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विश्व दुर्लभ रोग दिवस : ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के शिकार हो रहे मासूम, टेढे होने लगते हैं हाथ पैर

Fri, 28 Feb 2025 11:43 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 28 Feb 2025 11:43 AM IST
सार

अगर कोई बच्चा दो या तीन साल की उम्र में अचानक से चलना बंद कर दे या फिर उसके हाथ-पैर टेढ़े होने लगें, मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन हो, तो सावधान हो जाइए। यह ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) नामक दुर्लभ बीमारी हो सकती है।

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World Rare Disease Day: Innocent children becoming victims of Duchenne muscular dystrophy, hands and legs star
ड्यूचेन मस्कुलर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अगर कोई बच्चा दो या तीन साल की उम्र में अचानक से चलना बंद कर दे या फिर उसके हाथ-पैर टेढ़े होने लगें, मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन हो, तो सावधान हो जाइए। यह ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) नामक दुर्लभ बीमारी हो सकती है। इसमें बच्चा 12 वर्ष की उम्र तक पूर्णत: व्हील चेयर पर आ जाता है। इसके अलावा यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।

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इसका कोई सटीक इलाज नहीं है, हालांकि कई तरह के उपचारों से बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। वर्तमान में जांचों का दायरा बढ़ने से यह दुर्लभ बीमारी भी पकड़ में आने लगी है। पिछले एक साल में इस बीमारी से पीड़ित तीन बच्चों की पहचान की गई है, जिनका इलाज स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के न्यूरोलॉजी विभाग में चल रहा है।

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केस नंबर 1-

दिसंबर-2024 में फतेहपुर निवासी 10 वर्षीय बच्चा एसआरएन अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में लाया गया था, जहां बच्चे को चलने-फिरने में तकलीफ हो रही थी। इसके अलावा बच्चे के हांथ-पैर टेढ़े हो गए थे। माता-पिता इसे कमजोरी समझकर बच्चे को ताकत की दवाइयां खिला रहे थे। बच्चे की बायोप्सी और जीन स्टडी कराई गई, जिसमें डीएमडी बीमारी की पुष्टि हुई। फिलहाल बच्चे की स्थिति पहले से बेहतर है और उसका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

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केस नंबर 2-

कोरांव निवासी 12 वर्षीय बच्चे को अगस्त-2024 में एसआरएन अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग लाया गया था। इस दौरान बच्चे के पैरों के जोड़ टेढ़े हो गए थे। माता-पिता बच्चे का इलाज ग्रामीण क्षेत्र में करा रहे थे, जिसकी वजह से डीएमडी बीमारी का पता नहीं चल सका। बाद में जांच के दौरान पता चला कि बच्चे में डीएमडी बीमारी पूरी तरह से हावी हो चुकी है। ऐसे में बच्चा चार से पांच साल तक जीवित रह सकता है। फिलहाल बच्चे की फिजियोथेरेपी की जा रही है।

केस नंबर 3-

मध्य प्रदेश रीवां निवासी तीन वर्षीय बच्चे को मार्च-2024 में एसआरएन अस्पताल लाया गया था। इस दौरान बच्चे को चलने-फिरने में दिक्कत हो रही थी और बच्चे की मांसपेशियों में सूजन पाई गई। वहीं बच्चे के एंजाइम और जीन की जांच की गई, जिसमें डीएमडी बीमारी की पुष्टि हुई, मगर माता-पिता दोबारा बच्चे को एसआरएन अस्पताल दिखाने नहीं पहुंचे।

क्या है डीएमडी बीमारी

ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफ़ी (डीएमडी) एक आनुवंशिक बीमारी है, जिससे मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं। यह बीमारी आमतौर पर केवल लड़कों में ही पाई जाती है।

 

माता-पिता को चाहिए कि जब बच्चा गर्भ में पल रहा हो, तभी डॉक्टर की सलाह लेकर जीन की जांच करा लें। इस बीमारी के प्रति जागरूकता ही एकमात्र बचाव है। -- डॉ. प्रभात सिंह, न्यूरोलॉजी विभाग, सह आचार्य, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।

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