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कानपुर में आईपीएल के आयोजन का रास्ता साफ
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 17 May 2016 02:30 AM IST
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कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में आईपीएल मैच के आयोजन का रास्ता लगभग साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने मैच का आयोजन रोकने की मांग नामंजूर करते हुए कानपुर के गिरीराज किशोर की याचिका खारिज कर दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति आरएन कक्कड़ की खंडपीठ ने सुनवाई की।
मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय और अनुराग श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि आईपीएल के आयोजन में पानी का कोई इस्तेमाल नहीं है। पानी की आवश्यकता मैदान को हरा बनाए रखने के लिए होती है, इसलिए छिड़काव पूरे साल होता है। मैच से दो दिन पूर्व पानी का छिड़काव बंद हो जाता है। कानपुर शहर में प्रतिदिन 420 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है, जबकि मैदान पर छिड़काव के लिए मात्र कुछ सौ लीटर पानी लगता है। छिड़काव के लिए स्टेडियम की अपनी व्यवस्था है। सबमर्सिबल पंप के जरिए पानी निकाला जाता है। मैच के आयोजन हेतु अलग से पानी की आवश्यकता नहीं है।
वहीं याची का कहना था कि ऐसे समय में जब प्रदेश सूखे की चपेट में है और पानी का घोर संकट है। मैच के आयोजन पर हजारों लीटर पानी खर्च करना पानी की बर्बादी है। बांबे हाईकोर्ट ने इसी वजह से महराष्ट्र में आईपीएल के आयोजन पर रोक लगा दी है। यूपी में भी महराष्ट्र जैसे हालात हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षोें की दलील सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी है।
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मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय और अनुराग श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि आईपीएल के आयोजन में पानी का कोई इस्तेमाल नहीं है। पानी की आवश्यकता मैदान को हरा बनाए रखने के लिए होती है, इसलिए छिड़काव पूरे साल होता है। मैच से दो दिन पूर्व पानी का छिड़काव बंद हो जाता है। कानपुर शहर में प्रतिदिन 420 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है, जबकि मैदान पर छिड़काव के लिए मात्र कुछ सौ लीटर पानी लगता है। छिड़काव के लिए स्टेडियम की अपनी व्यवस्था है। सबमर्सिबल पंप के जरिए पानी निकाला जाता है। मैच के आयोजन हेतु अलग से पानी की आवश्यकता नहीं है।
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वहीं याची का कहना था कि ऐसे समय में जब प्रदेश सूखे की चपेट में है और पानी का घोर संकट है। मैच के आयोजन पर हजारों लीटर पानी खर्च करना पानी की बर्बादी है। बांबे हाईकोर्ट ने इसी वजह से महराष्ट्र में आईपीएल के आयोजन पर रोक लगा दी है। यूपी में भी महराष्ट्र जैसे हालात हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षोें की दलील सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी है।
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