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10 लाख लोगों के पास नहीं बैंक अकाउंट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Jan 2017 10:15 PM IST
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प्रधानमंत्री मोदी की कैशलेस इंडिया की राह अंबेडकरनगर में आसान नहीं दिखती। जिले में लगभग 10 लाख लोगों के पास बैंक खाते ही नहीं है। लगभग 50 हजार व्यापारियों के सापेक्ष सिर्फ पांच हजार के पास ही टिन नंबर है। कैशलेस पर जोर के कारण स्वैप मशीनों का चलन पहले से बढ़ा है, लेकिन खराब इंटरनेट नेटवर्क की समस्या से ये मशीनें भी मौके पर काम नहीं आ रही हैं। वहीं, कई दुकानदार टीन नंबर होते हुए भी स्वैप मशीनों को लेने से बच रहे हैं।
कारण, स्वैप मशीन से होने वाले लेनदेन पर जो सर्विस टैक्स कटता है, उसकी भरपाई दुकानदार को अपनी जेब से करनी होती है। ऐसे में उसका मुनाफा कम हो जाता है। इसके कारण कैशलेस लेनदेन जिले में रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। कालेधन के विरुद्ध नोटबंदी कर मुहिम छेड़ने की घोषणा करने वाली केंद्र सरकार ने अब कैशलेस इंडिया की राह पकड़ ली है। पर यह राह जिले में आसान नजर नहीं आ रही है।
लगभग 23 लाख की आबादी वाले जिले में 23 बैंकों की 175 शाखाएं शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। लगभग साढ़े सात लाख सामान्य खाते विभिन्न बैंकों में खुले हुए हैं, जबकि 2 लाख 84 हजार 565 जनधन के खाते खुले हैं। दोनों को मिलाकर यह संख्या लगभग साढ़े 10 लाख होती है। अब 23 लाख की आबादी में लगभग ढाई लाख बच्चों के पास बैंक खाते न होने की स्थिति मान ली जाए तो भी लगभग 10 लाख शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के पास अब भी बैंक खाते नहीं हैं। अब ऐसे में कैशलेस लेनदेन जिले में परवान चढ़ेगा भी तो कैसे।
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जिले में लगभग 50 हजार छोटे-बड़े व्यापारी अलग-अलग व्यवसाय कर रहे हैं। यह बात अलग है कि सिर्फ 5870 व्यापारी ही टिन नंबर के साथ व्यापार के लिए अधिकृत हैं। जाहिर तौर पर टिन नंबर वाले व्यापारियों को ही स्वैप मशीन मिल सकती है, जिससे उनके लेनदेन पर ऑनलाइन नजर रखी जा सके। ऐसे में जिले के लगभग 10 प्रतिशत व्यापारियों के पास ही टिन नंबर होना भी कैशलेस मुहिम की राह में बड़ा झटका है।
जिन व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों में स्वैप मशीन लगा भी रखी है, वहां ज्यादातर व्यापारियों द्वारा इसके प्रयोग पर जोर नहीं दिया जा रहा। ऐसा इसलिए क्योंकि हर बिक्री पर दुकानदारों को सर्विस टैक्स देना पड़ेगा, जो इनके मुनाफे से ही जाएगा। इसके अलावा इंटरनेट सेवाओं में आने वाला व्यवधान भी कैशलेस मुहिम को तगड़ा झटका लगा रहा है। आए दिन इंटरनेट सेवाओं की बदहाली के कारण भी स्वैप मशीन का प्रयोग करने वाले व्यापारी आजिज आ चुके हैं।
सराफा व्यवसायी पीयूष सोनी ने बताया कि कैशलेस खरीदारी में सबसे बड़ी समस्या इंटरनेट की है। अक्सर या तो इंटरनेट फेल रहता है या फिर डाउन। ऐसे में स्वैप मशीन का मौके पर उपयोग नहीं हो पाता। उस समय तो और मुश्किल खड़ी हो जाती है, जब ग्राहक आभूषण खरीदने के बाद कैशलेस पेमेंट करना चाहता है, लेकिन नेट ठीक तरीके से कार्य नहीं करता।
मोबाइल विक्रेता नरायन उपाध्याय ने बताया कि नोटबंदी के बाद कैश का संकट होने के कारण ज्यादातर लोग कैशलेस पेमेंट कर रहे थे। अभी भी ज्यादातर लोगों का पेमेंट स्वैप मशीन से ही हो रहा है। अब जबकि कैश का संकट कुछ हद तक दूर हो गया है, तो कुछ लोग कैश पेमेंट भी करने लगे हैं। कपड़ा व्यवसायी विनोद कुमार मोदनवाल ने कहा कि अभी तो स्वैप मशीन से ही पेमेंट हो रहा था।
