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UP : साहित्यकार प्रो. फातमी सहित मकानों के ध्वस्त करने के मामले में पीडीए को देना होगा मुआवजा

Wed, 02 Apr 2025 12:31 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 02 Apr 2025 12:31 AM IST
सार

पीडीए अफसरों ने लूकरगंज के नजूल भूखंड संख्या-19 में ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई मार्च 2021 में की थी। तीन बुलडोजर लेकर पहुंचे अफसरों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के अध्यक्ष रहे प्रो. अली...

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UP: PDA will have to pay compensation in the case of demolition of houses including that of litterateur Prof.
प्रयागराज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तीन साल पहले साहित्यकार प्रो. अली अहमद फातमी समेत कई लोगों के भवनों को जमींदोज करने पर पीडीए को सुप्रीम कोर्ट से मुंह की खानी पड़ी है। पीडीए ने नजूल भूमि में निर्माण बताकर इन्हें तोड़ा था। अब कोर्ट ने छह हफ्ते के अंदर 10-10 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

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पीडीए अफसरों ने लूकरगंज के नजूल भूखंड संख्या-19 में ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई मार्च 2021 में की थी। तीन बुलडोजर लेकर पहुंचे अफसरों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के अध्यक्ष रहे प्रो. अली अहमद फातमी, उनकी बेटी नायला फातमी समेत दर्जन भर घरों को दो दिन की कार्रवाई में तोड़ दिया था।
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कार्रवाई के दौरान तत्कालीन एडीएम नजूल गंगा राम गुप्ता और पीडीए के जोनल अधिकारी आलोक पांडेय मौजूद थे। ध्वस्तीकरण के खिलाफ प्रो. फातमी, जुल्फिकार अहमद, नायला फातमी समेत कुल पांच लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इन सभी को राहत मिली है।

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नजूल के पट्टे का नहीं हुआ था नवीनीकरण


प्रोफेसर अली अहमद फातमी ने वर्ष 1988 में महमूदा बेगम से रजिस्ट्री कराई थी। बेटी नायला फातमी के लिए भी पास में ही एक प्लॉट लेकर घर बनवाया था। पीडीए ने दोनों को ढहा दिया। पीडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने इन मकानों के नजूल की भूमि पर बने होने और नक्शा पास नहीं होने का दावा किया था। नजूल भूमि के पट्टे की सीमा 1999 में खत्म हो गई, लेकिन इसका नवीनीकरण नहीं कराया गया।

बच्चियों ने रोते हुए पूछा था...अब्बा यह क्या हो रहा


प्रो. फातमी की 32 वर्षों की कमाई रेत की तरह पीडीए ने ध्वस्त कर दी थी। तब, उन्होंने बताया था कि पांच हजार किताबें भी कार्रवाई के दाैरान बर्बाद हो गईं। उन्हें परिवार सहित करेली के एक रिश्तेदार के यहां शरण लेनी पड़ी थी। बुलडोजर कार्रवाई को देखकर आंखों में आंसू भरकर बेटी बोली थी, अब्बा यह क्या हो गया? सेंट मेरीज में पढ़ने वाली नवासी सारा फातिमा और नवासे सारिम फातमी ने रोकर कहा, अरे मेरी किताबेें, आलमारी कहां जा रही हैं।



लूकरगंज में नोटिस देने के बाद नजूल भूमि से अवैध निर्माण हटाए गए थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है। अभी फैसले की कापी नहीं मिली है। मिलने पर ही कुछ स्पष्ट बता सकूंगा। - अजीत कुमार सिंह, सचिव, पीडीए

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