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Research : मक्के से बनेगा दही, सेहत निखरेगी, किसानों की कमाई भी बढ़ेगी

Fri, 14 Nov 2025 07:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 14 Nov 2025 07:58 PM IST
सार

आने वाले दिनों में मक्के से भी दूध और दही तैयार होगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के वैज्ञानिकों ने मक्के से तैयार दही में प्रोटीन, कैल्शियम समेत अन्य तत्वों की मात्रा बढ़ाने में भी सफलता पाई है।

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Yogurt made from corn will improve health and increase farmers income.
मक्के में मौजूद प्रोटीन एवं दही बनाने की प्रक्रिया पर अध्ययन करते प्रोफेसर केएन उत्तम। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आने वाले दिनों में मक्के से भी दूध और दही तैयार होगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के वैज्ञानिकों ने मक्के से तैयार दही में प्रोटीन, कैल्शियम समेत अन्य तत्वों की मात्रा बढ़ाने में भी सफलता पाई है। इसमें प्रोटीन भी उच्च गुणवत्ता का होगा जिससे प्रचुर मात्रा में अमीनो एसिड बनाने की क्षमता होगी। मक्के से तैयार दही में गुण तो सभी होंगे लेकिन रंग सफेद की जगह हल्का भूरा होगा। उधर, मक्के की खपत बढ़ने से इसका बड़ा फायदा किसानों को भी होगा।

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इससे उनकी आय बढ़ेगी। आज हर उम्र के लोगों में प्रोटीन की मांग बढ़ती जा रही है लेकिन इसके विपरीत पशुधन के साथ प्रोटीन के प्रमुख स्रोत दूध-दही की उपलब्धता कम होती जा रही है। प्रदूषण, मिलावट व अन्य वजहों से दूध की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। ऐसे में दूध के विकल्प के रूप में अब मक्के को भी देखा जा रहा है। इविवि के भौतिकी विभाग के प्रो.केएन उत्तम के निर्देशन में वैज्ञानिकों की टीम ने पांच साल के शोध के बाद मक्के से दही बनाने में सफलता पाई है। साथ ही यह टीम दही की गुणवत्ता बढ़ाने में भी सफल रही।

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इस तरह तैयार किया दही

वैज्ञानिकों ने दूध में 35 से 65 प्रतिशत तक मक्के का पाउडर और जरूरत के अनुसार पानी मिलाकर नए तरह का दूध तैयार किया। फिर इसी दूध से दही बनाने में सफलता पाई। इस दही का रंग हल्का भूरा है लेकिन इनमें गुण सभी दही वाले ही पाए गए। इसमें प्रोटीन के साथ कैल्शियम की प्रचुर मात्रा पाई गई है। इसके अलावा दही में पाए जाने वाले अन्य मिनरल भी हैं।प्रो.उत्तम के साथ आराधना त्रिपाठी, ऐश्वर्या अवस्थी, छवि बरन, शष्टि वर्मा अब इस पर भी शोध कर रहे हैं कि कहीं इसका नुकसान तो नहीं है। अब तक के शोध में काफी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रो.उत्तम का कहना है कि डेयरी उद्योग की बड़ी कंपनियां भी इस पर शोध कर रही हैं। अभी तक के परिणाम के आधार पर उम्मीद की जा रही है कि मक्के की दही तथा अन्य उत्पाद जल्द ही बाजार में आ जाएंगे।

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Yogurt made from corn will improve health and increase farmers income.
मक्के में मौजूद प्रोटीन एवं दही बनाने की प्रक्रिया पर अध्ययन करते शोधार्थी। - फोटो : अमर उजाला।

नैनो खाद व लेजर तकनीकी के इस्तेमाल से बढ़ाई गुणवत्ता

मक्के में प्रोटीन व अन्य पोषक तत्वों की मात्रा भी 22 से 100 फीसदी तक बढ़ाने में सफलता मिली है। इसके लिए मक्के की फसल में सिलिकन डाई ऑक्साइड एवं आयरन डाई ऑक्साइड नैनो खाद की अलग-अलग सांद्रता का पांच वर्षों तक इस्तेमाल किया गया। इसमें सिलिकन डाई ऑक्साइट खाद इविवि में ही तैयार की गई है। इसके अलावा अध्ययन में अत्याधुनिक कन्फोकल माइक्रो रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी का इस्तेमाल किया गया ताकि इस दौरान किसी तरह का साइड इफेक्ट न होने पाए। प्रो.उत्तम के अनुसार इस तकनीकी के माध्यम से महत्वपूर्ण जैविक यौगिकों का विश्लेषण गैर विनाशकारी तकनीकी द्वारा किया गया। इससे आशानुरूप परिणाम प्राप्त हुए और प्रोटीन तथा अन्य अवयवों में 22 से 100 प्रतिशत तक वृद्धि पाई गई।

एक बाउल दही में मिला नौ ग्राम तक प्रोटीन

प्रो.उत्तम के मुताबिक आमतौर एक बाउल दही में तीन से छह ग्राम तक प्रोटीन पाया जाता है लेकिन मक्कायुक्त दही में तीन से नौ ग्राम तक प्रोटीन मिला है। उन्होंने कहा कि मक्के व दही में पाए जाने प्रोटीन की गुणवत्ता बढ़ाने में भी सफलता मिली है। इससे सुपर फूड तैयार किए जा सकेंगे। इसमें और सुधार के लिए शोध जारी है। उनका कहना है कि प्रोटीन भी कई तरह के होते हैं। ये दिल, मस्तिष्क, त्चचा आदि को मजबूत करने में सहायक होते हैं। इसे देखते हुए अलग-अलग तरह के प्रोटीन पर भी शोध किया जा रहा है। यह भी कह सकते हैं कि सुपर फूड को स्मार्ट फूड बनाने की दिशा में शोध हो रहा है। मक्के से पनीर व चीज बनाने पर भी काम किया जा रहा है। इससे संबंधित डाटा के अध्ययन के लिए एआई और मशीनी भाषा का उपयोग किया जा रहा है।

मक्का उत्पादन में चौथे नंबर पर है भारत

मक्के की खेती बंजर भूमि में भी हो जाती है। सिंचाई के लिए अधिक पानी की जरूरत नहीं होती। इसी वजह से भारत के ज्यादातर हिस्से में इसका उत्पादन होता है। मक्का उत्पादन में भारत का विश्व में चौथा स्थान है। ऐसे में इससे दूध, दही समेत अन्य उत्पाद बाजार में आने से मक्के की मांग बढ़ेगी जो किसानों के लिए वरदान साबित होगा।

कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े

  • 2022 में कहा गया था कि एक व्यक्ति को रोजाना 50 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है जो 2024 में बढ़कर 60 से 70 ग्राम हो गई
  • सक्षम व्यक्ति भी अधिकतम 50 ग्राम प्रोटीन प्राप्त कर पा पाता है
  • खाद्यान्नों में पाए जाने वाले प्रोटीन में 50 से 60 फीसदी ही अमीनो एसिड बना पाते हैं
  • शोध में मक्का को प्रोटीन का प्रमुख स्रोत व दूध का विकल्प बनने की संभावना दिखी
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