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Upbhokta Ayog : चोरी हुए वाहन की बीमित राशि का 75 प्रतिशत 4,68,750 रुपये भुगतान करे बीमा कंपनी
Mon, 25 Aug 2025 06:20 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 25 Aug 2025 06:20 PM IST
सार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को होलागढ़ बदली का पूरा निवासी देवतादीन के चोरी हुए वाहन के लिए बीमित राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा 4,68,750 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को होलागढ़ बदली का पूरा निवासी देवतादीन के चोरी हुए वाहन के लिए बीमित राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा 4,68,750 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक और आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 10 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये भी देने को कहा है। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम, सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी व सदस्य सरला ने दिया है।
देवतादीन का माल वाहक वाहन दिल्ली से 12 अक्तूबर 2016 को चोरी हो गया था। उन्होंने एफआईआर दर्ज करा समस्त दस्तावेजों संग कंपनी के समक्ष वाहन की बीमा राशि 6,25,000 रुपये का भुगतान करने के लिए दावा प्रस्तुत किया। भुगतान न किए जाने पर शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग के समक्ष वाद दाखिल किया।
शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने वाहन चोरी होने के बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी है। बीमा कंपनी को सभी वैध दस्तावेज सौंप दिए थे। इसके बाद भी बीमा कंपनी बीमित राशि का भुगतान नहीं कर रही है। इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक क्षति हुई।
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बीमा कंपनी ने दलील दी कि शिकायत दर्ज कराने में देरी हुई और उपभोक्ता ने सभी जरूरी दस्तावेज जैसे कि एफआईआर की प्रति और क्लेम फॉर्म उपलब्ध नहीं कराए। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि वाहन का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा था। इसलिए यह मामला उपभोक्ता आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
आयोग ने कहा कि बीमा कवरेज के लिए व्यावसायिक उद्देश्य कोई आधार नहीं है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि अगर चोरी का दावा सही पाया जाता है तो सिर्फ सूचना देने में देरी के आधार पर दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि वह वाहन की बीमित राशि का 75 प्रतिशत आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज संग शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान करे।
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देवतादीन का माल वाहक वाहन दिल्ली से 12 अक्तूबर 2016 को चोरी हो गया था। उन्होंने एफआईआर दर्ज करा समस्त दस्तावेजों संग कंपनी के समक्ष वाहन की बीमा राशि 6,25,000 रुपये का भुगतान करने के लिए दावा प्रस्तुत किया। भुगतान न किए जाने पर शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग के समक्ष वाद दाखिल किया।
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शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने वाहन चोरी होने के बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी है। बीमा कंपनी को सभी वैध दस्तावेज सौंप दिए थे। इसके बाद भी बीमा कंपनी बीमित राशि का भुगतान नहीं कर रही है। इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक क्षति हुई।
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बीमा कंपनी ने दलील दी कि शिकायत दर्ज कराने में देरी हुई और उपभोक्ता ने सभी जरूरी दस्तावेज जैसे कि एफआईआर की प्रति और क्लेम फॉर्म उपलब्ध नहीं कराए। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि वाहन का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा था। इसलिए यह मामला उपभोक्ता आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
आयोग ने कहा कि बीमा कवरेज के लिए व्यावसायिक उद्देश्य कोई आधार नहीं है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि अगर चोरी का दावा सही पाया जाता है तो सिर्फ सूचना देने में देरी के आधार पर दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि वह वाहन की बीमित राशि का 75 प्रतिशत आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज संग शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान करे।