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लब्बैक या हुसैन की सदाओं के बीच निकला जुलूसे अजा

Tue, 09 Oct 2018 11:04 PM IST
Updated Tue, 09 Oct 2018 11:04 PM IST
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लब्बैक या हुसैन की सदाओं के बीच निकला जुलूसे अजा
अंबेडकरनगर। लब्बैक या हुसैन की सदाओं के बीच मंगलवार को जलालपुर तहसील अंतर्गत गौरा महमदपुर में अलम, ताबूत व दुलदुल का जुलूस निकाला गया। जुलूस के दौरान स्थानीय व बाहरी अंजुमनों के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की, जबकि उलेमा ने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डालकर माहौल को गमगीन बना दिया। अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त नौहाख्वान मुदस्सिर ने अपने विशेष अंदाज में नौहा पेश कर माहौल को भावुक बना दिया। अलम, ताबूत व दुलदुल की जियारत के लिए बड़ी संख्या में लोग जुलूस में शामिल होने के लिए पहुंचे।
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अंजुमन सिपाहे अब्बास के तत्वावधान में सुबह इमामबारगाहे अबूतालिब से अलम, ताबूत व दुलदुल का जुलूस निकाला गया। जुलूस विभिन्न रास्तों से होता हुआ गांव में भ्रमण के बाद वापस इमामबारगाह पहुंचकर संपन्न हुआ।
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अंजुमन सचिव हसन अब्बास ने बताया कि जुलूस के दौरान अंजुमन यादगारे हुसैनी मुजफ्फरनगर, अंजुमन कमरे बनी हाशिम उतरौला, अंजुमन फिरदौसिया गोपालपुर बिहार, अंजुमन सिपाहे हुसैनी भनौली सादात सुल्तानपुर, अंजुमन नूरे इस्लाम जलालपुर व अंजुमन सिपाहे अब्बास गौरा महमदपुर के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। जुलूस के बीच अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त नौहाख्वान मुदस्सिर ने जब विशेष अंदाज में नौहा पढ़ा, तो उन्हें सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। नौहे के दौरान प्रत्येक की आंखों से बरबस ही आंसू निकल पड़े।
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इससे पहले जुलूस की शुरुआत मौलाना सै. नूरुल हसन की मजलिस से हुई। उन्होंने कहा कि इंसानियत ही सबसे बड़ा मजहब है। अगर इंसानियत नहीं है, तो वह इंसान जानवर के बराबर है। इस्लाम में इंसानियत की सीख दी गई है।


आयोजन समिति से जुड़े हसन मुसन्ना, जमाल हसन व लाडले हुसैन ने कहा कि जुलूस का समापन मौलाना मुशीर अब्बास की मजलिस से हुआ, जिसमें उन्होंने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डाला। इमरान हैदर, दानिश व मोहम्मद अहमद ने बताया कि मौलाना मोहम्मद हसन ने हजरत अली असगर अलैह की शहादत पढ़कर माहौल को भावुक बना दिया। बताया कि जुलूस के दौरान आने वाले लोगों को अलम, ताबूत व दुलदुल की जियारत कराई गई।
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