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Ambedkar Nagar News: दो दिन रहेगा अक्षय तृतीया पर्व का योग
Sat, 22 Apr 2023 12:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 22 Apr 2023 12:13 AM IST
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अंबेडकरनगर। अक्षय तृतीया का पर्व इस बार दो दिन मनेगा। शनिवार व रविवार दोनों दिन श्रद्धालु पूजन-अर्चन कर सकेंगे। इस पर्व को लेकर सराफा बाजार में भी उत्साह का माहौल है। इस दिन सोने के जेवर खरीदने की परंपरा है। सराफा कारोबारियों को अच्छे व्यापार की उम्मीद है।
आचार्य आशुतोष जी महाराज बताते हैं कि अक्षय तृतीया का दिन काफी शुभ व मंगलकारी है। इस दिन सच्चे मन से किया गया जप, तप, दान, पुण्य विफल नहीं होते। इस बार अक्षय तृतीया का पर्व दो दिन मनेगा। शनिवार 22 अप्रैल को सुबह 08:03 बजे से शुुरू होगा और 23 अप्रैल रविवार को सुबह 08:06 मिनट तक रहेगा। रविवार को उदया तिथि में अक्षय तृतीया होने के चलते इस दिन भी श्रद्धालु पूजन-अर्चन के साथ ही बाजारों में पहुंचकर आभूषणों की खरीदारी कर सकेंगे।
आचार्य बताते हैं कि इस शुभ दिन भगवान परशुराम व मां अन्नपूर्णा के जन्म की मान्यता है। इस तिथि को मां भगवती गंगा के धरावतरण दिवस के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन को ही भगवान शिव से कुबेर को खजाना मिला था। मान्यता है कि सतयुग व त्रेता युग का प्रारंभ इस दिन से हुआ था। सखा के रूप में भगवान कृष्ण व सुदामा का मिलन भी इस दिन हुआ था। इस दिन नए काम की शुरुआत करना भी काफी अच्छा होता है। तृतीया तिथि में प्रदोष काल 22 अप्रैल को रहेगा इसके चलते भगवान परशुराम की जयंती शनिवार को मनेगी।
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आचार्य आशुतोष जी महाराज बताते हैं कि अक्षय तृतीया का दिन काफी शुभ व मंगलकारी है। इस दिन सच्चे मन से किया गया जप, तप, दान, पुण्य विफल नहीं होते। इस बार अक्षय तृतीया का पर्व दो दिन मनेगा। शनिवार 22 अप्रैल को सुबह 08:03 बजे से शुुरू होगा और 23 अप्रैल रविवार को सुबह 08:06 मिनट तक रहेगा। रविवार को उदया तिथि में अक्षय तृतीया होने के चलते इस दिन भी श्रद्धालु पूजन-अर्चन के साथ ही बाजारों में पहुंचकर आभूषणों की खरीदारी कर सकेंगे।
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आचार्य बताते हैं कि इस शुभ दिन भगवान परशुराम व मां अन्नपूर्णा के जन्म की मान्यता है। इस तिथि को मां भगवती गंगा के धरावतरण दिवस के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन को ही भगवान शिव से कुबेर को खजाना मिला था। मान्यता है कि सतयुग व त्रेता युग का प्रारंभ इस दिन से हुआ था। सखा के रूप में भगवान कृष्ण व सुदामा का मिलन भी इस दिन हुआ था। इस दिन नए काम की शुरुआत करना भी काफी अच्छा होता है। तृतीया तिथि में प्रदोष काल 22 अप्रैल को रहेगा इसके चलते भगवान परशुराम की जयंती शनिवार को मनेगी।
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