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Ambedkar Nagar News: अकबरपुर डिपो की बसें बनीं शोपीस, रोडवेज को तगड़ा घाटा
Tue, 07 Oct 2025 01:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 07 Oct 2025 01:14 AM IST
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अकबरपुर डिपो में खड़ी रोडवेज बसें।
अंबेडकरनगर। अकबरपुर डिपो की रोडवेज बसें यात्रियों के अभाव में स्टैंड पर धूल फांक रही हैं। दशहरे जैसे बड़े त्योहार में भी यात्रियों की संख्या में कोई खास इजाफा नहीं हुआ। आलम यह है कि डिपो की 106 बसों में से आधी भी रोजाना सड़क पर नहीं उतर पा रहीं। इसका सीधा असर राजस्व पर पड़ रहा है।
अकबरपुर डिपो से हर रोज करीब छह हजार यात्री ही विभिन्न रूटों पर सफर कर रहे हैं। इनमें लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, बस्ती और आजमगढ़ जैसे प्रमुख शहरों के यात्री शामिल हैं। कई बसों में सिर्फ 15 से 20 सवारियों के साथ गंतव्य की ओर रवाना होना मजबूरी बन चुका है।
लोड फैक्टर लगातार घटता जा रहा है। औसतन एक बस का लोड फैक्टर 33 प्रतिशत से नीचे पहुंच चुका है। कुछ परिचालकों ने तो 35 से 40 प्रतिशत तक ही राजस्व जमा किया है। बीते रक्षाबंधन के मौके पर जब तीन दिन महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई थी, तब भीड़ उमड़ी थी। उस दौरान पुरुष यात्रियों ने भी बढ़-चढ़कर सफर किया था। लेकिन त्योहार के बाद एक बार फिर वही पुरानी स्थिति लौट आई है।
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चालक-परिचालकों की भी कमी
डिपो में चालक और परिचालकों की भारी कमी भी सामने आई है। यही वजह है कि 106 बसों के बेड़े में से हर दिन आधे से भी कम बसें ही संचालन में आ पा रही हैं। खाली बसें न सिर्फ संसाधनों की बर्बादी कर रही हैं, बल्कि विभाग की आय पर भी सीधा असर डाल रही हैं।
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वर्जन
बसों को बीच रास्ते में कुछ सवारियां जरूर मिल रही हैं, लेकिन इससे लोड फैक्टर में कोई बड़ा सुधार नहीं हो रहा है। यात्री संख्या बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। - हरिओम श्रीवास्तव, एआरएम, अकबरपुर डिपो
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अकबरपुर डिपो से हर रोज करीब छह हजार यात्री ही विभिन्न रूटों पर सफर कर रहे हैं। इनमें लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, बस्ती और आजमगढ़ जैसे प्रमुख शहरों के यात्री शामिल हैं। कई बसों में सिर्फ 15 से 20 सवारियों के साथ गंतव्य की ओर रवाना होना मजबूरी बन चुका है।
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लोड फैक्टर लगातार घटता जा रहा है। औसतन एक बस का लोड फैक्टर 33 प्रतिशत से नीचे पहुंच चुका है। कुछ परिचालकों ने तो 35 से 40 प्रतिशत तक ही राजस्व जमा किया है। बीते रक्षाबंधन के मौके पर जब तीन दिन महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई थी, तब भीड़ उमड़ी थी। उस दौरान पुरुष यात्रियों ने भी बढ़-चढ़कर सफर किया था। लेकिन त्योहार के बाद एक बार फिर वही पुरानी स्थिति लौट आई है।
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चालक-परिचालकों की भी कमी
डिपो में चालक और परिचालकों की भारी कमी भी सामने आई है। यही वजह है कि 106 बसों के बेड़े में से हर दिन आधे से भी कम बसें ही संचालन में आ पा रही हैं। खाली बसें न सिर्फ संसाधनों की बर्बादी कर रही हैं, बल्कि विभाग की आय पर भी सीधा असर डाल रही हैं।
वर्जन
बसों को बीच रास्ते में कुछ सवारियां जरूर मिल रही हैं, लेकिन इससे लोड फैक्टर में कोई बड़ा सुधार नहीं हो रहा है। यात्री संख्या बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। - हरिओम श्रीवास्तव, एआरएम, अकबरपुर डिपो