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Ambedkar Nagar News: आवास दिलाने के नाम पर 30 लाख की ठगी का आरोप
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हजपुरा(अंबेडकरनगर)। सरकारी आवास दिलाने का झांसा देकर गरीब महिलाओं के नाम पर विभिन्न बैंकों से करीब 30 लाख रुपये का ऋण लेकर रकम हड़पने का मामला सामने आया है। बैंक से ऋण की किस्त जमा करने के नोटिस मिलने पर पीड़ित महिलाओं को पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी हुई। मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
महिलाओं का आरोप है कि सम्मनपुर थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर गांव निवासी अंजली गुप्ता स्वयं सहायता समूह का संचालन करती थीं। उनके समूह में सिकंदरपुर और नटवलिया गांव की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं शामिल थीं। अंजली ने सरकारी आवास दिलाने का भरोसा देकर महिलाओं से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, फोटो सहित अन्य जरूरी दस्तावेज जमा कराए।
पीड़ितों का आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा, मिनी बैंक सहित विभिन्न बैंकों से महिलाओं के नाम पर आवास ऋण स्वीकृत कराया गया। किसी के नाम पर एक लाख, किसी के नाम पर 50 हजार तो किसी के नाम पर डेढ़ लाख रुपये का ऋण पास कराया गया। इस तरह करीब 30 लाख रुपये का लोन स्वीकृत हुआ। महिलाओं के अनुसार पूछने पर अंजली ने कहा कि पहले पूरी धनराशि एक खाते में आएगी फिर सभी के खातों में भेज दी जाएगी। इसके बाद पूरी रकम अपने बेटे आयुष गुप्ता के खाते में ट्रांसफर करा ली।
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मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक कर्मचारियों ने महिलाओं से ऋण की किस्त जमा करने के लिए संपर्क किया और उनके घर नोटिस भेजे। बैंक पहुंचकर जानकारी लेने पर महिलाओं को पता चला कि उनके नाम पर लाखों रुपये का ऋण स्वीकृत है, जबकि उन्हें इसकी भनक तक नहीं थी और न ही कोई धनराशि मिली थी।
पीड़ित महिलाओं ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। थानाध्यक्ष दिनेश सिंह ने बताया कि मामले की लिखित शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। बैंक अभिलेखों, ऋण स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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महिलाओं का आरोप है कि सम्मनपुर थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर गांव निवासी अंजली गुप्ता स्वयं सहायता समूह का संचालन करती थीं। उनके समूह में सिकंदरपुर और नटवलिया गांव की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं शामिल थीं। अंजली ने सरकारी आवास दिलाने का भरोसा देकर महिलाओं से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, फोटो सहित अन्य जरूरी दस्तावेज जमा कराए।
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पीड़ितों का आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा, मिनी बैंक सहित विभिन्न बैंकों से महिलाओं के नाम पर आवास ऋण स्वीकृत कराया गया। किसी के नाम पर एक लाख, किसी के नाम पर 50 हजार तो किसी के नाम पर डेढ़ लाख रुपये का ऋण पास कराया गया। इस तरह करीब 30 लाख रुपये का लोन स्वीकृत हुआ। महिलाओं के अनुसार पूछने पर अंजली ने कहा कि पहले पूरी धनराशि एक खाते में आएगी फिर सभी के खातों में भेज दी जाएगी। इसके बाद पूरी रकम अपने बेटे आयुष गुप्ता के खाते में ट्रांसफर करा ली।
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मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक कर्मचारियों ने महिलाओं से ऋण की किस्त जमा करने के लिए संपर्क किया और उनके घर नोटिस भेजे। बैंक पहुंचकर जानकारी लेने पर महिलाओं को पता चला कि उनके नाम पर लाखों रुपये का ऋण स्वीकृत है, जबकि उन्हें इसकी भनक तक नहीं थी और न ही कोई धनराशि मिली थी।
पीड़ित महिलाओं ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। थानाध्यक्ष दिनेश सिंह ने बताया कि मामले की लिखित शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। बैंक अभिलेखों, ऋण स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।