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पहले भी तार-तार हो चुकी गुरुओं की मर्यादा
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शहर के कई शिक्षकों, अधिकारियों पर लग चुके हैं यौन उत्पीड़न के आरोप
आरोप लगने के बाद ट्रिपलआईटी, इविवि में शिक्षकों के खिलाफ हो चुकी है कार्रवाई
प्रयागराज। मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में शोध छात्रा के यौन उत्पीड़न का मामला कोई नया नहीं है। इससे पहले भी कई अन्य संस्थानों के शिक्षकों पर इस तरह के गंभीर आरोप लग चुके हैं। इनमें कुछ मामलों की जांच अभी चल रही है और कुछ दब गई हैं।
प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में गिना जाने वाला एमएनएनआईटी में यौन उत्पीड़न का मामला सामने आने से सभी हैरान हैं। लेकिन कई अन्य संस्थानों के शिक्षकों के दामन पर पहले भी दाग लग चुके हैं। शहर में स्थित दूसरे भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के एक शिक्षक पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। छात्रा का आरोप सही पाए जाने पर शिक्षक को जेल तक जाना पड़ा था। इसी प्रकार इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी संगीत विभाग के एक शिक्षक के खिलाफ उनके विभाग की ही छात्रा ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जिस पर विवि के छात्रों ने इस शिक्षक की सार्वजनिक रूप से पिटाई करने के बाद पुलिस को सौंप दिया था।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न का आरोप लगने के बाद तो विवि की सर्वोच्च संस्था कार्य परिषद ने आरोप लगने के बाद हिंदी विभाग के एक शिक्षक को पदावनत करके उसके मूल पद पर भेज दिया। इविवि में अर्थशास्त्र विभाग के दो वर्तमान विभागाध्यक्षों के खिलाफ उनके विभाग की शिक्षिकाओं ने ही उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इसमें एक विभागाध्यक्ष के खिलाफ जांच अभी चल रही है। इविवि के ज्वाइंट रजिस्ट्रार, जो इस समय केंद्र सरकार के एक विभाग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं, उनके खिलाफ भी एक महिला ने नौकरी देने के नाम पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस मामले की जांच अभी चल रही है।
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आरोप लगने के बाद ट्रिपलआईटी, इविवि में शिक्षकों के खिलाफ हो चुकी है कार्रवाई
प्रयागराज। मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में शोध छात्रा के यौन उत्पीड़न का मामला कोई नया नहीं है। इससे पहले भी कई अन्य संस्थानों के शिक्षकों पर इस तरह के गंभीर आरोप लग चुके हैं। इनमें कुछ मामलों की जांच अभी चल रही है और कुछ दब गई हैं।
प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में गिना जाने वाला एमएनएनआईटी में यौन उत्पीड़न का मामला सामने आने से सभी हैरान हैं। लेकिन कई अन्य संस्थानों के शिक्षकों के दामन पर पहले भी दाग लग चुके हैं। शहर में स्थित दूसरे भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के एक शिक्षक पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। छात्रा का आरोप सही पाए जाने पर शिक्षक को जेल तक जाना पड़ा था। इसी प्रकार इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी संगीत विभाग के एक शिक्षक के खिलाफ उनके विभाग की ही छात्रा ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जिस पर विवि के छात्रों ने इस शिक्षक की सार्वजनिक रूप से पिटाई करने के बाद पुलिस को सौंप दिया था।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न का आरोप लगने के बाद तो विवि की सर्वोच्च संस्था कार्य परिषद ने आरोप लगने के बाद हिंदी विभाग के एक शिक्षक को पदावनत करके उसके मूल पद पर भेज दिया। इविवि में अर्थशास्त्र विभाग के दो वर्तमान विभागाध्यक्षों के खिलाफ उनके विभाग की शिक्षिकाओं ने ही उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इसमें एक विभागाध्यक्ष के खिलाफ जांच अभी चल रही है। इविवि के ज्वाइंट रजिस्ट्रार, जो इस समय केंद्र सरकार के एक विभाग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं, उनके खिलाफ भी एक महिला ने नौकरी देने के नाम पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस मामले की जांच अभी चल रही है।
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