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एक बार फिर मौसम ने ली करवट, बारिश व सर्द हवा से बढ़ी ठंड
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मौसम ने ली करवट, बारिश व सर्द हवा से बढ़ी ठंड
अंबेडकरनगर। मौसम में अचानक एक बार फिर से आए परिवर्तन से जनपदवासी ठिठुर उठे। सर्द हवा के साथ ही हुई बारिश बढ़ी कड़ाके की ठंड के चलते आम जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की बाजारों में आमतौर पर सन्नाटा पसरा रहा। प्रमुख मार्गों पर भी सन्नाटा पसरा रहा। ठंड के चलते ज्यादातर लोग अपने अपने घरों व प्रतिष्ठानों तक ही सीमित रहे। उधर मौसम में आए परिवर्तन ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। किसानों का कहना है कि यदि बारिश का दौर जारी रहा, तो इससे फूल वाली फसल के साथ ही आलू की फसल को भी व्यापक नुकसान होगा।
गत बुधवार को सर्द हवाओं के साथ हुई बारिश से बढ़ी ठंड के बीच गुरुवार को जब तेज धूप निकली, तो कड़ाके की ठंड से जूझ रहे लोगों को राहत मिली। उन्हें उम्मीद हुई कि अब मौसम साफ हो जाएगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। शुक्रवार भोर से ही आसमान काले बादल से ढक गए। देखते ही देखते सर्द हवा के बीच बारिश होने लगी। इससे एक बार फिर से तापमान में तेजी से कमीं आई।
ठंड से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। खराब मौसम के चलते ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने बाजारों की तरफ रुख नहीं किया, इससे जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की बाजारों में लगभग पूरी तरह सन्नाटे का माहौल रहा। प्रमुख मार्गों पर भी आवागमन कम रहा। पूर्वाह्न बाद बारिश का सिलसिला तो थम गया, लेकिन काले बादल छाए रहने व सर्द हवा चलने से लोग ठंड से बचने का प्रयास करते दिखे। मौसम खराब होने से सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति प्रभावित हुई, तो सरकारी व निजी कार्यालयों में भी विलंब से कर्मचारी पहुंचे।
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किसानों की बढ़ी चिंता
मौसम में एक बार फिर से हुए परिवर्तन ने किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उत्पन्न हो गई। सुबह हुई बारिश ने सबसे अधिक आलू किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी। अकबरपुर के आलू किसान जगदंबा व अतुल कुमार ने कहा कि बारिश से आलू की फसल को नुकसान होना शुरू हो गया है। यदि बारिश का सिलसिला नहीं थमा, तो व्यापक नुकसान होगा। भीटी के रामबख्श सिंह व जगदीश ने कहा कि सर्द हवा चलने से सरसों की फसल धराशायी हो गई। यदि मौसम साफ नहीं हुआ, तो इसका दलहनी व तिलहनी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान होगा। जलालपुर के किसान राधेश्याम व राजेसुल्तानपुर के मेवालाल ने कहा कि बारिश से गेहूं की फसल को तो लाभ है, लेकिन दलहनी व तिलहनी फसलों को नुकसान होगा।
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अंबेडकरनगर। मौसम में अचानक एक बार फिर से आए परिवर्तन से जनपदवासी ठिठुर उठे। सर्द हवा के साथ ही हुई बारिश बढ़ी कड़ाके की ठंड के चलते आम जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की बाजारों में आमतौर पर सन्नाटा पसरा रहा। प्रमुख मार्गों पर भी सन्नाटा पसरा रहा। ठंड के चलते ज्यादातर लोग अपने अपने घरों व प्रतिष्ठानों तक ही सीमित रहे। उधर मौसम में आए परिवर्तन ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। किसानों का कहना है कि यदि बारिश का दौर जारी रहा, तो इससे फूल वाली फसल के साथ ही आलू की फसल को भी व्यापक नुकसान होगा।
गत बुधवार को सर्द हवाओं के साथ हुई बारिश से बढ़ी ठंड के बीच गुरुवार को जब तेज धूप निकली, तो कड़ाके की ठंड से जूझ रहे लोगों को राहत मिली। उन्हें उम्मीद हुई कि अब मौसम साफ हो जाएगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। शुक्रवार भोर से ही आसमान काले बादल से ढक गए। देखते ही देखते सर्द हवा के बीच बारिश होने लगी। इससे एक बार फिर से तापमान में तेजी से कमीं आई।
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ठंड से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। खराब मौसम के चलते ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने बाजारों की तरफ रुख नहीं किया, इससे जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की बाजारों में लगभग पूरी तरह सन्नाटे का माहौल रहा। प्रमुख मार्गों पर भी आवागमन कम रहा। पूर्वाह्न बाद बारिश का सिलसिला तो थम गया, लेकिन काले बादल छाए रहने व सर्द हवा चलने से लोग ठंड से बचने का प्रयास करते दिखे। मौसम खराब होने से सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति प्रभावित हुई, तो सरकारी व निजी कार्यालयों में भी विलंब से कर्मचारी पहुंचे।
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किसानों की बढ़ी चिंता
मौसम में एक बार फिर से हुए परिवर्तन ने किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उत्पन्न हो गई। सुबह हुई बारिश ने सबसे अधिक आलू किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी। अकबरपुर के आलू किसान जगदंबा व अतुल कुमार ने कहा कि बारिश से आलू की फसल को नुकसान होना शुरू हो गया है। यदि बारिश का सिलसिला नहीं थमा, तो व्यापक नुकसान होगा। भीटी के रामबख्श सिंह व जगदीश ने कहा कि सर्द हवा चलने से सरसों की फसल धराशायी हो गई। यदि मौसम साफ नहीं हुआ, तो इसका दलहनी व तिलहनी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान होगा। जलालपुर के किसान राधेश्याम व राजेसुल्तानपुर के मेवालाल ने कहा कि बारिश से गेहूं की फसल को तो लाभ है, लेकिन दलहनी व तिलहनी फसलों को नुकसान होगा।