विश्व जल दिवस विशेष : नहीं चेते तो पेयजल को तरसेंगे शहरवासी, प्रयागराज में लगातार गिर रहा भूजल स्तर
जिले का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब, शहरवासी पानी के लिए तरसेंगे। आंकड़े बताते हैं कि साल दर साल जिले में 0.45 सेंटीमीटर पानी का लेवल नीचे जा रहा है। सबसे खस्ताहाल नैनी और सिविल लाइंस क्षेत्र का है।
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जिले का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब, शहरवासी पानी के लिए तरसेंगे। आंकड़े बताते हैं कि साल दर साल जिले में 0.45 सेंटीमीटर पानी का लेवल नीचे जा रहा है। सबसे खस्ताहाल नैनी और सिविल लाइंस क्षेत्र का है। यहां पर पानी 37.07 और 25.78 मीटर नीचे तक पहुंच चुका है।
भूगर्भ विभाग के अनुसार, बारिश के बाद (2024) में शहरी क्षेत्र में नैनी, सिविल लाइंस के अलावा रानीपुर प्रयाग, सदर तहसील, न्यू कटरा, जार्ज टाउन, सर्किट हाउस, एडीए कॉलोनी नैनी, पीपल गांव, महेशपुर झूंसी में लगातार भूजल का स्तर घट रहा है। सबसे खराब स्थित नैनी की है, यहां पर बारिश के पहले भूजल स्तर 21.02 मीटर था, लेकिन बारिश के बाद स्थिति और खराब हो गई है और भूजल स्तर 37.07 पहुंच गया।
सहसों और चाका ब्लॉक को क्रिटिकल जोन घोषित किया
भूजल और दोहन के स्तर पर सहसों और चाका ब्लॉक को क्रिटिकल जोन घोषित किया गया है। इसके अलावा बहादुरपुर, रहीमापुर, मंदौर, प्रतापपुर, शृंग्वेरपुर, बहरिया, होलागढ़, सैदाबाद, मऊआइमा, फूलपुर समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल का स्तर काफी नीचे चला गया है। भूगर्भ विभाग की हाइड्रोलॉजिस्ट अर्चना सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से गठित कमेटी भूगर्भ जल का आंकलन लगातार कर रही है।
प्रदूषित हो रहा पानी
भूजल स्तर गिरने के कारण ही शहर में लगे ज्यादातर हैंडपंप दम तोड़ चुके हैं। कई घरों में लगे पंप भी जवाब दे चुके हैं। अब लोगों को सबमर्सिबल पंप लगाना पड़ रहा है। यही नहीं गिरते जलस्तर के कारण पानी प्रदूषित भी हो रहा है। ऐसी जगहों पर भूजल की रिचार्जिंग की तुलना में इसका इस्तेमाल अधिक हो रहा है।
एरिया (भूजल स्तर मीटर में)
नैनी 37.07 21.02
सिविल लाइंस 25.78
रानीपुर प्रयाग 25.25
सदर तहसील 25.10
न्यू कटरा 25.03
जार्ज टाउन 24.80
सर्किट हाउस 23.88
एडीएकॉलोनी नैनी 23.14
पीपल गांव 23.00
महेशपुर झूंसी 21.45
भूजल दोहन की ये पांच सबसे बड़ी वजह
1- बिना अनुमति के जगह-जगह कार वाशिंग सेंटर खुलना
2- हर दूसरे घर में सबमर्सिबल पंप का होना
3- रिचार्जिंग की तुलना में अधिक पानी का इस्तेमाल होना
4- भूजल दोहन करने वालों पर शिकंजा न कसना
5- बिल्डिंग व कार्यालय में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न होना
इस तरह तय होता है मानक
- सुरक्षित जोन--- रिचार्जिंग की तुलना में 70 फीसदी तक भूजल का इस्तेमाल होना
- सेमी क्रिटिकल-- रिचार्जिंग की तुलना में 70 फीसदी से अधिक इस्तेमाल होना
- क्रिटिकल जोन--- रिचार्जिंग की तुलना में 90 से 100 फीसदी तक इस्तेमाल होना
- अतिदोहित--- रिचार्जिंग की तुलना में 100 फीसदी तक इस्तेमाल होना
शहरी क्षेत्र में भूजल की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। लोगों से अपील है कि भूजल दोहन कम करने के साथ रिचार्ज करने पर भी ध्यान दें, ताकि भविष्य में लोगों को किसी तरह की दिक्कत न हो। - रविकांत सिंह, संयुक्त निदेशक, भूगर्भ विभाग
ये भी क्रिटिकल जोन में...
- कौशाम्बी--- चायल ब्लॉक
- प्रतापगढ़--- शिवगढ़, सदर, मानधाता और संडवा चंद्रिका