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वोटर आईकार्ड के लिए दो कंपनियों को ठेका
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 25 Jun 2016 01:10 AM IST
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मतदाता
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वोटर रजिस्ट्रेशन कराने के बावजूद मतदाता डेढ़ साल से वोटर आईकार्ड के लिए इंतजार कर रहे हैं। वोटर आईकार्ड को लेकर इतनी बदतर व्यवस्था पहली बार सामने आई है। कभी सर्वर जल जा रहा है तो कभी निर्वाचन आयोग से उस सॉफ्टवेयर को लॉक कर दिया जा रहा है, जिसके जरिये वोटर आईकार्ड ऑनलाइन बनाए जाते हैं। अब आयोग ने प्रदेश में दो कंपनियों कार्ड बनाने का ठेका दिया है। हालांकि इसके बाद भी वोटरों को कम से कम एक माह तक इंतजार करना पड़ सकता है।
इलाहाबाद में ही तकरीबन 44 हजार ऐसे मतदाता हैं, जिन्होंने डेढ़ साल पहले अपना वोटर रजिस्ट्रेशन कराया था। वोटर लिस्ट में उनका नाम तो जुड़ गया लेकिन वोटर आईकार्ड नहीं मिला। तब से वोटर तहसीलों और जिला निर्वाचन कार्यालय के चक्कर लगा रहा है। इस दौरान 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया। सिर्फ जिले में ही मतदाताओं को जागरूक करने के नाम इस उपलक्ष्य में लाखों रुपये खर्च कर दिए गए लेकिन निर्वाचन आयोग यह भूल गया कि जब वोटरों के पास आईकार्ड ही नहीं होगा तो उन्हें मतदान के प्रति जागरूक करने का क्या फायदा। कुछ दिनों पहले सूचना आई कि सेंट्रल सर्वर जल गया है, सो वोटर आईकार्ड के लिए वोटरों को इंतजार करना पड़ेगा।
सर्वर की मरम्मत में ही महीनों बीत गए। उससे पहले निर्वाचन आयोग ने उस सॉफ्टवेयर को ही लॉक कर रखा था, जिसके जरिये ऑनलाइन वोटर आईकार्ड बनाए जाते हैं। इस बारे में सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी केके बाजपेयी का कहना है कि मतदाताओं को वोटर आईकार्ड के लिए ज्यादा दिनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वोटर आईकार्ड बनाने का ठेका एमटेक पुणे और चेन्नई नाम की दो कंपनियों को दे दिया गया है। जल्द ही कार्ड बन जाएंगे और वितरित कर दिए जाएंगे।
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इलाहाबाद में ही तकरीबन 44 हजार ऐसे मतदाता हैं, जिन्होंने डेढ़ साल पहले अपना वोटर रजिस्ट्रेशन कराया था। वोटर लिस्ट में उनका नाम तो जुड़ गया लेकिन वोटर आईकार्ड नहीं मिला। तब से वोटर तहसीलों और जिला निर्वाचन कार्यालय के चक्कर लगा रहा है। इस दौरान 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया। सिर्फ जिले में ही मतदाताओं को जागरूक करने के नाम इस उपलक्ष्य में लाखों रुपये खर्च कर दिए गए लेकिन निर्वाचन आयोग यह भूल गया कि जब वोटरों के पास आईकार्ड ही नहीं होगा तो उन्हें मतदान के प्रति जागरूक करने का क्या फायदा। कुछ दिनों पहले सूचना आई कि सेंट्रल सर्वर जल गया है, सो वोटर आईकार्ड के लिए वोटरों को इंतजार करना पड़ेगा।
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सर्वर की मरम्मत में ही महीनों बीत गए। उससे पहले निर्वाचन आयोग ने उस सॉफ्टवेयर को ही लॉक कर रखा था, जिसके जरिये ऑनलाइन वोटर आईकार्ड बनाए जाते हैं। इस बारे में सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी केके बाजपेयी का कहना है कि मतदाताओं को वोटर आईकार्ड के लिए ज्यादा दिनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वोटर आईकार्ड बनाने का ठेका एमटेक पुणे और चेन्नई नाम की दो कंपनियों को दे दिया गया है। जल्द ही कार्ड बन जाएंगे और वितरित कर दिए जाएंगे।
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