यूपीएचईएससी : परीक्षा से परिणाम तक विवादों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में लिखित परीक्षा के साथ ही गड़बड़ियां शुरू हो गईं थीं। शुरुआत में हजारों अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र जारी नहीं किए गए। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह गए। लिखित परीक्षा के बाद आयोग ने कई विषयों की अनंतिम उत्तरकुंजी जारी कर दी।
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उच्च शिक्षा में प्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती सवालों के घेरे में है। विज्ञापन संख्या-50 के तहत प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 2002 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में अब तक ढेरों अनियमितताएं सामने आ चुकीं हैं। परीक्षा से लेकर परिणाम तक उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) विवादों के घेरे में रहा। प्रतियोगी छात्र अब पूरी चयन प्रक्रिया पर ही सवाल उठा रहे हैं। छात्र मांग कर रहे हैं कि इन गलतियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में लिखित परीक्षा के साथ ही गड़बड़ियां शुरू हो गईं थीं। शुरुआत में हजारों अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र जारी नहीं किए गए। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह गए। लिखित परीक्षा के बाद आयोग ने कई विषयों की अनंतिम उत्तरकुंजी जारी कर दी। जिस सेट के पेपर अभ्यर्थियों के बीच बंटे ही नहीं थे, आयोग ने उस सेट के पेपर की उत्तरकुंजी जारी कर दी थी। अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में 47 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 2002 पदों पर भर्ती होनी है और ज्यादातर विषयों की उत्तरकुंजी पर आपत्तियां दर्ज कराई गईं, जिनकी संख्या हजारों में थी।
भर्ती में कई विसंगतियां आईं सामने
आपत्तियों का निस्तारण करते हुए आयोग ने संबंधित विषयों की सही उत्तरकुंजी जारी की। इसके बाद आपत्तियों का निस्तारण करते हुए संशोधित उत्तरकुंजी जारी की गई, लेकिन इसमें भी ढेरों विसंगतियां सामने आईं। वाणिज्य विषय में आयोग ने एक ही प्रश्न को सही और गलत दोनों मान लिया। अभ्यर्थियों की आपत्ति के बाद संशोधित उत्तरकुंजी को पुन: संशोधित किया गया। विधि विषय की संशोधित उत्तरकुंजी भी विवादों से घिरी रही। मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया और यूपीएचईएएसी को विधि विषय के अभ्यर्थियों का प्रस्तावित साक्षात्कार स्थगित करना पड़ा। गलतियां सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि कॉलेजों की वरीयता में भी विसंगति के मामले सामने आए।
आयोग ने कुछ विषयों के साक्षात्कार में शामिल अभ्यर्थियों से कई ऐसे महाविद्यालयों के विकल्प मांग लिए, जो भर्ती के विज्ञापन में शामिल ही नहीं थे। साथ ही विज्ञापन में शामिल कुछ कॉलेजों के लिए वरीयता मांगी ही नहीं गई। अंतिम चयन परिणाम के बाद यह विसंगति सामने आने के बाद आयोग ने कई महाविद्यालयों को लिस्ट से हटाया और कुछ अन्य महाविद्यालयों को लिस्ट में शामिल किया। परीक्षा से लेकर परिणाम तक इसी तरह कुछ अन्य विसंगतियां भी सामने आईं हैं, जो आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहीं हैं।
यूपीपीएससी को सौंपी जाए भर्ती की जिम्मेदारी
प्रतियोगी छात्रों ने मांग की है कि सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की जिम्मेदारी उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से वापस लेकर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को सौंप दी जाए। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की तकरीबन सभी भर्तियों पर विवाद होता है। ऐसी संस्था को भर्ती की जिम्मेदारी सौंपकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। यूपीपीएससी राजकीय डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती करता है और भर्ती बिना विवाद के पूरी होती है। ऐसे में अशासकीय महाविद्यालयों में भी असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती की जिम्मेदारी यूपीपीएससी को सौंप दी जानी चाहिए।