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कृषि कानून को वापस लिया जाए
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अंबेडकरनगर कलेक्ट्रेट के निकट विभिन्न समस्याओं को लेकर धरने पर बैठे राष्ट्रीय किसान मजदूर पदाध?
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट के निकट बैठक की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि कृषि कानून को वापस लिए जाने को लेकर किसान आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्या का निस्तारण करने की बजाय उनका उत्पीड़न कर रही है। यह अत्यंत निंदनीय है। कहा कि कृषि कानून को जल्द वापस लिया जाए। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही कृषि कानून को वापस नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष हजारीबाबा ने कहा कि देश के अन्नदाता मुश्किलों में हैं। केंद्र सरकार ने जो कृषि कानून लागू किए हैं, वह किसानों के लिए अत्यंत घातक हैं। इससे किसानों का अपना कुछ भी नहीं रहेगा। मेहनत मजदूरी कर किसान खेतों में फसल तैयार करेगा, लेकिन उपज के मूल्य का निर्धारण पूंजीपतियों की ओर से किया जाएगा। इससे दिक्कतों से जूझ रहे किसानों की मुश्किलें और भी बढ़ जाएंगी।
किसान अपने हक को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार उनकी सुनने की बजाय उनका उत्पीड़न कर रही है। उनकी आवाज को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कतई उचित नहीं है।
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वक्ताओं ने कहा कि सरकार लगातार सरकारी विभागों का निजीकरण करने में लगी है। ऐसा कर वह पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रही है। खेतों में खड़ी फसल को आवारा पशु नष्ट कर रहे हैं। खाद-बीज के लिए किसान इधर-उधर भटक रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों का निस्तारण नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस मौके पर सियाराम, सायरा बानो, भजराम, मीना, दयाराम, फूलकली, बरसाती, जलधारी आदि मौजूद रहे।
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बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष हजारीबाबा ने कहा कि देश के अन्नदाता मुश्किलों में हैं। केंद्र सरकार ने जो कृषि कानून लागू किए हैं, वह किसानों के लिए अत्यंत घातक हैं। इससे किसानों का अपना कुछ भी नहीं रहेगा। मेहनत मजदूरी कर किसान खेतों में फसल तैयार करेगा, लेकिन उपज के मूल्य का निर्धारण पूंजीपतियों की ओर से किया जाएगा। इससे दिक्कतों से जूझ रहे किसानों की मुश्किलें और भी बढ़ जाएंगी।
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किसान अपने हक को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार उनकी सुनने की बजाय उनका उत्पीड़न कर रही है। उनकी आवाज को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कतई उचित नहीं है।
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वक्ताओं ने कहा कि सरकार लगातार सरकारी विभागों का निजीकरण करने में लगी है। ऐसा कर वह पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रही है। खेतों में खड़ी फसल को आवारा पशु नष्ट कर रहे हैं। खाद-बीज के लिए किसान इधर-उधर भटक रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों का निस्तारण नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस मौके पर सियाराम, सायरा बानो, भजराम, मीना, दयाराम, फूलकली, बरसाती, जलधारी आदि मौजूद रहे।