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खुद को कानून से ऊपर समझती है यूपी पुलिस : हाईकोर्ट

Fri, 16 Oct 2026 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Updated Fri, 16 Oct 2026 02:10 AM IST
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UP Police considers itself above the law: High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा यूपी पुलिस खुद को कानून से ऊपर समझती है। उन्हें लगता है मनमानी करना उनका अधिकार है। उनकी गलतियों पर कोई सवाल नहीं उठाएगा, उठ भी गया तो बहानेबाजी से बच निकलेंगे।
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इस तल्ख टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने गौतमबुद्ध नगर निवासी दीपक की एफआईआर से पहले हिरासत को गैरकानूनी करार दिया। साथ ही याची को तत्काल रिहा करने और एसीपी कमलेश कांत व विवेचनाधिकारी अनुज कुमार की सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने का आदेश दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि पुलिस बार-बार कानूनी प्रक्रिया का पालन करने में विफल हो रही है। दस्तावेज महज औपचारिकता के तौर पर तैयार किए जाते हैं, जिनमें ऐसी गलतियां होती हैं जो हिरासत और गिरफ्तारी की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
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पांच जगह गलत तारीख, दस्तावेज बाद में भरने की आशंका
मामला 23 अगस्त का है। संपत्ति विवाद में दो पक्षों के बीच हिंसक विवाद हुआ। पुलिस ने दीपक को 23 अगस्त की शाम करीब चार बजे हिरासत में लिया, जबकि एफआईआर उसी दिन रात 9:39 बजे दर्ज हुई। गिरफ्तारी 24 अगस्त को दोपहर 2:57 बजे दिखाई गई। गिरफ्तारी और तलाशी संबंधी दस्तावेजों में पांच जगह 23 अगस्त की तारीख दर्ज थी, जबकि गिरफ्तारी 24 अगस्त की दिखाई गई। पुलिस अधिकारियों ने इसे गलती बताया, लेकिन अदालत ने कहा कि तारीखें ठीक करके संशोधन प्रमाणित क्यों नहीं किया गया।
कोर्ट ने यह भी पाया कि बंधपत्र में राशि का कॉलम खाली था। उसे स्वीकार या अस्वीकार करने के संबंध में अधिकारी के हस्ताक्षर, तारीख और समय दर्ज नहीं थे। लिहाजा, कोर्ट ने प्रथम दृष्टया आशंका जताई कि दस्तावेज बाद में भरे गए और दीपक के हस्ताक्षर खाली कागज पर लेकर गिरफ्तारी के आधार बाद में लिखे गए हो सकते हैं।


प्रक्रिया की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी
कोर्ट ने कहा कि अपराध हो जाने के बाद बीएनएसएस की धारा 170 के तहत निवारक गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। तनावपूर्ण स्थिति भी पुलिस को कानून के पालन से छूट नहीं देती। गिरफ्तारी के समय वकील की सहायता के अधिकार की जानकारी देने में भी खामी पाई गई। कोर्ट ने यह भी पाया कि मजिस्ट्रेट ने पुलिस के दस्तावेजों की जांच उचित तरीके से नहीं की।

पुलिस कर्मियों को सुधारें डीजीपी
कोर्ट ने डीजीपी से पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में सुधार करने को कहा। चेतावनी दी कि संदिग्धों को थाने में 24 घंटे से अधिक रोककर छोड़ने जैसी कार्रवाई को अब प्रक्रिया की जानकारी न होने के बहाने स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसी कार्रवाई को तब तक दुर्भावनापूर्ण माना जाएगा, जब तक पुलिस इसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न दे दे।
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