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37 करोड़ बकाया, मनरेगा का कामकाज ठप

Fri, 17 Jun 2022 11:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jun 2022 11:09 PM IST
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37 crore outstanding, MNREGA work stalled
अंबेडकरनगर के ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत ठप पड़ा है पक्का कार्य-संवाद - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। सामग्री की राशि न मिलने से जिले की 902 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत कार्य लगभग पूरी तरह से ठप है। वर्ष 2020-21 में योजना के तहत कराए गए कार्य में लगी सामग्रियों का 37 करोड़ 19 लाख 28 हजार रुपये शासन से जिलेे को अब तक उपलब्ध नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि कार्य न होने से दो लाख से अधिक मनरेगा मजदूरों के समक्ष विभिन्न प्रकार की आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। मजबूर होकर संबंधित मजदूरों को अब अन्यत्र मजदूरी करनी पड़ रही है।
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जिले की 902 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना से जुड़े दो लाख 15 हजार मजदूर मौजूदा समय में आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। कारण यह कि पिछले आठ माह से मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायतों में पक्का कार्य लगभग पूरी तरह से ठप है। दरअसल योजना के तहत सामग्रियों के लिए राशि शासन से जिले को नहीं उपलब्ध हो सकी है। पिछले लगभग आठ माह से राशि न मिलने से अब जिम्मेदार किसी भी प्रकार का कार्य कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। वर्ष 2020-21 से अब तक जो पक्का कार्य कराया गया, उसमें 37 करोड़ 19 लाख 28 हजार रुपये खर्च हुए। इस राशि का भुगतान भी नहीं हो सका है। इसका नतीजा है कि अब पिछले आठ माह से ग्राम पंचायतों में पक्का कार्य नहीं हो रहा है।
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मनरेगा उपायुक्त कार्यालय के अनुसार अकबरपुर विकास खंड में 498.13 लाख, बसखारी में 105.36 लाख, भीटी 433.64 लाख, बसखारी में 684.84 लाख, जहांगीरगंज में 386.71 लाख, जलालपुर में 234.14 लाख, कटेहरी में 380.50 लाख, रामनगर में 466.6 लाख रुपये व टांडा विकास खंड में 529.35 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो सका है। ऐसे में बकाया भुगतान न होने से पक्का काम नहीं हो रहा है। इसके स्थान पर कच्चा काम ही किया जा रहा है। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा मनरेगा मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। सुचारु रूप से काम नहीं मिलने के चलते अब मनरेगा मजदूर अन्यत्र मजदूरी करने को मजबूर हो रहे हैं।
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बोले प्रधान, अब नहीं मिल रही उधार सामग्री
नाम न छापने की शर्त पर अकबरपुर विकास खंड के ग्राम प्रधानों ने कहा कि किसी प्रकार से वे योजना के तहत पक्का काम करा रहे थे। वर्ष 2020-21 से अब तक लगभग आठ माह बीतने को हैं, लेकिन शासन से राशि नहीं मिल सकी है। अब तो उधार भी सामान नहीं मिल रहा है। इसके चलते पक्का काम नहीं हो पा रहा है। कच्चे काम से ही काम चलाया जा रहा है। प्रधान संघ से जुड़े एक पदाधिकारी ने कहा कि बकाया भुगतान के लिए कई बार जिम्मेदारों से शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी। ऐसे में योजना के तहत कार्य कराना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। आगामी दिनों में बारिश का महीना है। इसके चलते जिन ग्राम पंचायतों में कच्चे काम हो भी रहे हैं, वह भी बंद हो जाएंगे।

शीघ्र खाते में पहुंचेगी राशि
योजना के तहत कराए गए कार्य का जो बकाया है, उस संबंध में शासन को अवगत करा दिया गया है। उम्मीद है कि शीघ्र ही शासन से जिसका बकाया है, उस दुकानदार के खाते में राशि भेज दी जाएगी। -राजेंद्र प्रसाद मिश्र, मनरेगा उपायुक्त
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