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Ambedkar Nagar News: गांव-गांव डिजिटल बैंकिंग पहुंचाएंगी 173 नई बीसी सखियां
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.विकास भवन परिसर स्थित एनआरएलएम कार्यालय।संवाद
अंबेडकरनगर। गांव की महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं को घर-घर तक पहुंचाने की दिशा में जिले में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत 173 नई बीसी सखियों के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। चयनित महिलाओं का पुलिस सत्यापन शुरू हो गया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनके सक्रिय होने से जिले में ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं का नेटवर्क और मजबूत होगा।
चयनित बीसी सखियों को जिले के अग्रणी बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में उन्हें बैंकिंग लेनदेन, डिजिटल बैंकिंग और ग्राहकों को उपलब्ध कराई जाने वाली विभिन्न सेवाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही बैंक की ओर से तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि बीसी सखियां डिजिटल माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं आसानी से उपलब्ध करा सकें।
एनआरएलएम की ओर से प्रत्येक चयनित बीसी सखी को लैपटॉप, टैबलेट और अन्य आवश्यक उपकरण खरीदने के लिए 75 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। यह ऋण चार प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर दिया जाएगा। उपकरणों की मदद से बीसी सखियां गांवों में ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम होंगी और ग्रामीणों को छोटी-छोटी बैंकिंग जरूरतों के लिए शाखाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिलेगी राहत
बीसी सखियों के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं ग्रामीणों के घर और गांव के नजदीक पहुंचेंगी। इससे खासकर बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों को बैंक शाखा तक जाने की परेशानी कम होगी। खाते से धन निकासी, जमा और अन्य डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने से ग्रामीणों को समय और श्रम की बचत होगी।
पहले से 709 बीसी सखियां सक्रिय
जिले में वर्तमान में 709 बीसी सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इनमें कई बीसी सखियां प्रतिदिन तीन से चार लाख रुपये तक का लेनदेन करा रही हैं। इससे उन्हें प्रतिमाह करीब 25 से 30 हजार रुपये तक की आय हो रही है। ऐसे में 173 नई बीसी सखियों के जुड़ने से जिले में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और व्यापक होगी। नई बीसी सखियों के चयन से महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलने के साथ नियमित आय का जरिया भी बनेगा।
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चयनित बीसी सखियों को जिले के अग्रणी बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में उन्हें बैंकिंग लेनदेन, डिजिटल बैंकिंग और ग्राहकों को उपलब्ध कराई जाने वाली विभिन्न सेवाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही बैंक की ओर से तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि बीसी सखियां डिजिटल माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं आसानी से उपलब्ध करा सकें।
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एनआरएलएम की ओर से प्रत्येक चयनित बीसी सखी को लैपटॉप, टैबलेट और अन्य आवश्यक उपकरण खरीदने के लिए 75 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। यह ऋण चार प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर दिया जाएगा। उपकरणों की मदद से बीसी सखियां गांवों में ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम होंगी और ग्रामीणों को छोटी-छोटी बैंकिंग जरूरतों के लिए शाखाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिलेगी राहत
बीसी सखियों के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं ग्रामीणों के घर और गांव के नजदीक पहुंचेंगी। इससे खासकर बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों को बैंक शाखा तक जाने की परेशानी कम होगी। खाते से धन निकासी, जमा और अन्य डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने से ग्रामीणों को समय और श्रम की बचत होगी।
पहले से 709 बीसी सखियां सक्रिय
जिले में वर्तमान में 709 बीसी सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इनमें कई बीसी सखियां प्रतिदिन तीन से चार लाख रुपये तक का लेनदेन करा रही हैं। इससे उन्हें प्रतिमाह करीब 25 से 30 हजार रुपये तक की आय हो रही है। ऐसे में 173 नई बीसी सखियों के जुड़ने से जिले में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और व्यापक होगी। नई बीसी सखियों के चयन से महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलने के साथ नियमित आय का जरिया भी बनेगा।