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Prayagraj : जिला बदर हुआ तो जमानत तोड़वाकर जेल चला गया माइकल, पुलिस ने घर के बाहर बजवाई थी डुगडुगी

Mon, 11 Mar 2024 11:24 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 11 Mar 2024 11:24 AM IST
सार

पुलिस की सख्ती देखकर छात्रसंघ का महामंत्री रहे अभिषेक सिंह माइकल ने जेल में ही रहने में अपनी भलाई समझी। कुछ दिन पहले वह जमानत पर जेल से छूट चुका था। उसके खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की गई तो वह जमानत तुड़वाकर फिर जेल चला गया। 

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When the district changed, Michael broke the bail and went to jail
अभिषेक सिंह माइकल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कमिश्नरेट पुलिस की अपराधियों पर शिकंजा कसने की मुहिम का असर दिखने लगा है। ऐसे ही एक मामले में जिला बदर की कार्रवाई किए जाने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ का पूर्व महामंत्री अभिषेक सिंह माइकल जमानत तोड़वाकर पुराने मुकदमे में जेल चला गया। इससे कुछ दिनों पहले ही पुलिस ने उसके सलोरी स्थित आवास के बाहर डुगडुगी बजवाई थी।

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22 फरवरी को माइकल के खिलाफ पुलिस आयुक्त न्यायालय ने जिला बदर की कर्रवाई की थी। उसे छह महीने के लिए जिला बदर किए जाने का आदेश सुनाया था। सूत्रों का कहना है कि पुलिस जिला बदर किए जाने का नोटिस तामील कराने उसके सलोरी स्थित आवास पर पहुंची तो वह सामने नहीं आया। पुलिस को बताया गया कि वह घर पर नहीं है।
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बचने के लिए उसने नोटिस भी किसी अन्य व्यक्ति से रिसीव कराई थी। इस मामले में पुलिस ने उसके घर के बाहर डुगडुगी बजवाई थी। सूत्रों का कहना है कि शिकंजा कसता देख वह 2018 के एक पुराने मुकदमे में जमानत तोड़वाकर कोर्ट में आत्मसमर्पण कर जेल चला गया। कमिश्नरेट पुलिस की यह कार्रवाई खासा चर्चा में है।

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2020 में चालानी रिपोर्ट, तब से लंबित थी कार्रवाई

माइकल पर चार साल से कार्रवाई लंबित थी। अक्तूबर 2020 में कर्नलगंज पुलिस की चालानी रिपोर्ट पर अपर जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने उसके खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की थी। हालांकि इसके बाद आगे की काेई कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई नहीं किए जाने से अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठे। उधर संबंधित फाइल पुलिस आयुक्त रमित शर्मा के न्यायालय में पहुंची तो उन्होंने मामला संज्ञान में लिया। इसके बाद पिछले साल नवंबर में नोटिस जारी कर माइकल को कोर्ट में तलब किया गया।

यह था पूरा मामला

मूलरूप से बिहार के कैमूर भभुआं, सिकरी निवासी माइकल के खिलाफ मारपीट, धमकी, जानलेवा हमला समेत 18 मु़कदमे दर्ज हैं। 2012 में छात्रनेता अभिषेक सिंह सोनू पर जानलेवा हमले के मामले में 10 साल की सजा भी सुनाई जा चुकी है। इस मुकदमे में वह जमानत पर था। छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अभिषेक सिंह सोनू व महामंत्री पद पर चुनाव लड़ रहे माइकल के बीच होर्डिंग लगाने को लेकर हुए विवाद में उसने सरेआम गोलियां चलाई थीं। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और जेल में रहते हुए ही उसने चुनाव जीता था।

माइकल समेत चार पर घोषित हुआ था इनाम

2019 में इविवि छात्रसंघ चुनाव के दौरान माइकल समेत चार आपराधिक छवि वाले छात्रनेताओं पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया गया था। इसमें माइकल के अलावा अभिषेक सिंह सोनू, सुमित शुक्ला, अजीत यादव व आकाश सिंह शामिल थे। इनमें से सुमित शुक्ला की पीसीबी हॉस्टल में गाेली मारकर हत्या की जा चुकी है।

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