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स्वीकार किए गए ठेके के बकाये का भुगतान रोकना मनमाना : हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 02:41 AM IST
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Withholding payment for accepted contracts is arbitrary
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य प्राधिकरण की ओर से स्वीकार किए गए अनुबंध संबंधी बकाये का भुगतान रोकना मनमाना है। इसकी बकाया राशि की वसूली के लिए अनुच्छेद-226 के तहत रिट याचिका दाखिल की जा सकती है।
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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने चंदौली नगर पंचायत के लिए निर्माण कार्य करने वाले एक ठेकेदार की याचिका पर की है। ठेकेदार ने दावा किया था कि बार-बार अनुरोध के बावजूद 28,43,443 रुपये के बिलों का भुगतान नहीं किया गया।
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कोर्ट ने पाया कि नगर पंचायत के कार्यकारी अधिकारी ने व्यक्तिगत हलफनामे में पहले वर्क ऑर्डर के तहत 7,92,580 रुपये बकाया होने की बात स्वीकार की गई। दूसरे वर्क ऑर्डर के तहत 6,31,890 रुपये का भुगतान लंबित बताया गया। क्योंकि, ठेकेदार ने निर्धारित प्रारूप में बिल जमा करने के बजाय अधूरा फॉर्म नंबर 26 दाखिल किया था। संबंधित कार्य का इंजीनियरों से प्रमाणीकरण भी लंबित था। हालांकि, काम पूरा होने को लेकर कोई विवाद नहीं था।
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कोर्ट ने कहा स्वीकार किए गए बकाये को अनिश्चितकाल तक रोके रखना मनमाना है। इससे ठेकेदार के वैध दावे की कीमत पर सरकारी प्राधिकरण को अनुचित लाभ मिलेगा। कोर्ट ने 7,92,580 रुपये की राशि को स्वीकार किया हुआ बकाया मानते हुए उसका भुगतान करने का आदेश दिया। दूसरे वर्क ऑर्डर के तहत 6,31,890 रुपये के लिए याची को दो सप्ताह में निर्धारित औपचारिकताएं पूरी कर नया बिल पेश करने के लिए कहा है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चार सप्ताह में स्वीकार किए गए बकाये का भुगतान करने और भुगतान की तारीख तक छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ करना होगा।
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