यूपी : दो पैनकार्ड मामले में आजम खां और अब्दुल्लाह को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, दोनों की सजा निलंबित, जमानत मंजूर
दो पैन कार्ड मामले में सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ के इस फैसले से दोनों को राहत मिली है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित दो पैन कार्ड मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने दोनों की सजा निलंबित करने की अर्जियां मंजूर करते हुए जमानत दे दी। अदालत के इस आदेश के बाद दोनों की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, रिहाई के लिए जमानत की शर्तों और आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा।
सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा था फैसला
आजम खां और अब्दुल्ला आजम ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए अलग-अलग आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं दाखिल की थीं। दोनों ने याचिकाओं के अंतिम निस्तारण तक सजा निलंबित करने और जमानत पर रिहा किए जाने की मांग की थी।
इससे पहले 15 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा निलंबन की अर्जियों पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। आजम खां और अब्दुल्ला आजम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, एनआई जाफरी और अधिवक्ता शाश्वत आनंद ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और अधिवक्ता परितोष कुमार मालवीय ने दलीलें पेश की थीं।
क्या है दो पैन कार्ड मामला?
अभियोजन के अनुसार, यह मामला कथित तौर पर अलग-अलग जन्मतिथियों का उल्लेख करने वाले दूसरे पैन कार्ड को बनवाने और उसके इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोपों में चुनावी नामांकन पत्रों में दूसरे पैन कार्ड का इस्तेमाल किए जाने का मामला भी शामिल है। आजम खां और अब्दुल्ला आजम ने निचली अदालत से मिली दोषसिद्धि और सजा को आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी है। इसी दौरान उन्होंने सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग की थी।
दोषसिद्धि पर रोक से अलग है सजा निलंबन
हाईकोर्ट से मिली राहत सजा निलंबित करने और जमानत देने से संबंधित है। इसे दोषसिद्धि पर रोक लगाए जाने के आदेश के समान नहीं माना जा सकता। पुनरीक्षण याचिकाओं पर अंतिम निर्णय होना अभी अलग न्यायिक प्रक्रिया है।