{"_id":"5e8a38188ebc3e78c10f1a98","slug":"we-are-unable-to-meet-our-loved-ones-in-the-last-journey-only-a-few-people-are-involved-in-the-funeral","type":"story","status":"publish","title_hn":"आखिरी सफर में नहीं मिल पा रहा है अपनों का साथ, शवयात्रा में चंद लोग ही हो रहे शामिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आखिरी सफर में नहीं मिल पा रहा है अपनों का साथ, शवयात्रा में चंद लोग ही हो रहे शामिल
Mon, 06 Apr 2020 01:27 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 06 Apr 2020 01:27 AM IST
विज्ञापन
लालगंज क्षेत्र के शिवपुर गंगा घाट पर बने अंत्येष्ठि स्थल पर खड़े जानवर
देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण हुए लॉक डाउन का असर यह है कि निधन के बाद अभागे लोगों को अंतिम सफर पर अपनों का साथ भी नहीं मिल पा रहा है। झूंसी के श्मशान घाटों पर पिछले दस दिनों से ही यही स्थिति बनी हुई है। झूंसी और हनुमानगंज के साथ ही जौनपुर व बादशाहपुर से निधन के बाद शव को लेकर गिनती भर लोग अंतिम संस्कार करने को घाट पर पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
लॉक डाउन के कारण पखवारे भर से सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग अपने घरों में कैद हैं। कोरोना वायरस के लगातार बढ़ रहे मरीजों के कारण शहर के शहर सील किए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा अभागे तो वो लोग हैं जिनकी मृत्यु लॉक डाउन के दौरान हो रही है। ऐसे लोगों को अंतिम सफर पर अपनों का साथ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे लोगों के दूसरे शहरों में रहने वाले रिश्तेदार तो दूर शहर में रहने वाले रिश्तेदार भी अंतिम दर्शन को नहीं पहुंच पा रहे हैं।
विज्ञापन
गांव या फिर मोहल्ले के गिने-चुने लोग शव को लेकर झूंसी केछतनाग और नई झूंसी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार करने को पहुंच रहे हैं। पिछले दस दिनों से छतनाग और नई झूंसी श्मशान घाट पर यही स्थिति बनी हुई है। सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करने को लोगों का ऐसा करना मजबूरी भी बन चुकी है। पिछले दस दिनों में छतनाग घाट पर अंतिम संस्कार करने पहुंचे कुछ शवों को तो चार लोगों के कंधे तक नसीब नहीं हो पाए हैं। ग्रामीण पिकप पर शव को लेकर श्मशान घाट पहुंचे और अंतिम संस्कार किया।
विज्ञापन