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मतदाताओं की निष्पक्षता से बनती बेहतर सरकार
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अंबेडकरनगर कलेक्ट्रेट के निकट आयोजित वोटर अड्डा कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। देश व समाज को बेहतर सरकार देने की जिम्मेदारी मतदाताओं की होती है। ऐसे में मतदाताओं को अपने मताधिकार के महत्व को समझने की जरूरत है। हमें स्वयं निष्पक्ष्ता, निडरता के साथ मतदान करना होगा। मतदाताओं को ऐसे प्रत्याशी को मतदान करना चाहिए जो उनके सुख-दुख में भागीदार होने के साथ ही क्षेत्र व समाज के विकास की तरफ ध्यान दे। हमारा जनप्रतिनिधि शिक्षित, सुलभ व सहज होना चाहिए। यह विचार रविवार को अमर उजाला की ओर से टांडा रोड पर कलेक्ट्रेट के निकट आयोजित वोटर अड्डा में मतदाताओं ने रखे। कहा कि आम नागरिकों को लोकतंत्र में मताधिकार के महत्व को समझने की जरूरत है। हमें जाति, धर्म, संप्रदाय, क्षेत्रवाद आदि से ऊपर उठकर बेहतर प्रत्याशी को अपना जनप्रतिनिधि चुनना होगा। जब हम निष्पक्षता के साथ मतदान करेंगे तो निश्चित तौर पर हमें बेहतर जनप्रतिनिधि मिलेगा और वह सड़क से सदन तक हमारे संघर्ष करेगा।
महिलाओं को मिले सुरक्षा व सम्मान
महिलाओं को सुरक्षा व सम्मान दिए जाने को लेकर जनप्रतिनिधि दावे तो खूब करते हैं, लेकिन वास्तव में इसे जमीनी हकीकत देने के लिए कभी कोई गंभीरता नहीं दिखाई जाती। महिला हिंसा के मामलों में कमी नहीं आ रही है। आए दिन विभिन्न प्रकार की हिंसा का शिकार महिलाएं हो रही हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि महिलाओं को समुचित सुरक्षा देने के साथ ही सम्मान भी दें।
-शीला
महिलाओं को दिलाएं योजनाओं का लाभ
महिला सशक्तिकरण को लेकर दावे तो बढ़-चढ़कर किए जाते हैं, लेकिन इसे जमीनी हकीकत देने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई जाती। महिला सशक्तिकरण को लेकर विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित हैं, लेकिन इन योजनाओं का समुचित लाभ महिलाओं को मिल नहीं पा रहा है। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि योजनाओं का समुचित लाभ दिलाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करें।
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-चमेला
महिला शिक्षा पर दिया जाए जोर
महिला शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए। महिला शिक्षा को लेकर दावे तो बढ़-चढ़कर किए जाते हैं, लेकिन इसे लेकर कभी भी जनप्रतिनिधियों द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई जाती है। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर कॉलेज व विश्वविद्यालय की स्थापना की जानी चाहिए। इसके अलावा तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने को लेकर भी गंभीरता दिखानी होगी।
-भानुमती
महिलाएं पुरषोें से किसी भी मायने में कम नहीं
महिलाएं पुरुषों से किसी भी मायने में कम नहीं हैं। मौजूदा समय में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। एक तरफ जहां महिलाएं हवाई जहाज उड़ा रही हैं, तो वहीं ट्रेन भी चला रही हैं। आईएएस व आईपीएस बनकर देश की सेवा कर रही हैं, तो खेल के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। ऐसे में महिलाओं को उचित सम्मान के साथ साथ समुचित स्थान भी दिया जाना चाहिए।
-पुष्पा
राजनीति में दिया जाए आरक्षण
महिलाओं को राजनीति में आरक्षण दिए जाने की बातें सभी राजनीतिक दल तो करते हैं, लेकिन जब आरक्षण दिए जाने का समय आता है, तो सभी पीछे हट जाते हैं। राजनीति में महिलाओं को कम से कम 50 प्रतिशत आरक्षण जरूर दिया जाना चाहिए। ऐसा होने से ही महिलाओं को उनका समुचित अधिकार मिल सकेगा।
-अनुपम रंजन
महिलाओं की उपेक्षा न की जाए
भारत में महिलाओं को लक्ष्मी का रूप माना जाता है। देवी रूपी महिलाओं को जिस प्रकार से सम्मान मिलना चाहिए, वह मिल नहीं पा रहा है। चुनावी माहौल में महिलाओं के उत्थान के बारे में बढ़-चढ़कर बातें की जाती हैं, लेकिन जब चुनाव समाप्त हो जाता है, तो महिलाओं के उत्थान के लिए किए जाने वाले वादों को भुला दिया जाता है। इस प्रकार की उपेक्षा सही नहीं है। जनप्रतिनिधियों को महिलाओं को लेकर गंभीर होना होगा।
-निर्मला
महिलाओं को मिलने चाहिए अधिकार
