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पशु आश्रय केंद्र निर्माण में सामने आई धांधली, प्रधान को नोटिस
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अंबेडकरनगर। भियांव विकास खंड की रतना ग्राम पंचायत में पशु आश्रय केंद्र के निर्माण में अनियमितता बरते जाने का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों की शिकायत पर अवर अभियंता डीआरडीए की जांच में खुदाई का कार्य मनरेगा मजदूरों से न कराकर जेसीबी से कराने का मामला सामने आया।
इसके अलावा जिन सामग्रियों व उपकरणों का क्रय किया जाना दिखाया गया था, वह जांच के दौरान निर्माणस्थल पर नहीं मिला। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद परियोजना निदेशक डीआरडीए के निर्देश पर डीपीआरओ ने संबंधित ग्राम प्रधान को नोटिस जारी किया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर केस दर्ज करने के साथ ही रिकवरी की चेतावनी दी है। उधर, डीआरडीए कार्यालय ने ग्राम पंचायत सचिव को भी नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
शासन के निर्देश पर भियांव विकास खंड के रतना गांव में पशु आश्रय केंद्र का निर्माण कराया जा रहा था। शुरुआती दिनों में निर्माण में धांधली बरते जाने की शिकायतें आने लगीं। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए परियोजना निदेशक डीआरडीए प्रदीप पांडेय ने बीते दिनों अवर अभियंता डीआरडीए बीपी सिंह को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
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जांच के बाद अवर अभियंता ने परियोजना निदेशक को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि निर्माण कार्य मनरेगा के तहत होना था, लेकिन इसमें जेसीबी का प्रयोग किया गया। निर्माण से संबंधित उपकरणों व बिल्डिंग मैटेरियल की खरीदारी तो दर्शाई गई, लेकिन निर्माणस्थल पर निरीक्षण के दौरान ऐसा कुछ भी नहीं मिला।
रिपोर्ट के आधार पर परियोजना निदेशक डीआरडीए ने डीपीआरओ को पत्र भेजकर संबंधित ग्राम प्रधान से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया। डीपीआरओ रामअशीष चौधरी ने बताया कि परियोजना निदेशक डीआरडीए से प्राप्त पत्र के आधार पर संबंधित ग्राम प्रधान बीना सिंह को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि ग्राम प्रधान के अनुसार किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की गई है। उधर, परियोजना निदेशक डीआरडीए कार्यालय ने ग्राम पंचायत सचिव की भी संलिप्तता पाते हुए उन्हें नोटिस भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। एक-दो दिन में उन्हें स्पष्टीकरण नोटिस भेज दी जाएगी।
वर्जन
सही मिली शिकायत
पशु आश्रय केंद्र रतना के निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत सामने आई थी। जांच में शिकायत सही पाई गई। डीपीआरओ कार्यालय से ग्राम प्रधान को नोटिस जारी की किया गया है। जबकि डीआरडीए कार्यालय से सचिव को भी नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
- प्रदीप पांडेय, परियोजना निदेशक डीआरडीए
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इसके अलावा जिन सामग्रियों व उपकरणों का क्रय किया जाना दिखाया गया था, वह जांच के दौरान निर्माणस्थल पर नहीं मिला। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद परियोजना निदेशक डीआरडीए के निर्देश पर डीपीआरओ ने संबंधित ग्राम प्रधान को नोटिस जारी किया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर केस दर्ज करने के साथ ही रिकवरी की चेतावनी दी है। उधर, डीआरडीए कार्यालय ने ग्राम पंचायत सचिव को भी नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
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शासन के निर्देश पर भियांव विकास खंड के रतना गांव में पशु आश्रय केंद्र का निर्माण कराया जा रहा था। शुरुआती दिनों में निर्माण में धांधली बरते जाने की शिकायतें आने लगीं। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए परियोजना निदेशक डीआरडीए प्रदीप पांडेय ने बीते दिनों अवर अभियंता डीआरडीए बीपी सिंह को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
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जांच के बाद अवर अभियंता ने परियोजना निदेशक को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि निर्माण कार्य मनरेगा के तहत होना था, लेकिन इसमें जेसीबी का प्रयोग किया गया। निर्माण से संबंधित उपकरणों व बिल्डिंग मैटेरियल की खरीदारी तो दर्शाई गई, लेकिन निर्माणस्थल पर निरीक्षण के दौरान ऐसा कुछ भी नहीं मिला।
रिपोर्ट के आधार पर परियोजना निदेशक डीआरडीए ने डीपीआरओ को पत्र भेजकर संबंधित ग्राम प्रधान से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया। डीपीआरओ रामअशीष चौधरी ने बताया कि परियोजना निदेशक डीआरडीए से प्राप्त पत्र के आधार पर संबंधित ग्राम प्रधान बीना सिंह को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि ग्राम प्रधान के अनुसार किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की गई है। उधर, परियोजना निदेशक डीआरडीए कार्यालय ने ग्राम पंचायत सचिव की भी संलिप्तता पाते हुए उन्हें नोटिस भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। एक-दो दिन में उन्हें स्पष्टीकरण नोटिस भेज दी जाएगी।
वर्जन
सही मिली शिकायत
पशु आश्रय केंद्र रतना के निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत सामने आई थी। जांच में शिकायत सही पाई गई। डीपीआरओ कार्यालय से ग्राम प्रधान को नोटिस जारी की किया गया है। जबकि डीआरडीए कार्यालय से सचिव को भी नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
- प्रदीप पांडेय, परियोजना निदेशक डीआरडीए