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1300 किमी. के सफर में तिरंगे से टला खतरा

Tue, 08 Mar 2022 11:38 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 11:38 PM IST
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1300 kms The danger averted from the tricolor in the journey of
पवन कुमार। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
आलापुर (अंबेडकरनगर)। तिरंगे की अहमियत प्रत्येक भारतीय के लिए क्या होती है, इसे जीवन में पहली बार काफी करीब से देखने को मिला। गूंजते सायरनों के बीच चार रातें बंकर में गुजारने के बाद जब रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचने का निर्देश मिला तो रास्ते में खतरों को टालने के लिए हमारे पास तिरंगा दिखाने के सिवा कुछ नहीं था। लगभग 1300 किलोमीटर के सफर में दर्जनभर स्थानों पर सैन्य बलों ने बसों को रोका और पड़ताल की, लेकिन बसों व हाथों में तिरंगा देखते और चले जाते। निर्देशों के मुताबिक बसों के आगे व पीछे तिरंगा ध्वज लगा था। काफी संख्या में छात्र-छात्राएं अपने हाथों में भी तिरंगा लिए सफर करते देखे जा रहे थे। तमाम प्रतिकूल खबरों के बीच मन में अनिश्चितताओं का भाव आ रहा था। बॉर्डर पर पहुंचने के बाद अधिकारियों से मिले सहयोग से मन को तसल्ली मिली।
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बीते दिन यूक्रेन से लौटे कवही अंजनपुर गांव निवासी एमबीबीएस छात्र पवन कुमार पुत्र छोटेलाल ने मंगलवार को अमर उजाला से अपने अनुभव साझा किए। बताया कि वे यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए थे। डीएसएमयू स्टेट मेडिकल कॉलेज डीनिप्रो में उनका यह पहला वर्ष था। तीन माह पहले वे घर से यूक्रेन गए थे। सब कुछ सही चल रहा था। इस बीच रूस की ओर से यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद सब कुछ बदल गया। पूरे यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू होने की घोषणा कर दी गई और कॉलेज में छुट्टी कर दी गई। इसके बाद उन्हें कॉलेज में बने बंकर में रहने का सुझाव दिया गया।
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कहा गया कि जैसे ही उन्हें सायरन की आवाज सुनाई पड़े, वे तत्काल अपने बंकर में पहुंच जाएंगे। इधर-उधर घूमने पर भी रोक लगा दी गई। दिन में प्रतिदिन चार से पांच बार सायरन बजता था। वहां रहने के दौरान उन लोगों को एक दिन जोरदार धमाके की आवाज भी सुनाई पड़ी थी। चार रातें बंकर में गुजारने के बाद उन्हें निर्देश मिला कि वे अपनी निजी व्यवस्था पर सुरक्षित रोमानिया बॉर्डर पहुंचें। इसके बाद कॉलेज से भारतीय छात्रों को लेकर तीन बसें एक मार्च को रवाना हुईं। उनकी बस में 40 छात्र-छात्राएं सवार थे। निर्देश के मुताबिक बसों में आगे व पीछे तिरंगा लगा था। काफी संख्या में छात्र-छात्राएं हाथों में भी तिरंगा लेकर सफर कर रहे थे।
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पहले उनकी बसों को यूक्रेन की राजधानी कीव से गुजरना था। जानकारी मिली कि वहां के हालात खराब हैं। इसके चलते उन्हें अन्य मार्गों से रोमानिया बॉर्डर पहुंचाया गया। रास्ते में खतरों को टालने के लिए उनके पास सिर्फ हाथों में मौजूद तिरंगा था। लगभग 1300 किलोमीटर के सफर में दर्जनों स्थानों पर सैनिकों द्वारा रोका गया। परंतु तिरंगा देख व पूछताछ के बाद आगे जाने की अनुमति मिल जा रही थी। इसके चलते कोई खास दिक्कत नहीं हुई।

अगले दिन दो मार्च को वे लोग रोमानिया बॉर्डर पहुंच गए। यहां से अधिकारियों के सहयोग से उन्हें पहले होटल ले जाया गया। यहां भोजन आदि की व्यवस्था की गई। साथ ही उनका रजिस्ट्रेशन किया गया। तीन मार्च की रात वह लोग इंडिया के लिए फ्लाइट से रवाना हुए। चार मार्च को नई दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद यूपी भवन दिल्ली लाया गया। यहां से प्रदेश सरकार के विशेष वाहन से उनके साथ कुल पांच छात्रों को घर के लिए रवाना किया गया। पवन ने सरकार के प्रयास की सराहना की।
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