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निधि की रकम खर्च करने में कंजूसी

Sat, 31 Jan 2015 05:30 AM IST
AmbedkarNagar
AmbedkarNagar Updated Sat, 31 Jan 2015 05:30 AM IST
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अंबेडकरनगर। चुनाव के दौरान विकास के बढ़-चढ़कर तमाम दावे करने वाले जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में विकास को लेकर ही उदासीन बने हुए हैं। डेढ़ करोड़ रुपये की निधि के धन का विकास कार्यों में खर्च करने को लेकर कंजूसी बरतने का आलम यह है कि कटेहरी व आलापुर विधायक एक चौथाई रकम भी नहीं खर्च कर सके हैं। धन खर्च करने में जलालपुर व टांडा विधायकों ने जरूर दरियादिली दिखाई है। अब जबकि चालू वित्तीय वर्ष समाप्त होने में मात्र दो माह ही शेष रह गए हैं, ऐसे में निधि की पूरी रकम को किस प्रकार से विकास कार्यों में खर्च किया जा सकेगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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क्षेत्र में विकास को गति प्रदान करने एवं आम जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विधायक निधि में प्रत्येक वित्तीय वर्ष में डेढ़ करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके बावजूद चुनाव के दौरान विकास कार्यों को लेकर बढ़-चढ़कर दावे करने वाले माननीय चुनाव जीतने के बाद आमजन को आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने से अधिकांशत: मुंह मोड़ लेते हैं। जो राशि क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए उन्हें मिलती है, उसे खर्च करने में ही न जाने क्यों वह कंजूसी दिखा रहे हैं। आम जनता के हितों व क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर इन माननीयों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कटेहरी व आलापुर विधायक एक चौथाई रकम भी नहीं खर्च कर सके हैं। इसमें कटेहरी विधायक शंखलाल मांझी प्रदेश के स्वास्थ्य राज्यमंत्री भी हैं।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार टांडा एमएलए अजीमुलहक पहलवान ने अपनी निधि से एक करोड़ 30 लाख रुपये 68 परियोजनाओं में खर्च किए हैं। इसी प्रकार जलालपुर विधायक शेरबहादुर सिंह ने 53 परियोजनाओं में कुल एक करोड़ 14 लाख 45 हजार रुपये खर्च किए हैं। अकबरपुर विधायक व दुग्ध विकास मंत्री राममूर्ति मिश्र ने 51 परियोजनाओं में एक करोड़ तीन लाख 86 हजार रुपये खर्च किए हैं। निधि का धन खर्च करने में सबसे फिसड्डी कटेहरी व आलापुर के विधायक रहे। कटेहरी एमएलए व स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी ने चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 16 परियोजनाओं में मात्र 19 लाख रुपये ही खर्च किए, जबकि आलापुर विधायक भीमप्रसाद सोनकर 11 परियोजनाआें में मात्र 35 लाख 68 हजार रुपये ही खर्च कर सके हैं। इन आंकड़ों को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने एवं विकास कार्यों को गति प्रदान करने के लिए यह माननीय कितने गंभीर हैं।
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