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लेखाधिकारी को ही पता नहीं जिले में हैं कितने परिषदीय विद्यालय
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अंबेडकरनगर। बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात लेखाधिकारी को यह ही नहीं पता कि जिले में कुल कितने विद्यालय संचालित हैं। सोमवार को डीएम राकेश कुमार मिश्र ने औचक निरीक्षण किया, तो वे डीएम के सवाल पर यह जानकारी नहीं दे सके। जून व जुलाई माह में शिक्षकों को वेतन दिए जाने में अंतर पाए जाने पर दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
अनुदानित प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के रिकॉर्ड को लेकर भी लापरवाही देखने को मिली। डीएम ने लेखाधिकारी को कार्यशैली में सुधार लाने का निर्देश देने के साथ ही निर्देशित किया कि अनुदानित विद्यालयों में शिक्षकों के वेतन आहरण की सूचना अविलंब उपलब्ध कराई जाए।
डीएम राकेश कुमार मिश्र ने सोमवार को बीएसए कार्यालय में औचक निरीक्षण किया। वे भवन के प्रथम तल पर पहुंचे और वहां मिले वित्त एवं लेखाधिकारी अशोक कुमार सिंह से परिषदीय विद्यालयों की संख्या के बारे में पूछा। वे इसकी जानकारी नहीं दे सके। उनके लेखाकार योगेंद्रनाथ त्रिपाठी को भी यह जानकारी नहीं थी। जून व जुलाई माह में शिक्षकों के वेतन संबंधित आंकड़ों की छानबीन डीएम ने किया, तो इसमें अंतर पाया गया। इस बारे में तत्काल कोई समुचित उत्तर न दे पाने पर डीएम ने अविलंब अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। वेतन भुगतान से संबंधित पत्रावली भी डीएम के सामने प्रस्तुत नहीं की जा सकी।
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सहायता प्राप्त व अनुदानित उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर भी पूरी सूचना उपलब्ध नहीं थी। डीएम ने इस पर ऐसे 81 विद्यालयों में नियुक्त हुए शिक्षकों के वेतन आहरण की सूचना जल्द से जल्द उपलब्ध कराने को कहा। अनुदानित विद्यालयों की ग्रांड पंजिका का अवलोकन एवं प्रमाणीकरण सक्षम अधिकारी द्वारा नहीं किया गया। पत्रावलियों के रखरखाव को लेकर भी पूरी तरह लापरवाही व मनमानी का माहौल दिखा, जिस पर जिलाधिकारी ने कड़ी फटकार लगाई।
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अनुदानित प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के रिकॉर्ड को लेकर भी लापरवाही देखने को मिली। डीएम ने लेखाधिकारी को कार्यशैली में सुधार लाने का निर्देश देने के साथ ही निर्देशित किया कि अनुदानित विद्यालयों में शिक्षकों के वेतन आहरण की सूचना अविलंब उपलब्ध कराई जाए।
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डीएम राकेश कुमार मिश्र ने सोमवार को बीएसए कार्यालय में औचक निरीक्षण किया। वे भवन के प्रथम तल पर पहुंचे और वहां मिले वित्त एवं लेखाधिकारी अशोक कुमार सिंह से परिषदीय विद्यालयों की संख्या के बारे में पूछा। वे इसकी जानकारी नहीं दे सके। उनके लेखाकार योगेंद्रनाथ त्रिपाठी को भी यह जानकारी नहीं थी। जून व जुलाई माह में शिक्षकों के वेतन संबंधित आंकड़ों की छानबीन डीएम ने किया, तो इसमें अंतर पाया गया। इस बारे में तत्काल कोई समुचित उत्तर न दे पाने पर डीएम ने अविलंब अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। वेतन भुगतान से संबंधित पत्रावली भी डीएम के सामने प्रस्तुत नहीं की जा सकी।
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सहायता प्राप्त व अनुदानित उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर भी पूरी सूचना उपलब्ध नहीं थी। डीएम ने इस पर ऐसे 81 विद्यालयों में नियुक्त हुए शिक्षकों के वेतन आहरण की सूचना जल्द से जल्द उपलब्ध कराने को कहा। अनुदानित विद्यालयों की ग्रांड पंजिका का अवलोकन एवं प्रमाणीकरण सक्षम अधिकारी द्वारा नहीं किया गया। पत्रावलियों के रखरखाव को लेकर भी पूरी तरह लापरवाही व मनमानी का माहौल दिखा, जिस पर जिलाधिकारी ने कड़ी फटकार लगाई।