसरा स्थान पाने वाली शहजादपुर निवासी मारिया फात्मा नीट की ग्रेजुएशन के साथ ही नीट की तैयारी कर रही हैं। मारिया कहती हैं कि उन्होंने शुरू से ही तय कर लिया था कि इस बार परीक्षा में टॉप करना है। बगैर कहीं कोचिंग व ट्यूशन क्लास किए प्रतिदिन 6 से 7 घ्ज्ञंटे पढ़ाई करते थे। सिर्फ एक ही लक्ष्य था कि टॉप करना है। इसमें सफलता भी मिली। अब अगला लक्ष्य चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करने का है।
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88 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉप टेन की सूची में संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर कब्जा जमाने वाली चित्रांशी सिविल सेवा में जाना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी है। चित्रांशी का कहना है कि किसी भी प्रकार की सफलता हासिल करने के लिए संसाधन की जरूरत नहीं होती। सिर्फ दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए। साथ ही लक्ष्य के साथ आगे बढना होगा।
इंटरमीडिएट टॉप टेन में तीसरे स्थान पर कब्जा जमाने वाले निखिल कुमार सिंह इंजीनियर बनना चाहते हैं। कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे उनके पिता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि निखिल इसके लिए लगातार परिश्रम भी कर रहा है। यदि किसी कारण बस वह इस क्षेत्र में नहीं जा पाता है तो वह स्नातक की शिक्षा ग्रहण कर सिविल सेवा में करियर बनाएगा।
हाईस्कूल परीक्षा में टॉप टेन में पहला स्थान हासिल करने वाली आंचल यादव ने कभी कोई कोचिंग नहीं की। सेल्फ स्टडी ही करती थी। आंचल कहती हैं कि वह प्रतिदिन 6 घंटा पढ़ाई करती थी। आईएएस बन समाज की सेवा करने का सपना देखने वाली आंचल ने कहा कि वह शुरू से ही परीक्षा की पूरी गंभीरता से तैयारी कर रही थी। इसी का नतीजा रहा कि परीक्षा के दौरान अधिक दबाव नहीं था। इसका परिणाम यह निकला कि टॉप टेन सूची में स्थान मिला।
टॉप टेन सूची में दूसरा स्थान पाने वाली साक्षी मौर्या ने अमर उजाला फाउंडेशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अमर उजाला ने सदैव प्रतिभाओं को निखारने व उन्हें सम्मानित करने का कार्य किया। आईएएस बन समाज की सेवा करने वाली साक्षी ने कहा कि उन्होंने एक लक्ष्य का निार्धारण कर रखा था कि टॉप टेन सूची में स्थान लाना है। कोई कोचिंग व ट्यूशन क्लास मैंने नहीं लिया। सिर्फ खुद से ही पढ़ाई करते थे। यदि कहीं कोई समस्या होती थी, तो संबंधित विषय के शिक्षक से संपर्क करते थे। इसी का परिणाम रहा कि मुझे इतनी बड़ी सफलता मिली।
हाईस्कूल परीक्षा में तीसरा स्थान पाने वाले शिवम वर्मा चिकित्सक बनकर समाज व देश की सेवा करना चाहते हैं। बगैर किसी कोचिंग व ट्यूशन क्लास के सफलता हासिल करने वाले शिवम कहते हैं कि उन्होंने सदैव खुद से ही पढ़ाई की। इसमें उनके पिता भी सहयोग करते थे। प्रतिदिन 6 घंटा पढ़ाई करते थे। इसी का नतीजा रहा कि उन्हें इतनी बड़ी सफलता मिली। अमर उजाला का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें गर्व महसूस हो रहा है कि अमर उजाला फाउंडेशन के चलते ही उन्हें जिलाधिकारी के हाथों सम्मानित होने का मौका मिला।
अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में प्रतिभा सम्मान समारोह में सम्मानित होने के बाद मेधावी जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र के पास पहुंच गए। एक एक कर सवालों की बौछार कर दी। जेईई मेंस क्वालीफाई करने वाली अन्नू ने आईएएस बनने के लिए होने वाली तैयारियों के बारे में जानकारी चाही तो जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने अत्यंत व्यस्तता के बावजूद रुककर अन्नू को टिप्स दिए। कहा कि जितनी भी देर पढ़ाई करो, पूरी तरह मन लगाकर करो। आईएएस बनने के लिए जो विषय चुनो, उस पर पूरी तरह कमांड होना चाहिए। चित्रांशी ने जब डीएम से पूछा कि वह कितनी देर पढ़ाई करते थे, तो डीएम ने हंसते हुए जवाब दिया कि वह जब पढने बैठते थे, तो समय नहीं देखते थे। जब पढने का मन नहीं करता था, तो जबरदस्ती बैठते भी नहीं थे। जिलाधिकारी ने सभी मेधावियों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी बड़ी सफलता को हासिल करने के लिए अनुशासित होना जरूरी है।