Prayagraj : जैनब ने संभाल ली थी वसूली गैंग की कमान, देती थी रसीद, पुलिस के हाथ लगी एक रसीद
यह अहम सबूत एक दिन पहले ही पुलिस के हाथ लगा है। जैनब के अकबरपुर स्थित मकान में कुर्की की कार्रवाई के दौरान तलाशी में पुलिस के हाथ एक रसीद लगी है। इसमें जैनब फातिमा के दस्तखत हैं और किसी उमर नाम के व्यक्ति से 1.5 लाख रुपये प्राप्त करने की बात लिखी है।
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माफिया खालिद अजीम उर्फ अशरफ के जेल जाने के बाद उसके वसूली गैंग की कमान पत्नी जैनब फातिमा ने संभाल ली थी। इसका एक अहम सबूत पुलिस के हाथ लगा है। पता चला है कि वह वसूली की रकम पहुंचाने वाले को अपना दस्तखत बनाकर एक रसीद देती थी। रकम देने वाला इस रसीद को जेल में बंद अशरफ तक पहुंचाता था और इसके बाद ही माफिया के गुर्गे उसका पीछा छोड़ते थे।
यह अहम सबूत एक दिन पहले ही पुलिस के हाथ लगा है। जैनब के अकबरपुर स्थित मकान में कुर्की की कार्रवाई के दौरान तलाशी में पुलिस के हाथ एक रसीद लगी है। इसमें जैनब फातिमा के दस्तखत हैं और किसी उमर नाम के व्यक्ति से 1.5 लाख रुपये प्राप्त करने की बात लिखी है। रसीद के बारे में जांच-पड़ताल में बेहद अहम खुलासा हुआ है। पता चला है कि जैनब ने 2020 में अशरफ के जेल जाने के बाद से ही वसूली गैंग की कमान अपने हाथ में ले ली थी।
बरेली जेल में बंद अशरफ व्यापारियों व बिल्डरों को धमकाकर गुंडा टैक्स मांगता था। साथ ही यह भी संदेशा भेजवाता था कि रकम उसकी पत्नी जैनब तक पहुंचा दी जाए। रकम मिलने पर जैनब एक रसीद पर अपने दस्तखत करती थी। साथ ही लिखती थी कि इस व्यक्ति से उसने इतनी रकम प्राप्त की। यह रसीद रकम देने वाले को जेल में बंद अशरफ तक पहुंचानी होती थी। इसके बाद ही अशरफ यह मानता था कि व्यापारी ने रकम दे दी है।
अहम सबूत, केस डायरी में होगा शामिल
सूत्रों का कहना है कि कुर्की के दौरान बरामद वसूली की रसीद जैनब के खिलाफ एक अहम सबूत है। पुलिस इसे उमेश पाल हत्याकांड के केस डायरी में शामिल कर सकती है। दरअसल, इसके जरिये यह साबित करने की कोशिश की जाएगी कि वसूली से लेकर अशरफ के हर कदम की वह राजदार थी। पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि वसूली का संचालन जैनब अपने भाई सद्दाम की मदद से करती थी। कारोबारियों/बिल्डरों तक जेल में बंद अशरफ का संदेश सद्दाम ही पहुंचाता था।
आईएस-227 में शामिल हो सकता है नाम
नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उक्त रसीद से साफ है कि जैनब अशरफ के वसूली गैंग को संचालित कर रही थी। ऐसे में आईएस-227 की नई सूची में उसका भी नाम शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। बता दें कि पुलिस की ओर से 58 नए नामों के साथ ही आईएस-227 की नई सूची बनाई गई है। इसमें जो भी नाम शामिल हैं, वह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से माफिया अतीक और अशरफ के मददगार रहे हैं। उनके खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
वसूली को लेकर ही शाइस्ता से थी अनबन
सूत्रों का कहना है कि अशरफ के जेल जाने के बाद ही शाइस्ता व जैनब में अनबन शुरू हुई। दरअसल, इससे पहले माफिया गैंग की अवैध कमाई का सारा हिसाब किताब खान शौलत हनीफ के जरिये शाइस्ता के पास रहता था। हालांकि, अशरफ के जेल जाने के बाद से शाइस्ता ने वसूली की कमान अपने हाथों में लेनी शुरू कर दी थी। इसकी भनक लगने के बाद ही शाइस्ता व उसके रिश्ते में खटास आ गई थी।