महिलाएं समाज का आइना होती हैं। इन पर दो परिवार को संवारने की जिम्मेदारी है। ऐसे में महिलाओं को पूरी तरह से सशक्त होने की आवश्यकता है। महिलाओं को लेकर बातें तो बढ़-चढ़कर की जाती है, लेकिन महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने को लेकर कभी किसी भी जनप्रतिनिधि ने गंभीरता नहीं दिखाई। महिलाओं की इस प्रकार की उपेक्षा उचित नहीं है। महिलाओं को उनका अधिकार मिलना ही चाहिए। जनप्रतिनिधियों को इसे लेकर अब पूरी तरह से गंभीर होना ही होगा।
-मालती देवी
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महिलाओं को मिले सुरक्षा व सम्मान
महिलाओं को सुरक्षा व सम्मान दिए जाने को लेकर जनप्रतिनिधि दावे तो खूब करते हैं, लेकिन वास्तव में इसे जमीनी हकीकत देने के लिए कभी कोई गंभीरता नहीं दिखाई जाती। महिला हिंसा के मामलों में कमी नहीं आ रही है। आए दिन विभिन्न प्रकार की हिंसा का शिकार महिलाएं हो रही हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि महिलाओं को समुचित सुरक्षा देने के साथ ही सम्मान भी दें।
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-शीला
महिलाओं को दिलाएं योजनाओं का लाभ
महिला सशक्तिकरण को लेकर दावे तो बढ़-चढ़कर किए जाते हैं, लेकिन इसे जमीनी हकीकत देने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई जाती। महिला सशक्तिकरण को लेकर विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित हैं, लेकिन इन योजनाओं का समुचित लाभ महिलाओं को मिल नहीं पा रहा है। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि योजनाओं का समुचित लाभ दिलाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करें।
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-चमेला
महिला शिक्षा पर दिया जाए जोर
महिला शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए। महिला शिक्षा को लेकर दावे तो बढ़-चढ़कर किए जाते हैं, लेकिन इसे लेकर कभी भी जनप्रतिनिधियों द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई जाती है। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर कॉलेज व विश्वविद्यालय की स्थापना की जानी चाहिए। इसके अलावा तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने को लेकर भी गंभीरता दिखानी होगी।
-भानुमती
महिलाएं पुरषोें से किसी भी मायने में कम नहीं
महिलाएं पुरुषों से किसी भी मायने में कम नहीं हैं। मौजूदा समय में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। एक तरफ जहां महिलाएं हवाई जहाज उड़ा रही हैं, तो वहीं ट्रेन भी चला रही हैं। आईएएस व आईपीएस बनकर देश की सेवा कर रही हैं, तो खेल के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। ऐसे में महिलाओं को उचित सम्मान के साथ साथ समुचित स्थान भी दिया जाना चाहिए।
-पुष्पा
राजनीति में दिया जाए आरक्षण
महिलाओं को राजनीति में आरक्षण दिए जाने की बातें सभी राजनीतिक दल तो करते हैं, लेकिन जब आरक्षण दिए जाने का समय आता है, तो सभी पीछे हट जाते हैं। राजनीति में महिलाओं को कम से कम 50 प्रतिशत आरक्षण जरूर दिया जाना चाहिए। ऐसा होने से ही महिलाओं को उनका समुचित अधिकार मिल सकेगा।
-अनुपम रंजन
महिलाओं की उपेक्षा न की जाए
भारत में महिलाओं को लक्ष्मी का रूप माना जाता है। देवी रूपी महिलाओं को जिस प्रकार से सम्मान मिलना चाहिए, वह मिल नहीं पा रहा है। चुनावी माहौल में महिलाओं के उत्थान के बारे में बढ़-चढ़कर बातें की जाती हैं, लेकिन जब चुनाव समाप्त हो जाता है, तो महिलाओं के उत्थान के लिए किए जाने वाले वादों को भुला दिया जाता है। इस प्रकार की उपेक्षा सही नहीं है। जनप्रतिनिधियों को महिलाओं को लेकर गंभीर होना होगा।
-निर्मला
महिलाओं को मिलने चाहिए अधिकार
महिलाएं समाज का आइना होती हैं। इन पर दो परिवार को संवारने की जिम्मेदारी है। ऐसे में महिलाओं को पूरी तरह से सशक्त होने की आवश्यकता है। महिलाओं को लेकर बातें तो बढ़-चढ़कर की जाती है, लेकिन महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने को लेकर कभी किसी भी जनप्रतिनिधि ने गंभीरता नहीं दिखाई। महिलाओं की इस प्रकार की उपेक्षा उचित नहीं है। महिलाओं को उनका अधिकार मिलना ही चाहिए। जनप्रतिनिधियों को इसे लेकर अब पूरी तरह से गंभीर होना ही होगा।
-मालती देवी