शुरुआत में इसमें कुछ समस्या आई, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो गई। पर अभी कुछ लोग ही कैशलेस पेमेंट कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोग अभी इसके बारे में ठीक से जानते तक नहीं। फुटवेयर व्यवसायी दीपक गुप्ता ने कहा कि कैशलेस पेमेंट के लिए अभी लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। इसके साथ नेटवर्क समस्या भी दूर करनी होगी।
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कारण, स्वैप मशीन से होने वाले लेनदेन पर जो सर्विस टैक्स कटता है, उसकी भरपाई दुकानदार को अपनी जेब से करनी होती है। ऐसे में उसका मुनाफा कम हो जाता है। इसके कारण कैशलेस लेनदेन जिले में रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। कालेधन के विरुद्ध नोटबंदी कर मुहिम छेड़ने की घोषणा करने वाली केंद्र सरकार ने अब कैशलेस इंडिया की राह पकड़ ली है। पर यह राह जिले में आसान नजर नहीं आ रही है।
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लगभग 23 लाख की आबादी वाले जिले में 23 बैंकों की 175 शाखाएं शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। लगभग साढ़े सात लाख सामान्य खाते विभिन्न बैंकों में खुले हुए हैं, जबकि 2 लाख 84 हजार 565 जनधन के खाते खुले हैं। दोनों को मिलाकर यह संख्या लगभग साढ़े 10 लाख होती है। अब 23 लाख की आबादी में लगभग ढाई लाख बच्चों के पास बैंक खाते न होने की स्थिति मान ली जाए तो भी लगभग 10 लाख शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के पास अब भी बैंक खाते नहीं हैं। अब ऐसे में कैशलेस लेनदेन जिले में परवान चढ़ेगा भी तो कैसे।
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जिले में लगभग 50 हजार छोटे-बड़े व्यापारी अलग-अलग व्यवसाय कर रहे हैं। यह बात अलग है कि सिर्फ 5870 व्यापारी ही टिन नंबर के साथ व्यापार के लिए अधिकृत हैं। जाहिर तौर पर टिन नंबर वाले व्यापारियों को ही स्वैप मशीन मिल सकती है, जिससे उनके लेनदेन पर ऑनलाइन नजर रखी जा सके। ऐसे में जिले के लगभग 10 प्रतिशत व्यापारियों के पास ही टिन नंबर होना भी कैशलेस मुहिम की राह में बड़ा झटका है।
जिन व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों में स्वैप मशीन लगा भी रखी है, वहां ज्यादातर व्यापारियों द्वारा इसके प्रयोग पर जोर नहीं दिया जा रहा। ऐसा इसलिए क्योंकि हर बिक्री पर दुकानदारों को सर्विस टैक्स देना पड़ेगा, जो इनके मुनाफे से ही जाएगा। इसके अलावा इंटरनेट सेवाओं में आने वाला व्यवधान भी कैशलेस मुहिम को तगड़ा झटका लगा रहा है। आए दिन इंटरनेट सेवाओं की बदहाली के कारण भी स्वैप मशीन का प्रयोग करने वाले व्यापारी आजिज आ चुके हैं।
सराफा व्यवसायी पीयूष सोनी ने बताया कि कैशलेस खरीदारी में सबसे बड़ी समस्या इंटरनेट की है। अक्सर या तो इंटरनेट फेल रहता है या फिर डाउन। ऐसे में स्वैप मशीन का मौके पर उपयोग नहीं हो पाता। उस समय तो और मुश्किल खड़ी हो जाती है, जब ग्राहक आभूषण खरीदने के बाद कैशलेस पेमेंट करना चाहता है, लेकिन नेट ठीक तरीके से कार्य नहीं करता।
मोबाइल विक्रेता नरायन उपाध्याय ने बताया कि नोटबंदी के बाद कैश का संकट होने के कारण ज्यादातर लोग कैशलेस पेमेंट कर रहे थे। अभी भी ज्यादातर लोगों का पेमेंट स्वैप मशीन से ही हो रहा है। अब जबकि कैश का संकट कुछ हद तक दूर हो गया है, तो कुछ लोग कैश पेमेंट भी करने लगे हैं। कपड़ा व्यवसायी विनोद कुमार मोदनवाल ने कहा कि अभी तो स्वैप मशीन से ही पेमेंट हो रहा था।
शुरुआत में इसमें कुछ समस्या आई, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो गई। पर अभी कुछ लोग ही कैशलेस पेमेंट कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोग अभी इसके बारे में ठीक से जानते तक नहीं। फुटवेयर व्यवसायी दीपक गुप्ता ने कहा कि कैशलेस पेमेंट के लिए अभी लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। इसके साथ नेटवर्क समस्या भी दूर करनी होगी।