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प्रयागराज : जटायू मंदिर के निर्माण से देश में रामराज्य की परिकल्पना लेगी मूर्त रूप - सिद्धार्थ नाथ
Sat, 18 Sep 2021 05:56 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 18 Sep 2021 05:56 PM IST
सार
कैबिनेट मंत्री के आवास पर मिजोरम के पूर्व राज्यपाल कुम्मनमन राजशेखरन के साथ जटायू मंदिर निर्माण को लेकर हुई चर्चा।
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siddharthnath singh
- फोटो : amar ujala
विस्तार
सूबे के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि उत्तर भारत में अयोध्या का श्री राम मंदिर और अब दक्षिण भारत में जटायु मंदिर के निर्माण से देश में रामराज्य का सपना साकार होगा। कहा कि इस मंदिर का निर्माण केरल के कोल्लम में होगा। अयोध्या में श्रीराम मंदिर और कोल्लम में जटायू मंदिर का निर्माण होने से लोगों में आध्यात्मिक भावना भी जागृत होगी। सिद्धार्थ नाथ ने यह बातें शनिवार को अपने आवास में मिजोरम के पूर्व राज्यपाल कुम्मनमन राजशेखरन के साथ हुई वार्ता में कही।
राजापुर स्थित आवास पर सिद्धार्थ नाथ और पूर्व राज्यपाल के बीच जटायु मंदिर को लेकर चर्चा हुई। सिद्धार्थ नाथ ने कहा कि त्रेतायुग में जटायु ने बिना किसी व्यक्तिगत लाभ से रावण का मुकाबला किया और एक नारी के सम्मान और गौरव की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। वह स्थान "कोक्कोरणी" के नाम से जाना जाता है। वहां एक जलकुंड है।
उनकी मृत्यु के पश्चात भगवान राम ने जटायु का अंतिम संस्कार किया था। वहां भगवान श्रीराम ने एक पैर पर खड़े होकर जटायु को मोक्ष प्रदान किया था और आज भी इस स्थान पर प्रभु श्रीराम के एक पैर का पदचिन्ह है। उसी स्थान पर एक विशाल मंदिर बनाने का प्रयास शुरू हुआ है। इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल राजशेखरन ने कहा कि भगवान के पावन चरणों की ओर 501 सीढ़ियों की श्रृंखला बनाने का एक दिव्य प्रयास शुरू किया गया है। वहां जटायु जी के विशाल मंदिर की दिव्यता का स्वरूप देने की योजना है।
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गोशाला जाकर पूर्व राज्यपाल ने गायों को खिलाया गुड़
विश्व हिंदू परिषद द्वारा झूंसी में संचालित गोधाम का पूर्व राज्यपाल कुम्मनमन राजशेखर ने शनिवार को निरीक्षण किया। विहिप गौरक्षा के प्रांत मंत्री लालमणि तिवारी के साथ उन्होंने वहां गोवंशजों को अपने हाथ से गुड़ खिलाया। गोशाला के इंतजामों पर भी उन्होंने संतुष्टि जताई। इस दौरान उन्होंने वहां विहिप के अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल के चित्र पर पुष्प भी अर्पित किए। इस अवसर पर गोशाला प्रबंध समिति के हनुमान प्रसाद उपाध्याय, विवेक पांडेय आदि मौजूद रहे।
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राजापुर स्थित आवास पर सिद्धार्थ नाथ और पूर्व राज्यपाल के बीच जटायु मंदिर को लेकर चर्चा हुई। सिद्धार्थ नाथ ने कहा कि त्रेतायुग में जटायु ने बिना किसी व्यक्तिगत लाभ से रावण का मुकाबला किया और एक नारी के सम्मान और गौरव की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। वह स्थान "कोक्कोरणी" के नाम से जाना जाता है। वहां एक जलकुंड है।
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उनकी मृत्यु के पश्चात भगवान राम ने जटायु का अंतिम संस्कार किया था। वहां भगवान श्रीराम ने एक पैर पर खड़े होकर जटायु को मोक्ष प्रदान किया था और आज भी इस स्थान पर प्रभु श्रीराम के एक पैर का पदचिन्ह है। उसी स्थान पर एक विशाल मंदिर बनाने का प्रयास शुरू हुआ है। इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल राजशेखरन ने कहा कि भगवान के पावन चरणों की ओर 501 सीढ़ियों की श्रृंखला बनाने का एक दिव्य प्रयास शुरू किया गया है। वहां जटायु जी के विशाल मंदिर की दिव्यता का स्वरूप देने की योजना है।
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गोशाला जाकर पूर्व राज्यपाल ने गायों को खिलाया गुड़
विश्व हिंदू परिषद द्वारा झूंसी में संचालित गोधाम का पूर्व राज्यपाल कुम्मनमन राजशेखर ने शनिवार को निरीक्षण किया। विहिप गौरक्षा के प्रांत मंत्री लालमणि तिवारी के साथ उन्होंने वहां गोवंशजों को अपने हाथ से गुड़ खिलाया। गोशाला के इंतजामों पर भी उन्होंने संतुष्टि जताई। इस दौरान उन्होंने वहां विहिप के अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल के चित्र पर पुष्प भी अर्पित किए। इस अवसर पर गोशाला प्रबंध समिति के हनुमान प्रसाद उपाध्याय, विवेक पांडेय आदि मौजूद रहे।