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कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने कहा : कार्टूनिस्ट की सृजनशीलता अद्भुत, एकांत के क्षणों में करती है मनोरंजन
Sat, 17 Feb 2024 04:31 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 17 Feb 2024 04:31 PM IST
सार
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग एवं केंद्रीय सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को साहित्यकार और कार्टूनिस्ट स्व. शिक्षार्थी जी की स्मृति में कार्यशाला, कार्टून चित्र प्रदर्शनी, पुस्तक विमोचन व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
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इविवि के दृश्य कला विभाग में स्व. शिक्षार्थी स्मृति कार्टून चित्र की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कार्टूनिस्ट की सृजनशीलता अद्भुत होती है। वह एकांत के क्षणों में आपका मनोरंजन करती है। साथ ही देश और दुनिया के बारे में चल रही घटनाओं पर व्यंग्य के जरिए प्रकाश भी डालती है। मैं आज भी एकांत में टॉम एंड जेरी के कार्टून देखती हूं। कार्टून ने तो बच्चों को बहुत कुछ सिखाया है। पोपेई नाम के कार्टून ने बच्चों को पालक खाना सिखा दिया। ये बातें इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने दृश्य कला विभाग में स्व. शिक्षार्थी स्मृति कार्टून चित्र की प्रदर्शनी में कहीं।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग एवं केंद्रीय सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को साहित्यकार और कार्टूनिस्ट स्व. शिक्षार्थी जी की स्मृति में कार्यशाला, कार्टून चित्र प्रदर्शनी, पुस्तक विमोचन व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने किया। मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट पत्रकार ,पर्यावरणविद् और नाटककार आबिद सुरती रहे। जिनके बनाए गए कार्टून और चरित्र भी प्रदर्शनी में शामिल थे। यह कार्टून दृश्यकला विभाग में आयोजित कार्यशाला के दौरान निर्मित हुआ था।
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आबिद सुरती ने कहा कि मैं दृश्य कला विभाग की यह प्रदर्शनी देखकर अभिभूत हूं। मैंने बहुत प्रदर्शनियों का उद्घाटन देखा है, लेकिन यह अभूतपूर्व है। प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने व्यंग्य चित्रों की संदेश देने की ताकत के बारे में बात की। कहा कि इस सृजनशीलता से वह कुछ सीखें। धर्मयुग के दिनों को याद करते हुए कहा कि वह ढब्बू जी के कारण पत्रिका का पिछला पन्ना पहले पढ़ती थीं। कार्यक्रम में स्व. शिक्षार्थी की कार्टून पुस्तिका का विमोचन भी हुआ।
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दृश्य कला विभाग और सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष प्रो. अजय जेटली ने कहा कि आज की प्रदर्शनी और कार्यक्रम देख कर उन्हें संतोष हो रहा है कि वह विभाग को जिस तरह सजाने का सपना देख रहे थे वह साकार होता लगा रहा है। इस मौके पर कुलसचिव प्रो. एनके शुक्ला, प्रो. संजय सक्सेना, प्रो. जया कपूर चड्ढा, प्रो. बेचन शर्मा, प्रो. केएन. उत्तम, प्रो. अनुपम पांडेय, प्रो. शबनम हमीद, प्रो. अनीता गोपेश के साथ शिक्षार्थी परिवार से भावना शिक्षार्थी, अनुभव शिक्षार्थी आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अमितेश कुमार ने किया।
स्वागत वक्तव्य मोना अग्निहोत्री ने दिया। धन्यवाद विशाल जैन ने ज्ञापित किया। केंद्रीय सांस्कृतिक समिति के सदस्यों अमित सिंह, विशाल विजय, अमृता, के साथ दृश्य कला विभाग के अध्यापक सचिन, शौमिक के साथ शोधार्थी और छात्र भी अच्छी संख्या में मौजूद थे। 18 फरवरी 2024 को दूसरे दिन 'पर्यावरण, साहित्य, कार्टून और रंग कर्म की दुनिया' विषय पर श्री आबिद सुरती का व्याख्यान होगा। वरिष्ठ साहित्यकार एवं समालोचक प्रो.राजेंद्र कुमार कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। कार्टून प्रदर्शनी 17, 18 और 19 को विभाग में देखी जा सकती है।