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हत्या में तीन सगे भाईयों समेत चार को उम्र कैद की सजा
Updated Sun, 25 Jun 2017 03:47 AM IST
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तीन सगे हत्यारे भाइयों समेत चार को उम्रकैद
वर्ष 2012 में हंसवर थाना क्षेत्र में हुई थी घटना
अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। गैर इरादतन हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी ने तीन सगे भाइयों समेत कुल चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उन पर 20-20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
थाना क्षेत्र हंसवर के सेमउर खानपुर निवासी मंगरू ने वर्ष 2012 में दर्ज कराए केस के जरिये कहा था कि शाहगंज जौनपुर निवासी उनके रिश्तेदार किंसराज आए हुए थे। 26 अगस्त को दिन में एक बजे गांव निवासी तीन सगे भाई बाबूराम, संतराम व श्रीलाल समेत बाबूराम के पुत्र रवि ने उनके रिश्तेदार से विवाद शुरू कर दिया। मेरा पुत्र गोविंद व भाई सीताराम बचाने के लिए दौड़ा तो उस पर भी हमलावर हो गए। लाठी व बल्लम से किए गए हमले में सीताराम गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में चारों आरोपियों के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर लिया। गिरफ्तारी के बाद से ही सभी चार आरोपी मंडल कारागार फैजाबाद में निरुद्ध चल रहे। इस बीच यह मामला सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ। अपर सत्र न्यायाधीश फास्टट्रैक कोर्ट प्रथम महेन्द्र सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अभियुक्तों ने लाठी-डंडे से पीटकर तथा बल्लम के प्रहार से घटना को अंजाम दिया है। समाज में ऐसे मामलों में अच्छा संदेश जाने के लिए उचित दंड दिया जाना जरूरी है। कोर्ट ने बचाव पक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया कि एक ही परिवार के चार सदस्य पांच वर्ष से जेल में हैं। परिवार में और कोई कमाने वाला नहीं है।
न्यायाधीश ने चारों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। कहा कि अर्थदंड अदा न करने पर छह माह के साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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वर्ष 2012 में हंसवर थाना क्षेत्र में हुई थी घटना
अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। गैर इरादतन हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी ने तीन सगे भाइयों समेत कुल चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उन पर 20-20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
थाना क्षेत्र हंसवर के सेमउर खानपुर निवासी मंगरू ने वर्ष 2012 में दर्ज कराए केस के जरिये कहा था कि शाहगंज जौनपुर निवासी उनके रिश्तेदार किंसराज आए हुए थे। 26 अगस्त को दिन में एक बजे गांव निवासी तीन सगे भाई बाबूराम, संतराम व श्रीलाल समेत बाबूराम के पुत्र रवि ने उनके रिश्तेदार से विवाद शुरू कर दिया। मेरा पुत्र गोविंद व भाई सीताराम बचाने के लिए दौड़ा तो उस पर भी हमलावर हो गए। लाठी व बल्लम से किए गए हमले में सीताराम गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में चारों आरोपियों के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर लिया। गिरफ्तारी के बाद से ही सभी चार आरोपी मंडल कारागार फैजाबाद में निरुद्ध चल रहे। इस बीच यह मामला सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ। अपर सत्र न्यायाधीश फास्टट्रैक कोर्ट प्रथम महेन्द्र सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अभियुक्तों ने लाठी-डंडे से पीटकर तथा बल्लम के प्रहार से घटना को अंजाम दिया है। समाज में ऐसे मामलों में अच्छा संदेश जाने के लिए उचित दंड दिया जाना जरूरी है। कोर्ट ने बचाव पक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया कि एक ही परिवार के चार सदस्य पांच वर्ष से जेल में हैं। परिवार में और कोई कमाने वाला नहीं है।
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न्यायाधीश ने चारों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। कहा कि अर्थदंड अदा न करने पर छह माह के साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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