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वाराणसी सिकरौरा नरसंहार : पीड़ित पक्ष ने कहा- घटना में घायल की गवाही को भी ट्रायल कोर्ट ने किया नजर अंदाज

Thu, 02 Nov 2023 12:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 02 Nov 2023 12:45 PM IST
सार

घटना 37 साल पुरानी है। 1987 में तत्कालीन जिला क्षेत्र वाराणसी के बलुआ थानांतर्गत सिकरौरा कांड में याची हीरावती के पति, दो देवर और तीन पुत्रों की हत्या कर दी गई थी। इसमें माफिया बृजेश सिंह सहित कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

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Varanasi Sikraura Massacre victim's side said - trial court ignored the testimony of injured
माफिया बृजेश सिंह। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही वाराणसी के सिकरौरा कांड मामले में बुधवार को याची पक्ष की ओर से दलीलें पूरी हो गईं। याची पक्ष की ओर से कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने घटना में घायल/पीड़ित के बयान को भी नजर अंदाज किया। ट्रायल कोर्ट ने अगर घायल के बयान पर भी विचार किया होता तो आरोपियों को बरी न करती। हीरावती की ओर से दाखिल आपराधिक अपील पर मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति अजय भनोज की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

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घटना 37 साल पुरानी है। 1987 में तत्कालीन जिला क्षेत्र वाराणसी के बलुआ थानांतर्गत सिकरौरा कांड में याची हीरावती के पति, दो देवर और तीन पुत्रों की हत्या कर दी गई थी। इसमें माफिया बृजेश सिंह सहित कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था। वाराणसी के सत्र न्यायालय ने आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके बाद हीरावती ने सत्र न्यायालय केफैसले को हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर चुनौती दी है। कोर्ट उसी पर सुनवाई कर रही है।

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घटना में याची की पुत्री शारदा भी घायल हुई थी। ट्रायल कोर्ट में उसका भी बयान दर्ज किया गया था। तीन दिनों से चल रही सुनवाई में बुधवार को घायल पुत्री का बयान पूरा पढ़ा गया। याची पक्ष की ओर से दलील दी गई कि घटना में घायल पीड़िता उसका चश्मदीद गवाह थी। ट्रायल कोर्ट ने उसके बयानों पर ध्यान नहीं दिया। कहा कि घटना के समय अंधेरा था। गलत रूप से पहचान की गई, जबकि पुलिस की जांच में लालटेन, टार्च सहित घटना के दौरान रोशनी के लिए इस्तेमाल हुई सामग्रियों की फर्द बनाई थी।

खुद विवेचक ने बयान दिया था कि उसने आरोपी बृजेश सिंह को घटना के समय पकड़ा था। इसके बावजूद कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट का फैसला सही नहीं था। तीन दिनों मेंं याची पक्ष की ओर से कुल 13 लोगों के बयान कोर्ट के सामने प्रस्तुत किए गए। याची पक्ष का बयान पूरा होने के बाद आरोपी पक्ष माफिया बृजेश सिंह के अधिक्ता ने अपना पक्ष रखना शुरू किया। इसके बाद कोर्ट ने समयाभाव की वजह से सुनवाई को एक दिन के लिए टाल दी गई।

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