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विवेकानंद हत्याकांड में आठ साल बाद नया खुलासा 

Wed, 14 Sep 2016 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 14 Sep 2016 01:31 AM IST
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बहरिया (इलाहाबाद)। आठ साल पहले हुए चर्चित विवेकानंद हत्याकांड की फाइल फिर खोल दी गई है। इस मामले में पहले गिरफ्तार कर पुलिस ने आठ लोगों को जेल भेजा था। जमानत पर छूटे एक आरोपी ने आईजी जोन से मिलकर असली कातिल से जुड़ी वीडियो रिकार्डिंग दी, जिसकी जांच के बाद बहरिया पुलिस ने मंगलवार को नया खुलासा करते हुए कथित असली कातिल को गिरफ्तार कर लिया। उसे जेल भेज दिया गया है। हालांकि इस नए खुलासे से मारे गए विवेकानंद के परिवार के लोग संतुष्ट नहीं है जबकि गिरफ्तार व्यक्ति के परिजन भी कह रहे हैं कि उसे फंसाया गया है। 
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तुलापुर गांव निवासी कांग्रेसी नेता मुनीशानंद मिश्र के बड़े भाई विवेकानंद मिश्र की छह जून 2008 की रात घर जाते वक्त रास्ते में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मुनीशानंद की तहरीर पर मऊआइमा क्षेत्र के घुरीपुर निवासी जितेंद्र तिवारी, नागेंद्र तिवारी, बहरिया क्षेत्र के सिंकदरा निवासी पुरुषोत्तम, नरोत्तम, प्रभात, प्रशांत, सुरेश दिनेश के खिलाफ हत्या का मुकदमा लिखा गया था। पुलिस ने इन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सभी आरोपी जमानत पर रिहा हैं। मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है। एक नामजद आरोपी जितेंद्र तिवारी ने तीन फरवरी को आईजी जोन से मिलकर एक शपथ पत्र के साथ दो सीडी और एक पेन ड्राइव सौंपी। जितेंद्र ने शपथपत्र में बताया कि विवेकानंद के असली कातिल को नामजद नहीं किया गया और पुलिस ने भी जांच में सच्चाई नहीं उजागर की। वीडीओ रिकार्डिंग में विवेकानंद का असली कातिल अपना जुर्म कबूलता दिखा है। जितेंद्र तिवारी ने नवीन तथ्यों के आधार पर अग्रिम विवेचना की मांग की। आईजी ने एसएसपी के माध्यम से सीओ फूलपर से नवीन तथ्यों की जांच कराने के बाद थानाध्यक्ष बहरिया को अग्रिम विवेचना का आदेश दिया। वीडियो रिकार्डिंग को आधार बनाते हुए बहरिया निरीक्षक कौशल कुमार यादव ने तुलापुर निवासी विजय मिश्र पुत्र श्यामजी मिश्र को गिरफ्तार कर लिया। उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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पीड़ित परिवार को खुलासे पर ऐतराज
 हालांकि गिरफ्तार आरोपी विजय मिश्र और उसके परिजनों का कहना है कि धमकी देकर यह वीडियो रिकार्डिंग की गई है। पुलिस की मिलीभगत से उसे झूठा फंसाया जा रहा है। उधर भाई के कत्ल का केस लिखाने वाले मुनीशानंद ने भी आरोप लगाया है कि सजा से बचने के लिए आरोपियों द्वारा षड्यंत्र किया गया है।
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