फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   water problem increases

सूरज के तेवर से सूखने लगा धरती का कलेजा

Tue, 12 Apr 2016 02:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 12 Apr 2016 02:52 AM IST
विज्ञापन
water problem increases
पानी की टंकी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
सूरज के तीखे तेवरों के बीच गर्मी बढ़ने के साथ शहर में पेयजल का संकट बढ़ने लगा है। इसका बड़ा कारण भूजल का बेतहाशा दोहन है। इसकी वजह से कई मोहल्लों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। जिसका असर ट्यूबवेलों पर दिखने लगा है, इनसे पानी बेहद काम मात्रा में निकल रहा है। नतीजा है कि शहर के किसी न किसी हिस्से में आए दिन लोग पेयजल के लिए परेशान हो रहे हैं। यह हाल तब है जब शहर में बेहतर पेयजल व्यवस्था के लिए जवाहर लाल नेहरू अरबन रिन्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) में करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इस रकम विभिन्न हिस्सों में 33 ओवरहेड टैंक बनाए गए। शहर उत्तरी, दक्षिणी एवं पश्चिमी में 38 बड़े ट्यूबवेलों की स्थापना हुई। इसके साथ पानी छोड़ चुके 18 पुराने ट्यूबवेलों को रीबोर किया गया लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ पेयजल की समस्या गंभीर होनी लगी है।
विज्ञापन


शहर की 16 लाख से अधिक की आबादी के लिए प्रतिदिन 252 एमएलडी (25.20 करोड़ लीटर) पानी की आपूर्ति होती है। इसके लिए 243 बड़े ट्यूबवेल तथा 257 मिनी ट्यूबवेल हैं। इसके अलावा यमुना से 70 एमएलडी पानी आता है। इस पानी को घरों तक पहुंचाने के लिए वर्तमान में नए पुराने मिलाकर 45 ओवरहेड टैंक हैं। जेएनएनयूआरएम के तहत करेली, अल्लापुर, चकिया, कटरा, तेलियरगंज, अशोक नगर, मम्फोर्डगंज सहित अन्य इलाकों में 33 टंकियां बनवाई गईं, ताकि लोगों को ट्यूबवेल के बजाए टंकियों से जलापूर्ति की जा सके लेकिन इनमें से ज्यादातर टंकियां पूरी क्षमता से नहीं चल रहीं। करेली, कालिंदीपुरम, अल्लापुर हैजा अस्पताल, कटरा, ममफोर्डगंज में टंकी से आपूर्ति होने के कुछ देर बाद ही पानी खत्म हो जाता है, क्योंकि टंकियां पूरी तरह भर ही नहीं पाती। इसका कारण भूजल स्तर का लगातार घटना है। ट्यूबवेल से ही टंकियां भरी जाती हैं, लेकिन  भूजल स्तर नीचे जाने के कारण ट्यूबवेलों से पूरी क्षमता से पानी नहीं निकल रहा।
विज्ञापन


भूजल के लगातार दोहन के कारण स्थिति लगातार गंभीर हो रही है। जलकल विभाग के पास घरों में निजी बोरिंग के आंकड़े नहीं हैं, लेकिन विभाग का अनुमान है कि शहर में 22 हजार से अधिक घरों में बोरिंग है। इसकेअलावा सभी बहुमंजिला अपार्टमेंट्स, बड़े व्यावसायिक भवनों में भी बोरिंग है। इस पर रोक लगाने के लिए अब तक कोई नियम नहीं बना है। नतीजा है कि पानी की बर्बादी पर रोक नहीं लग रही।
विज्ञापन
विज्ञापन


ट्यूबवेल छोड़ने लगे पानी
भूजल स्तर नीचे जाने से ट्यूबवेल चलना मुश्किल होने लगा है। इसी की वजह से कर्नलगंज और कचहरी के पास लगे ट्यूबवेल बंद हो चुके हैं। विभिन्न इलाकों में आधा दर्जन से अधिक ट्यूबवेलों में पाइप की संख्या बढ़ाई गई, ताकि लोगों को पानी उपलब्ध कराया जा सके। जमीन के नीचे ज्यादा गहराई तक पाइप ले जाने के कारण पांच से 10 फीसदी काम पानी निकल रहा है।

न चेते तो खतरनाक होगी स्थिति
गर्मी में पानी की बर्बादी को लेकर शहरी न चेते को आने वाले दिनों में स्थिति और खतरनाक होगी। सबसे ज्यादा पानी की बर्बादी गाड़ियों की सफाई और घरों के सामने पटरी, सड़क पर बेवजह धुलाई में होती है। दोपहिया और चारपहिया वाहन धोने के लिए लोग पाइप लगाकर बेतहाशा पानी बहाते हैं, जबकि यह काम एक-दो बाल्टी पानी में भी हो सकता है। इसके अलावा ड्राईवॉश के जरिए भी कारों को बिना पानी की बर्बादी के साफ किया जा सकता है। हालांकि ड्राईवॉश तकनीक अभी सिर्फ ग्रीनलैंड मोटर्स में है। इसके जरिए एक गन में केमिकल भरा जाता है, जो झाग के रूप में निकलकर कार को साफ करता है। पानी की बर्बादी रोकने के लिए ड्राईवॉश के अधिक से अधिक इस्तेमाल की जरूरत है।

रोज बर्बाद होता है 40 एमएलडी पानी
जलकल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कुल सप्लाई 252 एमएलडी में से 40 प्रतिशत (नॉन रेवेन्यू वाटर के रूप में) यानी 100.8 एमएलडी पानी रोज बर्बाद हो जाता है। घरों में बिना कारण बह रहे पानी, पाइप लाइनों में लीकेज, खुले सार्वजनिक नलों से बह कर बेकार हो जा रहा है। शासन ने नॉन रेवेन्यू वाटर की मात्रा को 15-20 प्रतिशत तक सीमित करने का निर्देश दिया। इसके लिए जलकल विभागों को केंद्र सरकार से निर्धारित मानक के तहत पेयजल प्रणाली में आवश्यक सुधार करने को कहा गया है। शासन के निर्देश के बावजूद पानी की बर्बादी नहीं रुक रही है।


‘गर्मी में पेयजल संकट न हो, इसके लिए तैयारी की गई है। दर्जनभर से अधिक ट्यूबेवलों को रीबोर किया गया है, जबकि आठ से 10 ट्यूबवेलों में और गहराई तक पाइप लगाए गए हैं। आने वाले दिनों में समस्या बढ़ सकती है। इसलिए लोग पानी की बर्बादी न करें और बहुत संभाल कर इस्तेमाल करें।’आरपीएस सलूजा, महाप्रबंधक, जलकल विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed