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कुलपति ने रजिस्ट्रार से छीना काम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 05 Jun 2018 12:49 AM IST
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Allahabad University
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव से कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने काम छीन लिया है और अंतरिम रूप से यह जिम्मेदारी परीक्षा नियंत्रक प्रो. एचएस उपाध्याय को सौंप दी है। प्रो. उपाध्याय ने भी बिना देर किए सोमवार को ही रजिस्ट्रार पद का अतिरिक्त चार्ज संभाल लिया। सोमवार सुबह आदेश जारी होते ही विश्वविद्यालय में खलबली मच गई।
कुलपति ने इविवि के ऑर्डिनेंस का हवाला देते हुए कर्नल हितेश लव से रजिस्ट्रार का काम तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। कुलपति ने अपने आदेश में परीक्षा नियंत्रक एवं प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. एचएस उपाध्याय को अंतरिम रूप से रजिस्ट्रार का कार्यभार करने को कहा। प्रो. उपाध्याय ने बिना देर किए रजिस्ट्रार पद का कार्यभार संभाल लिया। इविवि को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी कुलपति ने रजिस्ट्रार से पद की जिम्मेदारी वापस ली हो। सेना से रिटायर कर्नल हितेश लव ने सात माह पहले ही इविवि के रजिस्ट्रार पद की जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने कुछ दिनों पहले ही आशंका जता दी थी कि शिक्षकों की एक मंडली उन्हें पद से हटाने की साजिश कर रही है। उन्होंने एडीजी समेत आईजी, एसएसपी, डीएम को भी पत्र भेजकर बताया था कि उन्हें नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालय से जाने की धमकी दी गई है। पत्र में यह भी लिखा था कि विश्वविद्यालय के ही कुछ लोग उन्हें पद से हटवाने की साजिश कर रहे हैं ताकि वे प्रशासनिक निर्णयों में अपनी मनमानी कर सकें।
इविवि प्रशासन ने रजिस्ट्रार को हटाए जाने का कारण तो स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन चर्चा यही है कि कुलपति रजिस्ट्रार से कह रहे थे कि कार्यपरिषद की बैठक की तिथि तय करें, जबकि रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव का कहना था कि पहले बैठक का एजेंडा उपलब्ध कराया जाए, उसके बाद तिथि निर्धारित कर देंगे। चर्चा यह भी है कि जून-जुलाई में विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की भर्ती होनी है। इसके लिए विश्वविद्यालय के कुछ लोगों ने लंबा लेनदेन कर रखा है और रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव इसमें बाधा बन रहे थे।
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मैंने पहले ही पद से हटाए जाने की आशंका जताई थी और कहा था कि कुछ लोग मेरे खिलाफ साजिश कर रहे हैं। यह आदेश आने बाद साफ हो गया कि साजिशकर्ता कौन लोग हैं और उनके पीछे किसका हाथ है। - कर्नल हितेश लव, रजिस्ट्रार
इविवि के परीक्षा नियंत्रक और प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. एचएस उपाध्याय ने कार्यभार संभालते ही कामकाम शुरू कर दिया। सबसे पहले उन्होंने कार्य परिषद की बैठक की तिथि निर्धारित की। कार्य परिषद की बैठक के लिए 17 जून की तिथि निर्धारित की गई है।
इविवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री रोहित मिश्र ने आरोप लगाया है कि कुलपति विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की भर्ती में मनमानी करना चाहते हैं। कर्नल हितेश लव इसमें बाधा बन रहे थे, सो उनसे रजिस्ट्रार का काम वापस ले लिया गया। वैसे भी पिछले दिनों यहां आई यूजीसी की टीम यह कह गई है कि प्रोफेसर का काम केवल पढ़ाना है, उन्हें दूसरे कार्यों में संलिप्त न किया जाए। इसके बावजूद एक प्रोफेसर को परीक्षा नियंत्रक, प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक के साथ रजिस्ट्रार पद की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। एबीवीपी इसका विरोध करती है। अगर हितेश लव को रजिस्ट्रार पद का चार्ज वापस नहीं दिया गया तो आगे होने वाले आंदोलन की जिम्मेदारी कुलपति की होगी।
कर्नल हितेश लव से रजिस्ट्रार का काम वापस लिए जाने के कुलपति के निर्णय का ऑक्टा ने स्वागत किया है। ऑक्टा के पदाधिकारियों का आरोप है कि रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव ने अपने सात माह के कार्यकाल में केवल कार्यों में बाधा डालने का काम किया। इसी वजह से चतुर्थ एवं तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्तियां नहीं हो सकीं। ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. सुनीलकांत मिश्र, महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह एवं अन्य पदाधिकारियों ने नए रजिस्ट्रार प्रो. एचएस उपाध्याय से मिलकर उन्हें बधाई दी।
