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यूपीपीएससी : स्केलिंग के मुद्दे पर नए अध्यक्ष से मिलने की तैयारी

Sat, 15 May 2021 12:58 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 15 May 2021 12:58 AM IST
सार

  • प्रयागराज समेत पूर्वी यूपी के लाखों छात्र मामले में चाहते हैं राहत
  • छात्रों का दावा, यूपीपीएससी ने मनमाने तरीके से हटाई स्केलिंग

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UPPSC: Preparation to meet new chairman on the issue of scaling
uppsc - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के नए अध्यक्ष संयज श्रीनेत ने अगले सप्ताह ज्वाइन कर सकते हैं। उनके ज्वाइन करने से पहले ही प्रतियोगी छात्रों ने स्केलिंग के मुद्दे पर उनसे मिलने की तैयारी कर रखी है। छात्र लगातार दावा कर रहे हैं कि पीसीएस में स्केलिंग प्रणाली हटा दी गई है, लेकिन यूपीपीएससी इस मसले पर स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहा है। छात्र चाहते हैं कि नए अध्यक्ष ज्वाइन करने के बाद इस मुद्दे पर आयोग का रुख का स्पष्ट करें।
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अभ्यर्थियों का दावा है कि आयोग ने पीसीएस-2019 से स्केलिंग की प्रक्रिया हटा दी है। इस वजह से हिंदी पट्टी के प्रतियोगियों को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। इसके अलावा प्रयागराज समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश के ज्यादातर प्रतियोगी छात्र मानविकी विषयों के साथ पीसीएस परीक्षा में शामिल होते हैं और इन प्रतियोगियों का कहना है कि स्केलिंग लागू न होने की वजह से पीसीएस परीक्षा में हिंदी पट्टी के साथ मानविकी विषय वाले अभ्यर्थियों के चयन का ग्राफ भी तेजी से गिरा रहा है।
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स्केलिंग के मुद्दे पर अभ्यर्थी न्यायालय भी जा चुके हैं और अब चाहते हैं कि नए अध्यक्ष ज्वाइन करने के इस बाबत आयोग के रुख को स्पष्ट करें।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय का कहना है कि पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार के कार्यकाल में पीसीएस-2019 से स्केलिंग हटा दी गई थी और छात्रों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। नतीजा कि परिणाम बिल्कुल विपरीत रहा। टॉप टेन की मेटिर में जहां प्रयागराज समेत पूर्वी यूपी के छात्रों का दबदबा रहा करता था, उनकी जगह अन्य राज्यों के प्रतियोगियों ने ले ली। 
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उच्च पदों पर चयन के मामले में भी यही हुआ और पूरी मेरिट पर इस बदलाव का असर दिखा। नए अध्यक्ष से प्रतियोगियों को काफी उम्मीदें हैं। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह का कहना है कि प्रयागराज में डेलीगेसी एवं हॉस्टल में रहकर ढाई लाख से अधिक छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इनमें से 90 फीसदी छात्र हिंदी माध्यम से मानविकी विषयों के साथ पीसीएस परीक्षा में शामिल होते हैं। नए अध्यक्ष भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके हैं। ऐसे में प्रयागराज एवं पूर्वी यूपी के अभ्यर्थियों की समस्या को वह बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। फिलहाल छात्रों को अब नए अध्यक्ष के ज्वाइन करने का इंतजार है, ताकि उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर स्केलिंग के मुद्दे पर बात की जा सके।
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