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विहिप ने कहा, चैत्र नवरात्र और हनुमान जयंती के बीच शुरू हो मंदिर निर्माण 

Wed, 22 Jan 2020 02:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 22 Jan 2020 02:16 AM IST
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VHP said temple construction to begin between Chaitra Navratri and Hanuman Jayanti
विहिप सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला

विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित विराट संत सम्मेलन में राम मंदिर निर्माण और नागरिकता संशोधन कानून छाया रहा। श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती समेत सैकड़ों संतों की मौजूदगी में विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करने का उपयुक्त समय 25 मार्च से आठ अप्रैल 2020 तक है, क्योंकि 25 मार्च से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहा है और आठ अप्रैल को हनुमान जयंती है। 

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संतों की इच्छा है कि इस तिथि के बीच मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाए। इसके अलावा संतों के अनुमोदन के बाद विहिप ने जो मॉडल राममंदिर का बनाया है उसी मॉडल को सरकार अपनाए। 
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माघ मेला के परेड ग्राउंड स्थित विहिप के शिविर में आयोजित संत सम्मेलन में प्रस्तावना पेश कर रहे कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि सीएए का समर्थन सभी संत कर रहे हैं। संतों ने तय किया है कि वह इसके लिए गांव-गांव जाकर जनजागरण करेंगे।
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 देश में कोई भी राज्य सीएए को लागू होने से नहीं रोक सकता है। अगर कुछ राज्य सरकारें इसमें अड़चन लगाएंगी तो संत अपने यहां शिविर लगाकर बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए शरणार्थियों से नागरिकता फार्म भरवाएंगे। 

राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर कहा कि इसकी घोषणा नौ फरवरी 2020 के पहले किसी भी दिन हो सकती है। संत और विहिप केंद्र सरकार की प्रकृति जानते हैं। इस ट्रस्ट में केंद्र, राज्य सरकार के साथ निर्मोही अखाड़े का तो प्रतिनिधित्व होना ही है, साथ ही जिन लोगों ने राम मंदिर आंदोलन की लड़ाई लड़ी है, उन्हें भी ट्रस्ट में शामिल किए जाए। 

कार्यकारी अध्यक्ष की इस बात का सभी संतों ने समर्थन भी किया। इस दौरान श्री रामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि जो मॉडल 30 वर्ष पूर्व प्रयागराज कुंभ 1989 में रखा गया और उस मॉडल के आधार पर 60 प्रतिशत पत्थर तराश कर तैयार है, उसी मॉडल पर मंदिर बनना चाहिए। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने सीएए, एक देश एक विधान एवं विहिप केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के अन्य सभी प्रस्तावों का सभी अखाड़ों की ओर से समर्थन किया ।


हमारे मॉडल पर बने मंदिर, अन्यथा नहीं जाऊंगा अयोध्या
संत सम्मेलन में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि अगर राम जन्मभूमि न्यास और आंदोलन में हिस्सा लेने वाले संतों को भव्य मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी नहीं मिली तो वह न कभी अयोध्या जाएंगे और न ही सरयू स्नान करेंगे। उन्होंने सीएए को लेकर कहा कि अब भारत 1947 वाला नहीं है। अब भारत 2020 का है। अब वह लोग सोचें (पाकिस्तान) कि उनका सिंध और बलूचिस्तान कैसे बचेगा। पीओके को हमारे वीर जवान किसी भी दिन ले सकते हैं। सरकार सीएए पर किसी भी तरह का बदलाव न करे।

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