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कुलपति ने इविवि के ऑर्डिनेंस का हवाला देते हुए कर्नल हितेश लव से रजिस्ट्रार का काम तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। कुलपति ने अपने आदेश में परीक्षा नियंत्रक एवं प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. एचएस उपाध्याय को अंतरिम रूप से रजिस्ट्रार का कार्यभार करने को कहा। प्रो. उपाध्याय ने बिना देर किए रजिस्ट्रार पद का कार्यभार संभाल लिया। इविवि को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी कुलपति ने रजिस्ट्रार से पद की जिम्मेदारी वापस ली हो। सेना से रिटायर कर्नल हितेश लव ने सात माह पहले ही इविवि के रजिस्ट्रार पद की जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने कुछ दिनों पहले ही आशंका जता दी थी कि शिक्षकों की एक मंडली उन्हें पद से हटाने की साजिश कर रही है। उन्होंने एडीजी समेत आईजी, एसएसपी, डीएम को भी पत्र भेजकर बताया था कि उन्हें नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालय से जाने की धमकी दी गई है। पत्र में यह भी लिखा था कि विश्वविद्यालय के ही कुछ लोग उन्हें पद से हटवाने की साजिश कर रहे हैं ताकि वे प्रशासनिक निर्णयों में अपनी मनमानी कर सकें।
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इविवि प्रशासन ने रजिस्ट्रार को हटाए जाने का कारण तो स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन चर्चा यही है कि कुलपति रजिस्ट्रार से कह रहे थे कि कार्यपरिषद की बैठक की तिथि तय करें, जबकि रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव का कहना था कि पहले बैठक का एजेंडा उपलब्ध कराया जाए, उसके बाद तिथि निर्धारित कर देंगे। चर्चा यह भी है कि जून-जुलाई में विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की भर्ती होनी है। इसके लिए विश्वविद्यालय के कुछ लोगों ने लंबा लेनदेन कर रखा है और रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव इसमें बाधा बन रहे थे।
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मैंने पहले ही पद से हटाए जाने की आशंका जताई थी और कहा था कि कुछ लोग मेरे खिलाफ साजिश कर रहे हैं। यह आदेश आने बाद साफ हो गया कि साजिशकर्ता कौन लोग हैं और उनके पीछे किसका हाथ है। - कर्नल हितेश लव, रजिस्ट्रार
इविवि के परीक्षा नियंत्रक और प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. एचएस उपाध्याय ने कार्यभार संभालते ही कामकाम शुरू कर दिया। सबसे पहले उन्होंने कार्य परिषद की बैठक की तिथि निर्धारित की। कार्य परिषद की बैठक के लिए 17 जून की तिथि निर्धारित की गई है।
इविवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री रोहित मिश्र ने आरोप लगाया है कि कुलपति विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की भर्ती में मनमानी करना चाहते हैं। कर्नल हितेश लव इसमें बाधा बन रहे थे, सो उनसे रजिस्ट्रार का काम वापस ले लिया गया। वैसे भी पिछले दिनों यहां आई यूजीसी की टीम यह कह गई है कि प्रोफेसर का काम केवल पढ़ाना है, उन्हें दूसरे कार्यों में संलिप्त न किया जाए। इसके बावजूद एक प्रोफेसर को परीक्षा नियंत्रक, प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक के साथ रजिस्ट्रार पद की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। एबीवीपी इसका विरोध करती है। अगर हितेश लव को रजिस्ट्रार पद का चार्ज वापस नहीं दिया गया तो आगे होने वाले आंदोलन की जिम्मेदारी कुलपति की होगी।
कर्नल हितेश लव से रजिस्ट्रार का काम वापस लिए जाने के कुलपति के निर्णय का ऑक्टा ने स्वागत किया है। ऑक्टा के पदाधिकारियों का आरोप है कि रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव ने अपने सात माह के कार्यकाल में केवल कार्यों में बाधा डालने का काम किया। इसी वजह से चतुर्थ एवं तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्तियां नहीं हो सकीं। ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. सुनीलकांत मिश्र, महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह एवं अन्य पदाधिकारियों ने नए रजिस्ट्रार प्रो. एचएस उपाध्याय से मिलकर उन्हें बधाई दी।